Bihar police news : महिला कॉन्स्टेबल की संदिग्ध मौत: बंद बाथरूम में फंदे से लटका मिला शव, नोट्स से खुल सकते हैं राज Bihar News : बिहार में गंगा के बाद अब फल्गु नदी के किनारे बदलेगा शहर का चेहरा, इस जिले में बनेगी 16KM सड़क; जाम से मिलेगी राहत Bihar Census News : जनगणना 2027 में बड़ा बदलाव! अब पूछा जाएगा—घर की बागडोर महिला के हाथ में या पुरुष के? JP Ganga Path : पटना में बन रहा 7KM का मेगा रिवरफ्रंट पार्क! जेपी गंगा पथ बनेगा टूरिस्ट हब, जानें क्या-क्या मिलेगा BPSC mains : BPSC 71वीं Mains 2026 का शेड्यूल जारी, जानें कब है कौन सा पेपर; यह रही पूरी लिस्ट Bihar Panchayat Elections 2026 : इस साल पंचायत चुनाव में पहली बार ईवीएम, फॉर्म 1 का इंतजार; जानिए कब शुरू होगा वोटर लिस्ट का काम Bihar Diwas 2026 : पटना में 3 दिन तक मनाया जाएगा भव्य बिहार दिवस, ‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’ थीम पर कार्यक्रम Bihar weather : बिहार में बदला मौसम का मिज़ाज, 24 जिलों में येलो अलर्ट; भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना दिल्ली में शाहनवाज हुसैन के आवास पर ईद मिलन समारोह, नितिन नबीन-चिराग पासवान सहित कई बड़े नेता रहे मौजूद मुजफ्फरपुर में ईद पर विरोध प्रदर्शन, शिया समुदाय ने काली पट्टी बांधकर अमेरिका-इजराइल के खिलाफ जताया विरोध
07-Jul-2021 07:44 PM
PATNA : केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जनता दल यूनाइटेड के कई नेता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोदी कैबिनेट में शामिल होने वाले जेडीयू कोटे से इकलौते मंत्री हैं. अब तक के जिन नामों की चर्चा हो रही थी, उन्हें निराशा के अलावा और कुछ भी नहीं मिला है. ललन सिंह, चंद्रेश्वर चंद्रवंशी, संतोष कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर, दिलेश्वर कामत समेत कई ऐसे नाम, जो मिनिस्टर इन वेटिंग के तौर पर चल रहे थे. अब वह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. लेकिन केंद्रीय कैबिनेट विस्तार से इधर सबसे बड़ा धोखा उपेंद्र कुशवाहा के साथ हुआ है.
उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अपनी पार्टी आरएलएसपी का जेडीयू में विलय कर दिया था. तब कुशवाहा का दोनों बाहें फैलाकर स्वागत करने वाले नीतीश कुमार ने खुले मंच से ऐलान किया था कि उपेंद्र कुशवाहा इसी वक्त से पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. लेकिन फर्स्ट बिहार आपको बता रहा है कि दरअसल नीतीश कुमार का ऐलान एक धोखे के अलावा और कुछ भी नहीं.
जनता दल यूनाइटेड का संविधान कुशवाहा को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनने की इजाजत नहीं देता है. पार्टी के संविधान की धारा 28 में इस बात का जिक्र है कि पार्लियामेंट्री बोर्ड का अध्यक्ष कौन हो सकता है. जेडीयू का संविधान बताता है कि पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष ही संसदीय बोर्ड का चेयरमैन होगा. इस लिहाज से अगर पार्टी के अध्यक्ष आरसीपी सिंह है तो कुशवाहा संसदीय बोर्ड के चेयरमैन नहीं हो सकते.
जानकार बताते हैं कि नीतीश कुमार जब कुशवाहा को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर रहे थे. उसके पहले उन्हें जेडीयू के संविधान की जानकारी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने दी थी. तब नीतीश कुमार ने यह कहा था कि यह सब बाद में देख लेंगे. यानी कुशवाहा को खबर भी नहीं लगी कि नीतीश कुमार ने उन्हें किस तरह का झूठा लॉलीपॉप दिया है.
फर्स्ट बिहार आपको डंके की चोट पर यह बता रहा है कि कैसे जेडीयू के संविधान की अनदेखी कर कुशवाहा को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया गया. अगर कुशवाहा को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाना था और आरसीपी सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर रहने देना था. तो इसके लिए पार्टी के संविधान में बदलाव जरूरी था. लेकिन ऐसा नहीं किया गया.
हद तो यह है कि कुशवाहा पिछले कई महीनों से संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष हैं और पार्टी के ज्यादातर नेताओं को इसकी जानकारी तक नहीं. कुछ सीनियर लीडर्स को छोड़ दें तो सभी यही समझ रहे हैं कि कुशवाहा पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष हैं और आरसीपी सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष. जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष ही संसदीय बोर्ड का चेयरमैन हो सकता है. फर्स्ट बिहार ने जब इस खबर का खुलासा किया है. उसके बाद ना केवल जनता दल यूनाइटेड के अंदर बल्कि सियासी गलियारे में हड़कंप की स्थिति है.