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21-May-2023 09:07 AM
By First Bihar
PATNA : राज्य सरकार के तरफ से अनुदान लेने वाले मदरसों को अब पाई-पाई का हिसाब देना होगा। मदरसों को यह बताना होगी कि राज्य सरकार के तरफ से उपलब्ध कराई गई राशि किस मद में कितनी खर्च की गई। इसके साथ ही मदरसों को खर्च की गई राशि को ऑडिट भी कराना होगा। इसकी रिपोर्ट ऑनलाइन भेजनी होगी।
दरअसल, राज्य में 1942 अनुदानित मदरसे हैं। इनमें वस्तानिया के 1732, फौकानिया के 119, मौलवी के 55, आलिम के 22 और फाजिल स्तर के 14 मदरसे हैं। इसके पहले ये मदरसे उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराते थे, जिसमें खर्च का सटीक विवरण नहीं होता था। जिसके बाद इसकी शिकायत दर्ज करवाई गई और जब जांच हुई तो 609 मदरसों का फर्जीवाड़ा सामने आया। यह जांच पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर चल रही है।
मालुम हो कि, बीते 22 जनवरी को पटना हाईकोर्ट में लोकहित याचिका दायर करने वाले मो. अलाउद्दीन बिस्मिल ने आरोप लगाया था कि 609 मदरसों ने मान्यता संबंधी फर्जी कागजात प्रस्तुत कर अनुदान लिया।तब याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य के अनुदान पाने वाले मदरसों की जांच करने का आदेश शिक्षा विभाग को दिया है। फिलहाल मदरसों की जांच जारी है। फर्जी कागजात का मामला सीतामढ़ी जिले के मदरसों से जुड़ा है।
जानकारी हो कि, शिक्षा विभाग ने बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड नियमावली-2022 को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। यह नियमावली इस साल से शत-प्रतिशत प्रभावी हो, इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। नियमावली में व्यापक प्रावधान किया गया है ताकि मदरसों में सुधार लाने को प्राथमिकता दी जा सके।
मदरसों को संबद्धता देने, शिक्षा विभाग के अनुमोदन के बाद इस संबंध में नियमावली बनाने और प्रस्वीकृति के लिए निर्धारित मानक पूरा नहीं करने पर प्रस्वीकृति वापस लेने का अधिकार बोर्ड को दिया गया है। मदरसों को अनुदान की श्रेणी में लाने के लिए अनुशंसा का अधिकार भी बोर्ड को दिया गया है।