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20-Jun-2021 01:57 PM
DELHI : लोक जनशक्ति पार्टी में चल रहे सियासी उठापटक के बीच एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान आज राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हो रहे हैं. दिल्ली में 12 जनपथ के आवास पर चिराग पासवान की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यकारिणी इस वक्त जारी है. बैठक में चिराग पासवान का दावा पहले से और ज्यादा मजबूत दिखा है. राष्ट्रीय कार्यकारिणी के 75 में से 50 सदस्य चिराग पासवान के साथ हैं. ये दावा चिराग पासवान की तरफ से किया गया है.
12 जनपथ आवास पर चिराग पासवान की इस बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के ज्यादातर सदस्य सशरीर शामिल हुए हैं. एक तरफ पशुपति कुमार पारस ने अपने खेमे की बैठक 17 जून को पटना में आयोजित करते हुए खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर निर्वाचित कराया. तो वहीं दूसरी तरफ अब चिराग पासवान अपने खेमे बंदी में जुटे हुए हैं. चिराग पासवान के साथ इस बैठक में पार्टी के प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केके बाजपेई भी मौजूद हैं.
इस बैठक में लोक जनशक्ति पार्टी के अन्य बड़े नेता इस बैठक में शामिल हैं. कार्यकारिणी की बैठक में भविष्य को लेकर पार्टी की रणनीति तय की जा रही है. पशुपति पारस ने जिस तरह एलजेपी में टूट को अंजाम दिया उसके बाद चिराग पासवान अब आगे की रणनीति बना रहे हैं. चिराग पासवान आज अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भविष्य के कार्यक्रम तय करेंगे. बिहार आने का उनका शेड्यूल तय होगा. चिराग पासवान के नजदीकी सूत्रों की मानें तो आगे आने वाले दिनों में वह बिहार में एक राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी करेंगे. लेकिन दूसरी तरफ पशुपति पारस ने शनिवार को ताबड़तोड़ अपनी नई कार्यकारिणी का एलान किया.
नई कार्यकारिणी का एलान सबसे पहले शनिवार की दोपहर किया गया लेकिन शाम होते-होते इसमें 6 नाम और जोड़ दिए गए. दोनों खेमों की तरफ से अपने-अपने दावे को मजबूत करने का प्रयास जारी है. चिराग पासवान के लिए राहत की बात यह है कि चुनाव आयोग में पारस गुट की तरफ से जो दावा किया गया है, उसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पटना में हुई बैठक में शामिल होने वाले नेताओं की लिस्ट शामिल नहीं है जबकि चिराग पासवान के साथ वह सूची मौजूद है जो राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं और उनकी बैठकों में शामिल हो रहे हैं.
इसके पहले चिराग पासवान ने शनिवार की देर शाम लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की. ओम बिरला को उन्होंने एलजेपी की तरफ से एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें यह दावा किया गया कि पारस समेत पांच सांसदों को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है. ऐसे में एलजेपी संसदीय दल के नेता पद पर पारस का चयन सही नहीं है. लोकसभा अध्यक्ष से चिराग पासवान ने अपने फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया. उधर इस मामले पर लोकसभा अध्यक्ष पहले ही कह चुके हैं कि उनका फैसला बिल्कुल सही है.
ओम बिरला ने कहा कि पशुपति पारस को बीजेपी संसदीय दल के नेता के तौर पर मान्यता नियमों के तहत दी गई है. यह मामला एलजेपी में डिफेक्शन का नहीं है बल्कि संसदीय दल के नेता के चयन का है.