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06-May-2022 09:00 PM
PATNA: जजों की कमी के कारण लंबित मुकदमों का अंबार झेल रहे पटना हाईकोर्ट को बडी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पटना हाईकोर्ट में सात नये जज की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. बिहार में न्यायिक सेवा में काम कर रहे अधिकारियों को हाईकोर्ट में जज बनाने के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मंजूरी मिली है।
पटना हाईकोर्ट में ये बनेंगे जज
सीजेआई जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 4 मई को हुई बैठक में बिहार के न्यायिक सेवा के अधिकारियों को हाईकोर्ट का जज बनाने की मंजूरी दी है. पटना में ज्यूडिशियल ऑफिसर से जिन 7 लोगों को हाई कोर्ट में जज बनाने की मंजूरी दी गई है उनमें शैलेंद्र सिंह, अरुण कुमार झा,जितेंद्र कुमार, आलोक कुमार पांडे, सुनील दत्त मिश्रा, चंद्र प्रकाश सिंह और चंद्रशेखर झा के नाम शामिल हैं।
वैसे सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन हाईकोर्ट में कुल 15 नये जज की नियुक्ति की मंजूरी दी है. दिल्ली हाईकोर्ट के सात वकीलों को हाईकोर्ट जज के रुप में पदोन्नत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी है. दिल्ली हाई कोर्ट के वकील विकास महाजन, तुषार राव गेडेला, मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा, सचिन दत्ता, अमित महाजन, गौरांग कंठ और सौरभ बनर्जी को जज बनाने की मंजूरी दी गयी है. वहीं आंध्र प्रदेश के वकील मेहबूब सुभानी शेख को हाई कोर्ट जज के रुप में नामित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गयी है।
ऐसे बनते हैं हाईकोर्ट के जज
किसी व्यक्ति को हाईकोर्ट का जज बनने के लिए उसके पास लॉ की बैचलर डिग्री होनी चाहिए. इसके साथ ही उसे 10 साल तक न्यायिक कार्य करने का अनुभव भी होना चाहिए. हाईकोर्ट का जज बनने के लिए कोई न्यूनतम आयु सीमा तय नहीं है. लेकिन 62 साल की उम्र में हाईकोर्ट के जज को रिटायर होना पड़ता है. लिहाजा 62 साल से कम उम्र वाले व्यक्ति को जज बनाया जा सकता है. हाईकोर्ट में जज बनाने की सिफारिश वहां की कॉलेजियम सुप्रीम कोर्ट को भेजती है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मंजूरी के बाद उसे केंद्र सरकार के पास भेजा जाता है. केंद्र सरकार उसके बाद जजों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी करती है।