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26-Oct-2022 07:25 PM
BETTIAH: बीते 2 अक्टूबर से जन सुराज यात्रा पर निकले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बड़ा खुलासा किया है। जन सुराज यात्रा की फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा है कि देश के 6 राज्यों के मुख्यमंत्री इस अभियान में उनकी मदद कर रहे हैं। पिछले दिनों जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने प्रशांत किशोर की जन सुराज यात्रा पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल खड़ा किया था और कहा था कि वे बीजेपी के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। ललन सिंह ने यात्रा पर हो रहे खर्च की सीबीआई और ईडी से जांच कराने तक की मांग कर दी थी।
प्रशांत किशोर ने कहा है कि पदयात्रा को सुचारू ढंग से चलाने के लिए जो खर्च हो रहा है वह उन लोगों के पास से आ रहा है जिनके लिए पिछले 10 वर्षों में उन्होंने काम किया है। उन्होंने कहा कि वे न तो सांसद हैं और ना ही विधायक। उन्होंने कहा कि बिहार में कोई भी व्यक्ति यह कहने वाला नहीं है कि किसी से एक रुपया भी लिया हूं। पिछले 10 वर्षों में 11 चुनाव कराए हैं जिसमें से 10 में जीत हासिल हुई है। 6 राज्यों में वैसे मुख्यमंत्री हैं जिनको सीएम बनाने में हमने मदद किया है, उनसे कभी किसी से एक पैसा नहीं लिया लेकिन अब जरूरत पड़ी है तो ले रहे हैं। अब उनसे मदद ले रहें हैं और उनसे कह रहे हैं कि बिहार में एक प्रयास कर रहे हैं, उसमें मदद कीजिए।
प्रशांत किशोर ने कहा है कि चुनावी रैलियों और कार्यक्रमों के लिए जो बड़े बड़े मंच बनाए जाते हैं उसमें पैसा खर्च होता है। रैलियों को लेकर जो विज्ञापन होता है उसमें खर्च होता है, लोगों को बसों में भरकर लाने में भी काफी पैसे खर्च होते हैं लेकिन जन सुराज यात्रा में ये सब तो हो नहीं रहा है। न तो हेलीकॉप्टर का कोई खर्चा है और ना ही मंच बनाया जा रहा है। सड़क के किनारे खड़े होकर लोगों से बात करते हैं। अपनी यात्रा के दौरान किसी को एक रुपया नहीं दिया है कि वे जन सुराज यात्रा में शामिल हो, इसलिए दूसरों के मुकाबले मेरा खर्च बहुत ही कम है। पदयात्रा को सुचारू तरीके से चलाने में जो खर्च आ रहा है वह उनसे मिल रहा है जिनकी चुनाव में मदद की है।
पदयात्रा का अगला पड़ाव शुरू करने से पहले प्रशांत किशोर ने पश्चिम चंपारण के पतिलार गांव स्थित हरिहर उच्च विद्यालय में ये बाते कहीं। इस दौरान पीके ने राज्य और केंद्र की सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार की अधिकांश योजनाएं बस कागजों तक ही सिमटकर रह गई है और गरीब जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण सड़कों की दशा बद से बदतर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी तक वे करीब 200 गांवों को भ्रमण कर चुके हैं लेकिन गांवों में जो समस्या पहले थी वह अब भी जस की तस है।