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07-Jul-2021 12:51 PM
PATNA : बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और विधान पार्षद नीरज कुमार ने सोमवार को ऐलान किया था कि 25 दिनों तक लगातार लालूवाद से जुड़े सवाल पूछेंगे. मंगलवार को उन्होंने पहला सवाल पशु और पशुपालकों के संबंध में पूछा था और आज उन्होंने स्वयं सहायता समूह योजना से जुड़ा पूछा है.
नीरज कुमार ने सवाल किया है कि स्वयं सहायता समूह योजना में समाज के वंचित वर्ग के प्रति लालूवाद का दूराग्रह का प्रकटीकरण क्यों नहीं है ? उन्होंने आंकड़ों के जरिये स्वयं सहायता समूह योजना आयोग की रिपोर्ट 2008 बिहार में कुल स्वयं सहायता समूह के सदस्य में से अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति/ अत्यंत पिछड़ा वर्ग/ मुस्लिम समाज के 95.34 प्रतिशत सदस्य थे जिनमें 91.76 प्रतिशत ने उच्च विद्यालय का चेहरा नहीं देखा था और 83.33 प्रतिशत भूमिहीन थे. तो फिर 1990 के दशक के आखिरी वर्षों में केंद्र सरकार ने स्वयं सहायता समूह के स्थापना को बढ़ावा देने के लिए चुनिन्दा राज्यों में बिहार को भी चुना था, लेकिन स्वयं सहायता समूह जिसमें अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति/ अत्यंत पिछड़ा वर्ग/ मुस्लिम समाज के अधिकतम गरीब थे तो लालूवाद की विचारधारा के तहत पूरे बिहार में मात्र 16246 स्वयं सहायता समूह जो देश का मात्र 1.51 प्रतिशत था.
जबकि नीतीश कुमार के शासनकाल में बिहार में 10 लाख 28 हजार 463 स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं जो पूरे देश के स्वयं सहायता समूह का 14 प्रतिशत हिस्सा है जिसमें 1 करोड़ 27 लाख 12 हजार 140 परिवार जुड़े हुए हैं. स्वयं सहायता समूह के आंकड़े इस बात को प्रमाणित करते है कि समाज के वंचित वर्ग के प्रति लालूवाद राजनीति के नवसामंतवाद के प्रतिक हैं. जबकि नीतीश कुमार के न्याय के साथ विकास में समाज के वंचित वर्ग के आर्थिक एवं सामाजिक स्वावलंबन के प्रति जागरूक हैं.
नीरज कुमार ने कहा कि हालत यह थे कि स्वयं सहायता समूह के प्रशिक्षण के लिए जो राशि आवंटित होती थी वह भी भ्रष्टाचार की बलिवेदी पर चढ़ जाता था, ग्राम पंचायत का हस्तक्षेप होता था. अधिनस्थ अधिकारी और कर्मचारी के प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं थी. नीतीश कुमार के शासनकाल में 2007-2008 के आते-आते स्वयं सहायता समूह के सदस्य के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई जिसके चलते बिहार गुजरात, छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों से आगे निकल गया.
2007-2008 योजना आयोग की रिपोर्ट ने माना है कि पिछले एक साल में बिहार सरकार ने स्वयं सहायता समूह के विकास के लिए बड़े पैमाने पर अन्य राज्यों से 3 से 4 गुना अधिक आधारभूत संरचना में निवेश किया था. बिहार एक मात्र राज्य था जिसने प्राइमरी सेक्टर के साथ सर्विस सेक्टर के लिए धन आवंटित किया.
उन्होंने कहा कि इससे यह प्रमाणित होता है कि जमीनी स्तर पर स्वयं सहायता समूह का लालूवाद के तहत तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा मौका मिलने के बावजूद समाज के अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति/ अत्यंत पिछड़ा वर्ग/ मुस्लिम समाज के लोगों के जुड़े रहने के कारण विस्तार नहीं किया जिससे समाज के वंचित वर्ग उन्नति कर सके. जबकि नीतीश कुमार ने अपने शासनकाल में देश में स्वयं सहायता समूह के मामले में अव्वल स्थान प्राप्त कर प्रमाणित किया कि बगैर तनाव फैलाए वंचित वर्ग को ताकत दी जा सकती है.