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13-Jun-2020 05:16 PM
DESK : कोरोना को लेकर वैज्ञानिकों की टीम लगातार शोध कर रही है. COVID-19 से जुड़े हर पहलू पर उन लोगों ने अपनी पैनी नज़र रखी है, ताकि इससे जुड़ी नयी बात उजागर हो. जिसका फायदा वैक्सीन बनाने में मिल सके. इसी तरह के एक स्टडी के दौरान ये बात सामने निकल कर आई है कि कुछ प्रकार के कॉमन कोल्ड से पैदा हुई इम्यूनिटी आपको कोविड-19 से बचा सकती है.
सिंगापुर के ड्यूक-एनयूएस मेडिकल स्कूल में इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर एन्टोनियो बर्टोलेट्टी और उनके साथी ने ये स्टडी की है. इस स्टडी में बताया गया है कि कोरोना से लड़ने में किस तरह T-Cells प्रभावी भूमिका निभा सकता है.
ब्रिटिश अखबार डेली मेल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ प्रकार के कॉमन कोल्ड से पैदा हुई इम्यूनिटी आपको 17 सालों तक कोरोना से बचाने में कारगर साबित हो सकती है. हालांकि, फिलहाल इस स्टडी को आखिरी निष्कर्ष नहीं माना जा सकता क्योंकि अबतक इस पर किसी अन्य देश के स्वास्थ्य अधिकारियों की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. रिसर्च में लगे वैज्ञानिकों का कहना है कि जो लोग पहले बीटा कोरोना वायरस की वजह से कॉमन कोल्ड के शिकार हुए हैं, उनके पास कोविड-19 के खिलाफ इम्यूनिटी हो सकती है या फिर वे कोविड-19 से मामूली रूप से ही पीड़ित होंगे.
स्टडी में ये बात सामने आई की OC43 और HKU1 नाम के Betacoronaviruses से कॉमन कोल्ड होने पर बुजुर्ग और युवाओं की छाती में गंभीर संक्रमण पैदा होता है. लेकिन इस वायरस के कई जेनेटिक फीचर कोविड-19, मर्स और सार्स से मिलते हैं. कॉमन कोल्ड के ऐसे मामलों की संख्या काफी है जो कोरोना फैमिली के वायरस की वजह से होते हैं. हालांकि, अब तक इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि बीटा कोरोना वायरस से कितने कोल्ड के मामले होते हैं.
वैज्ञानिकों की माने तो अगर व्यक्ति मिलते-जुलते जेनेटिक वाले वायरस से पहले भी संक्रमित हो चुका है तो उसके शरीर में मौजूद मेमोरी टी-सेल्स की वजह से सालों बाद भी वह कोरोना के वायरस से इम्यून हो सकता है. हालांकि, इस स्टडी को निष्कर्ष तक लेन के लिए अभी और ट्रायल की जरूरत है.
फ़िलहाल, इस स्टडी के लिए कोरोना से ठीक हो चुके 24 मरीज, सार्स से बीमार होने वाले 23 मरीज और 18 ऐसे मरीज के ब्लड सैंपल लिए गए थे, जो न तो कोविड-19 और न ही सार्स से संक्रमित हुए. जब इनकी जांच हुई तो पता चला की कोविड-19 या सार्स से संक्रमित नहीं होने वाले आधे लोगों में इम्यून रेस्पॉन्स पैदा करने वाले टी सेल्स पहले से मौजूद थे. बरहाल, कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि 2003 में सार्स के शिकार होने वाले लोगों में कोविड-19 में पाए जाने वाले प्रोटीन को लेकर इम्यून रेस्पॉन्स देखा गया है. साथ ही इस बात के भी संकेत मिले हैं कि कोविड-19 के मरीजों में लंबे वक्त के लिए टी-सेल्स इम्यूनिटी डेवलप हो सकती है.