Civil Court Bomb Threat : सिविल कोर्ट को उड़ाने की फिर मिली धमकी, 24 घंटे के भीतर दूसरी बार कॉल से मचा हड़कंप Patna Traffic Update : पटना का इनकम टैक्स गोलंबर बदलेगा, ट्रैफिक व्यवस्था में होने जा रहा बड़ा परिवर्तन; जानिए नीतीश सरकार का नया प्रोजेक्ट Bihar Budget Session : बिहार विधानमंडल का बजट सत्र: महिला सुरक्षा पर हंगामे के आसार, आज कई विभागों से जुड़े सवालों पर होगी चर्चा Pahadi Saidpur Nala : पटना के पहाड़ी-सैदपुर नाले में गिरा छात्र: सुरक्षा घेरा ध्वस्त, निर्माण कार्य में लापरवाही से हुआ हादसा Bihar police dispute : होटल में खाने का पैसा मांगना पड़ा महंगा: मालिक से मारपीट का आरोप, SHO पर गंभीर सवाल; एसपी और डीआईजी से शिकायत Bihar Road : बिहार में सड़कों की ऊंचाई बढ़ाने पर सख्ती, पथ निर्माण विभाग ने जारी किया नया आदेश; इंजीनियरों को पहले करना होगा यह काम Vande Bharat Express : बिहार में इन इलाके के लोगों को जल्द मिलने वाला है वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात, नई रेलवे लाइन की भी उम्मीद Bihar Road : बिहार के इस इलाके के लोगों की बदलेगी किस्मत, 2 लेन की जगह अब 4 लेन सडकों का होगा निर्माण; सरकार से मिली मंजूरी Teacher Vacancy 2026 : बिहार शिक्षक भर्ती 2026: 46 हजार पदों के लिए BPSC ने जारी किया नोटिस, विज्ञापन जल्द Bihar weather : बिहार में ठंड पड़ी कमजोर, न्यूनतम तापमान बढ़ा; उत्तर बिहार में सुबह घने कोहरे की संभावना
16-Sep-2020 02:27 PM
PATNA: बिहार के लाखों घरों के चुल्हे इस वजह से जल पाते हैं क्योंकि उन घरों में से एक या कई लोग अपना घर छोड़कर शहर के घरौंदे में रहते हैं। दो जून की रोटी गरीबों की सबसे बड़ी जरूरत होती है और पलायन की सबसे बड़ी मजबूरी भी यही होती है। कोरोना संकट में प्रवासी बिहारियों का जो दर्द सामने आया, जो तस्वीरें सामने आयी वो रोंगटे खड़ी कर देने वाली थी। कुछ ने अपने घर पहुंचने के लिए हजारों किलोमीटर का फासला पैदल तय किया और कुछ चंद कदम के फासले से पीछे रह गये। संकट के सितम से जो भूख और बेरोजगारी पनपी उसने प्रवासी बिहारियों को जान पर खेलकर घर लौटने को मजबूर किया। जिन्होंने इस दर्द को जिया है वे तो इसे कभी नहीं भूल पाएंगे लेकिन हमारे आपके जेहन से भी वो तस्वीरें कभी नहीं हटेंगी लेकिन न जाने क्यों सियासत दानों को यह मुलागलता होता है कि लोग बहुत जल्दी चीजों को भूल जाते हैं। अब बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी को हीं ले लीजिए जिस दौर में ऐसा सोंचने की भी हिम्मत कोई नहीं कर सकता कि पलायन शौक है उस दौर में डिप्टी सीएम साहब ने यह कहने की जुर्रत कर दी है कि बिहार में पलायन की परंपरा है और लोग आनंद के लिए पलायन करते हैं।
डिप्टी सीएम साहब यह भी कहते हैं कि बिहार में दो जून की रोटी कमाने के लिए किसी को बाहर जाने की जरूरत नहीं है। अब पलायन की पाॅलटिक्स को समझिए। डिप्टी सीएम सुशील मोदी का यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है। सवाल यह है कि सुशील मोदी जैसा मंझा हुआ राजनेता चुनाव के वक्त ऐसे बयानों के नुकसान को नहीं समझता? बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पलायन बिहार में राजनीतिक मुद्दा है। विरोधी तो छोड़िए बीजेपी-जेडीयू के सहयोगी लोजपा के सुप्रीमो चिराग पासवान भी पलायन को लेकर सीएम नीतीश कुमार पर सवाल उठाते रहे हैं ऐसे में सवाल यह भी है कि डिप्टी सीएम सुशील मोदी पलायन को लेकर इतना हल्का बयान अनजाने में दिया या फिर यह नीतीश कुमार को पलायन की पाॅलटिक्स में फंसाने की कोशिश है?
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में एक धारणा लगातार टहल रही है कि बिहार में नीतीश कुमार को लेकर एक सत्ता विरोधी लहर है, एक नाराजगी है। इस नाराजगी की एक बड़ी वजह 40 लाख प्रवासी बिहारी हैं जिनमें से ज्यादातर ने कोरोना संकट में बदत्तर जिंदगी गुजारी है और सरकारी इंतजामों को लेकर और सीएम नीतीश कुमार के कुछ बयानों को लेकर उनमें नाराजगी है। क्या यह सिर्फ इसलिए है कि ऐसे बयानों से लोगों के गुस्से को और भड़काया जाए ताकि नीतीश थोड़े और बैकफूट पर आए क्योंकि यह जगजाहिर है कि बयान भले हीं डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने दिया है लेकिन नुकसान नीतीश कुमार का हीं होना है। ऐसे में सवाल यह भी है कि पलायन पर डिप्टी सीएम सुशील मोदी का बयान संयोग है या प्रयोग?