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10-Feb-2024 08:37 AM
By First Bihar
PATNA: राज्यभर के नियोजित शिक्षकों ने सक्षमता परीक्षा का विरोध करने का ऐलान किया है। आगामी 16 फरवरी को हजारों की संख्या में शिक्षक पटना की सड़कों पर उतरेंगे। आंदोलन पर उतरने वाले शिक्षकों को शिक्षा विभाग के एससीएस केके पाठक ने पिछले दिनों हिदायत दी थी कि उन्होंने अगर किसी तरह के धरना प्रदर्शन या आंदोलन में भाग लिया तो उनकी खैर नहीं है हालांकि, केके पाठक की चेतावनी को कोई खास असर शिक्षकों पर होता नहीं दिख रहा है।
दरअसल, पटना स्थित बिहार राज्य शिक्षक संघ भवन भवन में शुक्रवार को तमाम शिक्षक संगठनों की बैठक हुई। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजनंदन शर्मा ने कहा है कि लोकतंत्र में शिक्षकों में सबसे अधिक लोकतांत्रिक व्यवस्था होनी जरूरी है लेकिन सरकार शिक्षकों के साथ अलोकतांत्रिक व्यवहार कर रही है। सरकार के तानाशाही फैसलों के खिलाफ अब सभी शिक्षक एकजुट होकर प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा कि 1968 में उन लोगों ने लड़ाई लड़ी थी और कोठारी कमीशन आया था। उस समय सभी शिक्षकों को सरकारी किया गया था और सरकारी वेतनमान तय किया गया था। साल 2006 से ही वह लोग नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार बार-बार शिक्षकों के लिए छोटी-मोटी घोषणा करके इसे टालती रही है। मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों पर सरकार के अधिकारी कार्रवाई की बात कहते हैं। उन्हें जो करना है कर लें लेकिन सरकार के कानों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए शिक्षक आंदेलन पर जरूर उतरेंगे।
PATNA: राज्यभर के नियोजित शिक्षकों ने सक्षमता परीक्षा का विरोध करने का ऐलान किया है। आगामी 16 फरवरी को हजारों की संख्या में शिक्षक पटना की सड़कों पर उतरेंगे। आंदोलन पर उतरने वाले शिक्षकों को शिक्षा विभाग के एससीएस केके पाठक ने पिछले दिनों हिदायत दी थी कि उन्होंने अगर किसी तरह के धरना प्रदर्शन या आंदोलन में भाग लिया तो उनकी खैर नहीं है हालांकि, केके पाठक की चेतावनी को कोई खास असर शिक्षकों पर होता नहीं दिख रहा है।
दरअसल, पटना स्थित बिहार राज्य शिक्षक संघ भवन भवन में शुक्रवार को तमाम शिक्षक संगठनों की बैठक हुई। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजनंदन शर्मा ने कहा है कि लोकतंत्र में शिक्षकों में सबसे अधिक लोकतांत्रिक व्यवस्था होनी जरूरी है लेकिन सरकार शिक्षकों के साथ अलोकतांत्रिक व्यवहार कर रही है। सरकार के तानाशाही फैसलों के खिलाफ अब सभी शिक्षक एकजुट होकर प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा कि 1968 में उन लोगों ने लड़ाई लड़ी थी और कोठारी कमीशन आया था। उस समय सभी शिक्षकों को सरकारी किया गया था और सरकारी वेतनमान तय किया गया था। साल 2006 से ही वह लोग नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार बार-बार शिक्षकों के लिए छोटी-मोटी घोषणा करके इसे टालती रही है। मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों पर सरकार के अधिकारी कार्रवाई की बात कहते हैं। उन्हें जो करना है कर लें लेकिन सरकार के कानों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए शिक्षक आंदेलन पर जरूर उतरेंगे।