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सिपाही की बेटी को पुलिसवाले के बेटे ने छेड़ा, बाप का पावर देख थानेदार ने नहीं दर्ज किया FIR

10-Jan-2021 02:38 PM

BHAGALPUR :  छेड़खानी की एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने सबको हैरान कर दिया है. दरअसल एक सिपाही की बेटी ने हवलदार के बेटे के ऊपर छेड़खानी करने का आरोप लगाया है. इस मामले को लेकर जब पीड़िता ने थाने में आवेदन दिया तो आरोपी पक्ष का पावर देख थानेदार ने मामला दर्ज नहीं किया. क्योंकि छेड़खानी करने वाले युवक का बाप पुलिस में है और उसका भाई भी भागलपुर एसएसपी ऑफिस में ही तैनात है. 


मामला भागलपुर जिले के ललमटिया थाना का है, जहां एक सिपाही की बेटी ने एक अन्य पुलिसवाले के बेटे के ऊपर छेड़खानी करने का आरोप लगाया है. इस घटना के संबंध में जानकारी मिली है कि पीड़ित लड़की के पिता सीटीएस नाथनगर में सिपाही हैं, जबकि आरोपी लड़के विकास कुमार का पिता सीटीएस नाथनगर में ही हवलदार है. इतना ही नहीं उसका भाई भी एसएसपी कार्यालय में तकनीकी सेल में पदस्थापित है.


इस मामले को लेकर पीड़िता के पिता ने डीआईजी से शिकायत की थी कि आरोपी लड़के के भाई के दबाव में आकर आरोपी पक्ष का केस दर्ज कर लिया जो पूरी तरह से झूठा है. जांच में आरोप को सही पाये जाने के बाद डीआईजी सुजीत कुमार ने कड़ा एक्शन लेते हुए ललमटिया थानाध्यक्ष ओमप्रकाश को सस्पेंड कर दिया. 


डीआईजी सुजीत कुमार ने ललमटिया थानाध्यक्ष ओमप्रकाश को सस्पेंड कर एसएसपी को उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का भी निर्देश दिया है. बताया जा रहा है कि निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय भागलपुर पुलिसलाइन होगा. जानकारी मिली है कि पीड़ित पक्ष की शिकायत के बाद एएसपी सिटी से मामले की जांच कराई थी. एएसपी ने जांच में ललमटिया थानाध्यक्ष पर लगे आरोप को सही बताया और उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की थी, जिसके बाद डीआईजी ने उसे सस्पेंड किया. 


पीड़ित पक्ष ने तीन दिसंबर को डीआईजी से मुलाकात की थी और बताया था कि लड़की से छेड़खानी का केस दर्ज करने के लिए उन्होंने 19 अक्टूबर को ललमटिया थानाध्यक्ष को आवेदन दिया था पर केस दर्ज नहीं किया गया. 26 अक्टूबर को आरोपी पक्ष की तरफ से भी आवेदन लेकर ललमटिया थानाध्यक्ष ने उसी दिन दोनों पक्षों की तरफ से केस दर्ज कर दिया.


पीड़ित पक्ष का कहना था कि थानाध्यक्ष ने सात दिन बाद उनके आवेदन पर केस दर्ज किया पर आरोपी की तरफ से भी केस कर दिया जो पूरी तरह से गलत था. एएसपी सिटी ने जब जांच की तो पाया कि पीड़ित पक्ष के दिये आवेदन की तिथि को ओवर राइटिंग कर बदल दिया गया था.