ब्रेकिंग न्यूज़

Budget 2026: ‘देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगा’, बजट 2026 पर बोलीं सीएम ममता बनर्जी Budget 2026: ‘देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगा’, बजट 2026 पर बोलीं सीएम ममता बनर्जी Budget 2026: बजट 2026 में ऐसा कौन सा ऐलान हुआ कि शेयर बाजार में मच गया हाहाकार, एक झटके में 8 लाख करोड़ स्वाहा! Budget 2026: बजट 2026 में ऐसा कौन सा ऐलान हुआ कि शेयर बाजार में मच गया हाहाकार, एक झटके में 8 लाख करोड़ स्वाहा! Bihar News : “तोर मजनुआ रंगदार के थाना दिवाना बा...", आर्केस्ट्रा गर्ल्स के साथ पिस्टल लेकर डांस करते हुए वीडियो वायरल, फायरिंग के बाद दशहत बिहार में सेहत से खिलवाड़: ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली सामान बेचने वाले बड़े सिंडिकेट का खुलासा, लोगों में हड़कंप केंद्रीय बजट 2026-27 : विकसित भारत के संकल्प को मजबूती देते हुए जन आकांक्षाओं की पूर्ति का ब्लूप्रिंट है यह बजट- नीतीश मिश्रा Road Accident : बिहार में सड़क हादसों पर लगेगा ब्रेक, ब्लैक स्पॉट खत्म करने के लिए सरकार ने तैयार किया एक्शन प्लान बिहार के वकील ने जिंदा दारोगा का गयाजी में क्यों किया पिंडदान? जानिए.. झूठ-फरेब और ‘भिष्म प्रतिज्ञा’ की दिलचस्प कहानी बिहार में साइबर क्राइम के दो बड़े मामले: शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 27 लाख की ठगी, तो बिजली विभाग का अधिकारी बनकर 4 लाख वसूले

लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश ने बढ़ाई मोदी की टेंशन ! 75 % आरक्षण पर केंद्र के पाले में डाली गेंद; जानिए क्या है पूरा मामला

लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश ने बढ़ाई मोदी की टेंशन ! 75 % आरक्षण पर केंद्र के पाले में डाली गेंद; जानिए क्या है पूरा मामला

22-Nov-2023 02:45 PM

By First Bihar

PATNA : नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बिहार कैबिनेट ने 75 फीसदी आरक्षण वाले कानून को संविधान की 9वीं अनुसूची में डालने के लिए केंद्र सराकर से मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया है। नीतीश कुमार की कैबिनेट ने बिहार में लागू हुआ 75 फीसदी आरक्षण फॉर्मूले को कहीं अदालत में चुनौती न दी जाए, इसके लिए बड़ी तैयारी कर ली है। बिहार सरकार ने गेंद केंद्र के पाले में डाल दी है।


दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में आरक्षण के नए प्रावधानों को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। राज्य कैबिनेट ने केंद्र से इसे संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग की है। इसका मतलब साफ़ है की नीतीश कुमार की सरकार इसको लेकर किसी भी तरह के कोई क़ानूनी पचड़ा में नहीं फंसना चाहते हैं। 


मालूम हो कि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को राज्य कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई। इसमें कुल 38 एजेंडों पर मुहर लगाई गई। नीतीश कैबिनेट ने बिहार में जातिगत आरक्षण के बढ़े हुए दायरे को 9वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया है। इसका कारण यह है कि अगर अदालत में नए आरक्षण कानून को चुनौती दी जाए, तो नीतीश सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।


जानकारी हो कि सुप्रीम कोर्ट से पूर्व में जातिगत आरक्षण की लिमिट 50 फीसदी तक ही सीमित रखने के आदेश हैं। हालांकि कुछ राज्यों में इस लिमिट से ऊपर आरक्षण देने की कोशिश की गई, लेकिन मामला कोर्ट में जाने के बाद उनको अपने फैसलों को वापस लेना पड़ा। ऐसे में अब यह समस्या बिहार पर भी मंडरा रहा है। 


आपको बताते चलें कि, भारतीय संविधान की 9वीं अनुसूची कई मायने में खास है। इसमें जो कानून शामिल होते हैं, उनकी न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती है। यानी कि 9वीं अनुसूची में शामिल कानूनों पर कोर्ट से रिव्यू नहीं हो सकता है। इस अनुसूची में अभी केंद्र और राज्यों के 284 कानून शामिल हैं। इन कानूनों की अदालत से तभी संभव है जब इससे मौलिक अधिकारों या संविधान की मूल रचना का उल्लंघन होता हो। तमिलनाडु इकलौता राज्य है जहां 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण को कोर्ट से चुनौती नहीं मिल पाई है, क्योंकि उसे नौंवी अनुसूची में डाला गया था।