बिहार के बदलते-बदलते खुद बदल गये नीतीश कुमार, तेज प्रताप यादव का बड़ा बयान खुले में मीट बेचने वालों पर नगर निगम ने कसा शिकंजा, अब बिना लाइसेंस के नहीं खुलेंगी दुकानें पेशी के दौरान हाजीपुर कोर्ट से भागने की कोशिश, अपहरण के आरोपी को पुलिस ने दोबारा पकड़ा नीतीश को डिजिटल अरेस्ट किया गया: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी पर बोला हमला, कहा..अब चंद्रबाबू नायडू की बारी Bihar Crime News: सात सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा, 11 साल पुराने मर्डर केस में कोर्ट ने सुनाया फैसला Bihar Crime News: सात सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा, 11 साल पुराने मर्डर केस में कोर्ट ने सुनाया फैसला ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती ने UPSC रिजल्ट को लेकर किया था झूठा दावा? संघ लोक सेवा आयोग का आया जवाब, जानिए.. ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती ने UPSC रिजल्ट को लेकर किया था झूठा दावा? संघ लोक सेवा आयोग का आया जवाब, जानिए.. रेलवे का बड़ा बदलाव: अब प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए QR टिकट जरूरी, जानिए कैसे बुक होगा नया टिकट ‘सातवीं बार शादी करने के लिए तैयार हैं पापा, उन्हें रोक लो...’ मदद के लिए थाने पहुंचा नाबालिग बेटा
21-Oct-2023 06:28 AM
By First Bihar
PATNA : नवरात्रि के सातवें दिन को महासप्तमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन देवी दुर्गा की 7वीं शक्ति देवी कालरात्रि की उपासना की जाती है। पौराणिक मान्यता है कि मां कालरात्रि असुरी शक्तियों का विनाश करने वाली देवी मानी जाती है। मां काली की तरह ही देवी कालरात्रि ने दुष्टों और राक्षसों के दमन के लिए ही यह संहारक अवतार लिया था।
मां कालरात्रि का स्वरूप विकराल है और मां का रंग उनके नाम की तरह की घने अंधकार सा बिल्कुल काला है। ये त्रिनेत्रधारी हैं और इनके बाल खुले हुए हैं। मां कालरात्रि के गले में कड़कती बिजली की अद्भुत माला है। इनका हथियार खड्ग और कांटा है। ये गधे की सवारी करती है। मां कालरात्रि को शुभंकरी भी कहा जाता है।
ऐसे में जो भी लोग जो लोग शनि की महादशा से पीड़ित हैं उन्हें 21 अक्टूबर 2023 को मां कालरात्रि की उपासना करनी चाहिए। इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव में कमी आती है। मां की पूजा के लिए आज सुबह का मुहूर्त - सुबह 06.25 - सुबह 07.50 है, जबकि रात्रि का मुहूर्त - 21 अक्टूबर 2023, 11.41 - 22 अक्टूबर 2023, 12.31 है।
मां कालरात्रि मंत्र के पूजन के लिए इन मन्त्रों का जप करना चाहिए -ॐ कालरात्र्यै नम: ।। क्लीं ऐं श्रीं कालिकायै नम: ।। एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा। वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥ 'ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ।''ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम: ।।