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14-Dec-2023 07:52 AM
By First Bihar
DESK : देश में लोकसभा चुनाव को लेकर अब महज 6 से 7 महीने बचे हुए हैं। ऐसे में देश की तमाम राजनीतिक पार्टी अपनी चुनावी रणनीति को अब अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। ऐसे में पिछले 15 सालों से बिहार की सत्ता में काबिज जदयू एक बार फिर से वापसी को लेकर नई तरकीब अपना रही है। ऐसे में जदयू इस बार अपनी पुरानी रणनीति में थोड़ी बदलाव करती हुई नजर आ रही है। इसका प्रमाण हाल ही हुए नीतीश कुमार के कार्यक्रम के जरिए देखने को मिला है।
दरअसल, लोकसभा चुनाव से पहले सीएम नीतीश कुमार ने बड़ा दांव खेला है और सियासी मैदान नें राम के बदले सीता को लेकर आए हैं। एक तरफ पीएम मोदी अगले साल जनवरी में राम मंदिर का उद्घाटन करेंगे। तो वहीं उससे पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीतामढ़ी में जानकी मंदिर का शिलान्यास कर भाजपा को सकते में डाल दिया है। और अब आगामी लोकसभा चुनाव में श्रीराम को मां सीता से चुनौती मिलने वाली है।
मालूम हो कि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीतामढ़ी के पुनौराधाम मंदिर (मां जानकी जन्मभूमि) परिसर के विकास कार्यों का शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुनौराधाम परिसर एवं सीताकुंड का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने पुनौराधाम मंदिर के विकास कार्यों को जल्द से जल्द पूरा कराने का अधिकारियों को निर्देश दिया। कहा कि मंदिर प्रांगण में स्थित सीताकुंड को ठीक ढंग से विकसित करें। उसका सौंदर्यीकरण बेहतर तरीके से कराएं। विकास कार्य पूर्ण होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिलेगी। यहां आकर उन्हें प्रसन्नता की अनुभूति होगी। पुनौराधाम मंदिर में सीता वाटिका और लव-कुश वाटिका का भी निर्माण होगा।
वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज मां जानकी मंदिर की नींव रखे, इसके साथ ही राजनीति का दूसरा अध्याय भी शुरू हो गया। जहां एक तरफ भाजपा श्री राम मंदिर को लेकर अपनी सियासत मजबूत करेंगी, तो नीतीश कुमार मां सीता के मंदिर के निर्माण का पूरा श्रेय लेने की कोशिश करेंगे। हालांकि इससे पहले भारत सरकार ने अयोध्या और सीतामढ़ी को जोड़ने के लिए रामायण सर्किट की व्यवस्था की है। श्री राम जहां-जहां गए हैं, उस रूट को जोड़ कर रामायण सर्किट बनाया जा रहा है।
आपको बताते चलें कि, राजनीत के चाणक्य कहे जाने वाले नीतीश कुमार ने भाजपा की मुहिम का हिस्सा बन चुके राम मंदिर का जवाब ढूंढते यह कह डाला कि मेरे पास तो मां सीता की शक्ति है। इतना भर ही नहीं, नीतीश कुमार ने देरी किए बगैर राम मंदिर के उद्घाटन के पहले ही जानकी मंदिर का शिलान्यास कर राजनीति को एक अलग और नया मोड़ दे डाला है। साथ ही इस अवसर पर पूरे देश को मां सीता की भव्य मंदिर के रूप में सौगात देने का न केवल वादा किया बल्कि सीता मंदिर के निर्माण का शिलान्यास भी कर डाला।
नीतीश कुमार का जानकी मंदिर निर्माण पीएम मोदी के राम मंदिर के बरक्स जानकी मंदिर धर्म के आवरण में एक राजनीतिक जवाब है। इस जवाब में संदेश यह छुपा है कि हिंदुत्व की ठेकेदारी केवल भाजपा के पास नहीं है। यही सेकुलर चरित्र रखने वाले नीतीश कुमार की अपनी पहचान भी है। इसलिए नीतीश कुमार ने आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जानकी मंदिर की नींव डाल दी है।