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पटना में कोर्ट में काम करने वाले चपरासी की बेटी बनी जज, पीएमसीएच में क्लर्क हैं पति

02-Dec-2019 05:43 PM

PATNA : राजधानी से एक शख्‍सयित की कहानी सामने आई है. जो सबके लिए रोल मॉडल बन गई है. कोर्ट में चपरासी का काम करने वाले पिता की बेटी ने जज बनकर मिसाल कायम किया है. जो पिता न्यायालय में जज का 'टहल' बजाते थे, अब उनकी बिटिया खुद एक जज बन गई. जिस बच्ची ने बचपन में अपने पिता को अदालत में चपरासी का काम करते हुए देखा, उसने अपने पिता का सपना पूरा किया. बचपन के सपने को पटना की इस होनहार बिटिया ने हकीकत में बदल दिया. 


राजधानी पटना के कंकड़बाग इलाके की रहने वाली अर्चना ने अपने चपरासी पिता का नाम रोशन किया है. न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा पास कर अर्चना खुद जज बन गई है. कोर्ट में चपरासी का काम करने वाले पिता के सपने को उसने पूरा कर दिखाया है. बिहार न्यायिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा में चयन होने की खबर मिलते ही पूरे परिवार में खुशी का माहौल छा गया. अर्चना ने बताया उनके पिता गौरीनंदन सारण जिले के सोनपुर व्यवहार न्यायालय में चपरासी पद पर थे. उनके पिता रोज किसी न किसी जज टहल बजाते थे. स्कूल में पढ़ाई करने के दौरान ही अर्चना ने जज बनने की ठान ली और आज उसने अपने सपने को पूरा कर दिखाया है.


अर्चना के मुताबिक शास्त्रीनगर राजकीय उच्च विद्यालय से 12वीं और पटना विश्वविद्यालय से हॉयर एजुकेशन करने के बाद वह शास्त्रीनगर राजकीय उच्च विद्यालय में वह छात्रों को कंप्‍यूटर  सिखाने लगीं. इसी बीच अर्चना की शादी हो गई. शादीशुदा और एक बच्चे की मां होने के बावजूद भी उन्होंने हौसला टूटने नहीं दिया. सपने को साकार करने के लिए उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा. हालांकि अर्चना ने इतना जरूर कहा कि  शादी के बाद उन्हें लगा कि अब उनका सपना पूरा नहीं हो पायेगा, लेकिन पीएमसीएच में क्लर्क का काम करने वाले उनके पति राजीव रंजन ने उन्हें काफी सपोर्ट किया. 


शादी के बाद अर्चना ने पुणे विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और वहीं से उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्हें फिर पटना वापस आ जाना पड़ा. जिसके बाद 2014 में उन्होंने बीएमटी लॉ कॉलेज पूर्णिया से एलएलएम पास किया. इतना ही नहीं, उन्होंने पांच साल के बेटे के साथ दिल्ली में पढ़ाई भी की और कोचिंग भी चलाया. दूसरे प्रयास में बिहार न्यायिक सेवा में सफलता प्राप्त करने वाली अर्चना ने बताया कि 'जज बनने का सपना तब देखा था जब मैं सोनपुर जज कोठी में एक छोटे से कमरे में परिवार के साथ रहती थी. छोटे से कमरे से मैंने जज बनने का सपना देखा जो आज पूरा हुआ है.'