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02-Jul-2021 02:43 PM
PATNA : बीते महीने लोक जनशक्ति पार्टी के 4 सांसदों के साथ खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने का दावा करने वाले पशुपति कुमार पारस के तेवर अब धीरे-धीरे नरम पड़ रहे हैं. पशुपति पारस ने जिस वक्त चिराग पासवान के खिलाफ बगावत करते हुए खुद को संसदीय दल का नेता घोषित कराया था और बाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे. उस वक्त उन्हें उम्मीद थी कि केंद्रीय कैबिनेट में शामिल हो जाएंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं नतीजा अब पारस के तेवर भी पहले से नरम पड़े हैं.
पटना पहुंचे पशुपति पारस ने स्वर्गीय रामविलास पासवान की जयंती को लेकर सवाल पूछे जाने पर कहा है कि दिवंगत नेता रामविलास पासवान जी की जयंती मनाने को लेकर कोई विवाद नहीं है. चिराग पासवान भी वही कर रहे हैं, जो मैं कर रहा हूं. दोनों का उद्देश्य एक है कि स्वर्गीय रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि दी जाए.
आपको बता दें कि 5 जुलाई को पटना स्थित प्रदेश एलजेपी कार्यालय में स्वर्गीय रामविलास पासवान की जयंती पारस खेमे की तरफ से मनाई जाएगी. वहीं दूसरी तरफ चिराग पासवान पारस के संसदीय क्षेत्र हाजीपुर में अपने पिता की जयंती मनाएंगे. हाजीपुर की एक दलित बस्ती में चिराग की तरफ से जयंती का आयोजन किया जाएगा.
पटना एयरपोर्ट पर मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान पशुपति पारस ने चिराग पासवान को आशीर्वाद यात्रा नहीं मनाने की सलाह दी. पशुपति ने कहा कि चिराग पासवान को आशीर्वाद यात्रा नहीं निकालनी चाहिए. आशीर्वाद यात्रा को पशुपति पारस ने गलत बताया और कहा कि किस बात का आशीर्वाद यात्रा. रामविलास पासवान तो अब इस दुनिया में हैं ही नहीं.
पशुपति पारस ने कहा कि श्रद्धांजलि सभा होना चाहिए और चिराग पासवान का कर्मभूमि जमुई है. इसलिए पशुपति पारस ने चिराग पासवान को सलाह दी कि वह जमुई से यात्रा निकाले. पशुपति ने बताया कि उनकी ओर से लोजपा पार्टी कार्यालय में जयंती मनाई जाएगी.