Javed Akhtar को आज भी है इस दिग्गज के लिए गाने न लिख पाने का अफ़सोस, पुराने समय को याद कर हुए भावुक.. Priya Marathe Passed Away: ‘पवित्र रिश्ता’ फेम एक्ट्रेस प्रिया मराठे का निधन, 38 साल की उम्र में कैंसर से हारी ज़िंदगी की जंग Priya Marathe Passed Away: ‘पवित्र रिश्ता’ फेम एक्ट्रेस प्रिया मराठे का निधन, 38 साल की उम्र में कैंसर से हारी ज़िंदगी की जंग Pitru Paksha 2025: अगस्त्य मुनि तर्पण के साथ शुरू होगा पितृ पक्ष, इस बार 14 दिनों तक होंगे पिंडदान; जानें... पूरी डिटेल Asia Cup 2025: भारत के लिए एशिया कप में गेम चेंजर बन सकते ये चैंपियन खिलाड़ी, कोई विकेट उखाड़ने में माहिर तो कोई 'सिक्सर किंग' नाम से मशहूर Owner Of Bigg Boss: कौन है बिग बॉस के असली ओनर? जानिए... एक सीजन में कितनी होती है कमाई Rule Changes From 1 Sept: 1 सितंबर 2025 से बदल जाएंगे कई अहम नियम, सीधे आपकी जेब पर पड़ेगा असर; जान लें.. Rule Changes From 1 Sept: 1 सितंबर 2025 से बदल जाएंगे कई अहम नियम, सीधे आपकी जेब पर पड़ेगा असर; जान लें.. Bihar Crime News: सीएम नीतीश के गृह जिला में युवक की हत्या, पुरानी दुश्मनी में मर्डर की आशंका Bihar Crime News: सीएम नीतीश के गृह जिला में युवक की हत्या, पुरानी दुश्मनी में मर्डर की आशंका
30-May-2020 03:49 PM
PATNA : बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। इस वक्त की जो बड़ी खबर सामने आ रही है उसके मुताबिक ईडी ने 14 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति सृजन घोटाले में कार्रवाई करते हुए जब्त की है। इनकी तरफ से की गई कार्रवाई में 14.32 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है जिनमें 20 फ्लैट, 18 दुकानें, 33 प्लॉट और एक कार भी शामिल है। इसके अलावे बैंक में रखा 4 करोड़ 84 लाख रुपए 20 जब्त किया गया है।
सूत्रों के हवाले से जो बड़ी खबर सामने आ रही है उसके मुताबिक के प्रवर्तन निदेशालय ने पटना और भागलपुर के अलावे नोएडा गाजियाबाद पुणे और रांची में यह एक्शन लिया है ।सृजन घोटाले से जुड़े अभियुक्तों की संपत्ति को ईडी ने अटैच किया है। नोएडा गाजियाबाद और भागलपुर में कुल 18 दुकानों को अटैच किया गया है।
बता दें कि भागलपुर में कई सरकारी विभागों की रकम सीधे विभागीय ख़ातों में न जाकर या वहां से निकालकर 'सृजन महिला विकास सहयोग समिति' नाम के एनजीओ के छह ख़ातों में ट्रांसफ़र कर दी जाती थी। 2007-08 में भागलपुर में सृजन को-ऑपरेटिव बैंक खोला गया। इसके बाद विकास के नाम पर आने वाला सरकारी पैसा इस बैंक के खाते में ट्रांसफर होता था और इसके बाद यह पैसा यहां से निकालकर बाजार में पहुंचाया जाता था। इस पैसे को खपाने के लिए कई एनजीओ भी बने। बताया जाता है कि इन एनजीओ के नाम पर अधिकारियों ने ब्लैक मनी को व्हाइट मनी में बदला और करोड़ों रुपये का घोटाला किया। इस मामले में तत्काली डीएम पर भी चार्जशीट किया गया था।