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11-Oct-2022 07:13 AM
PATNA: एक महीने पहले तेजस्वी यादव ने अपने जिस विभाग को सुधार देने का एलान किया था, उसकी पोल नीतीश कुमार के सामने खुली. उसके बाद नाराज मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को बुलाया. नीतीश ने मुख्य सचिव आमिर सुबहानी को कहा कि वे खुद ऐसे मामलों को देखें. यानि तेजस्वी यादव के विभाग की निगरानी भी अब मुख्य सचिव करेंगे.
क्या है मामला
मामला तेजस्वी यादव के अधीन आने वाले स्वास्थ्य विभाग का है. एक महीने से ज्यादा हुए जब तेजस्वी यादव ने बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह ठीक कर लेने का एलान किया था. तेजस्वी यादव ने कहा था कि वे 60 दिनों के अंदर सरकारी चिकित्सा व्यवस्था को सुधार देंगे. उप मुख्यमंत्री ने विभाग के डॉक्टर से लेकर अधिकारियों-कर्मचारियों को चेतावनी भी दी थी कि जो नहीं सुधरेंगे उन्हें ठीक कर दिया जायेगा. लेकिन सोमवार को नीतीश के सामने तेजस्वी यादव के दावों की पोल खुली.
सोमवार को नीतीश कुमार ने जनता दरबार लगाया था. इसमें मधेपुरा से आई एक शिकायत सुनने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैरान हो गए. महिला ने शिकायत की- मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल में सप्ताह में सिर्फ एक दिन के लिए डाक्टर आते हैं. एक दिन आने वाले डॉक्टर भी हाजिरी बनाते हैं और निकल जाते हैं. महिला ने कहा कि उसके जैसे मरीज लंबे समय तक लाइन में लग कर डॉक्टर से इलाज का इंतजार करते हैं. लेकिन डॉक्टर निकल जाते हैं. वे कहते हैं कि ओपीडी का टाइम खत्म हो गया इसलिए अब इलाज नहीं करेंगे. महिला ने कहा कि मधेपुरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों का यही रूटीन है.
सीएम ने कहा-ऐसे कैसे चलेगा, मुख्य सचिव देखें मामला
महिला की शिकायत सुनने के बाद सीएम हैरान हो गये. उन्होंने तत्काल बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी को तलब किया. साथ में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत भी आये. सीएम ने मुख्य सचिव से पूछा- ऐसे कैसे चलेगा? जिस डाक्टर की जहां पोस्टिंग है वहां तो उन्हें रहना ही पड़ेगा. नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्य सचिव को को व्यक्तिगत स्तर से ऐसे मामलों को देखने के लिए कहा. सीएम ने कहा -अस्पताल ऐसे नहीं चल सकते. अगर डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों को नौकरी करनी है तो उन्हें भी अस्पताल में अनुशासन बनाए रखना चाहिए.
मुख्य सचिव ने कहा-कड़ाई करेंगे
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव से कहा कि ऐसे कैसे होगा भाई. हम हर जिले में मेडिकल कालेज खोल रहे और डाक्टर वहां पहुंचे ही नहीं. इसका क्या मतलब है? वैसे स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि डॉक्टरों के लिए बायोमेट्रकि हाजिरी की व्यवस्था कर दी गयी है. लेकिन नीतीश कुमार नाराज ही दिखे. इसके बाद मुख्य सचिव ने कहा कि कड़ाई करते हैं.
स्वास्थ्य विभाग की कई और शिकायतें
मुख्यमंत्री के जनता दरबार में स्वास्थ्य विभाग की कई और शिकायतें पहुंची. एक शिकायतकर्ता ने कहा कि अस्पतालों में दवा नहीं दी जा रही है. समस्तीपुर से पहुंचे एक व्यक्ति ने शिकायत की सरकार के निर्देश पर जिन दवाओं को सरकारी अस्पतालों से मिलना है वे नहीं मिल रहीं है. मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को इस मामले को तुरंत देखने को कहा.
तेजस्वी के दावों की हकीकत
बता दें कि बिहार के स्वास्थ्य विभाग का कार्यभार डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के ही जिम्मे है. एक महीने से ज्यादा हुए जब तेजस्वी यादव ने पूरे बिहार के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक की थी. उन्होंने कहा था कि सरकारी अस्पतालों में सुनवाई, कार्रवाई, दवाई जैसे तमाम इंतजाम होने चाहिये. लेकिन सीएम के जनता दरबार में ही हकीकत सामने आया. बाकी सुविधाओं की बात तो दूर रही, डॉक्टर मरीज को देखने तक को तैयार नहीं हैं.