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08-Feb-2022 07:14 PM
DESK: दिल्ली में मंगलवार को झारखंड कांग्रेस के नेताओं के साथ पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने बैठक की। इस बैठक में पार्टी के सभी विधायक, मंत्री, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, राज्यसभा सांसद धीरज साहू, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय सहित पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी और पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
झारखंड कांग्रेस के प्रभारी रहे आरपीएन सिंह के बीजेपी में शामिल होने के बाद राहुल गांधी के साथ झारखंड कांग्रेस के नेताओं की पहली बैठक थी। इस बैठक में प्रदेश में कांग्रेस की कमजोर हो रही जड़ों को मजबूत करने पर चर्चा की गई। भोजपुरी,मगही, अंगिका भाषा को लेकर हो रहे विवाद पर विशेष तौर पर चर्चा की गई। भाषा को लेकर हो रहे विवाद से कांग्रेस को राज्य में हो रहे नुकसान के बारे में राहुल गांधी को अवगत कराया गया।
पूर्व प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह को झारखंड में कमजोर करने को लेकर लगाये जा रहे आरोपों पर भी चर्चा की गई। जामताड़ा से कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने आरपीएन पर पैसे लेकर टिकट देने का आरोप लगाया था। आरपीएन के जाने के बाद पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
झारखंड में कांग्रेस के अंदर चल रही गुटबाजी पर भी मंथन किया गया। नये कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे को प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने और पुराने नेताओं को फिर से पार्टी से जोड़ने का टास्क दिया गया। हालांकि अविनाश पांडेय ने अपने पहले झारखंड दौरे पर कांग्रेस के दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष की पार्टी में घर वापसी कराई।
सुखदेव भगत और प्रदीप बालमुचू की कांग्रेस में वापसी कराकर एक संदेश देने की कोशिश की गई थी। हालांकि सुखदेव भगत और मंत्री रामेश्वर उरांव के बीच टकराव को कम करना पार्टी के लिए चुनौती है। साथ ही प्रदेश के कई विधायक है जिनके अंदर मंत्री बनने की महत्वाकांक्षा किसी से छुपी नहीं है, खासकर इरफान अंसारी अपनी ख्वाहिश अक्सर मीडिया के सामने जाहिर करते रहते है।
झारखंड के वर्तमान कैबिनेट में कांग्रेस कोटे से एक मंत्री का पद रिक्त है जिसको लेकर कई विधायक अपनी दावेदारी जताते रहते है। राहुल गांधी के लिए ऐसे महत्वाकांक्षी नेताओं को नियंत्रित करने और हेमंत सरकार से बेहतर तालमेल के साथ सरकार चलाने की एक बड़ी चुनौती है।
वही झारखंड कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय का बड़ा बयान आया है। कांग्रेस कोटे के सभी मंत्रियों के काम की समीक्षा होगी। 17, 18 और 19 फरवरी को झारखंड में चिंतन बैठक होगी। जिनका काम सही नहीं होगा उन्हें बदला जाएगा।
DESK: दिल्ली में मंगलवार को झारखंड कांग्रेस के नेताओं के साथ पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने बैठक की। इस बैठक में पार्टी के सभी विधायक, मंत्री, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, राज्यसभा सांसद धीरज साहू, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय सहित पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी और पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
झारखंड कांग्रेस के प्रभारी रहे आरपीएन सिंह के बीजेपी में शामिल होने के बाद राहुल गांधी के साथ झारखंड कांग्रेस के नेताओं की पहली बैठक थी। इस बैठक में प्रदेश में कांग्रेस की कमजोर हो रही जड़ों को मजबूत करने पर चर्चा की गई। भोजपुरी,मगही, अंगिका भाषा को लेकर हो रहे विवाद पर विशेष तौर पर चर्चा की गई। भाषा को लेकर हो रहे विवाद से कांग्रेस को राज्य में हो रहे नुकसान के बारे में राहुल गांधी को अवगत कराया गया।
पूर्व प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह को झारखंड में कमजोर करने को लेकर लगाये जा रहे आरोपों पर भी चर्चा की गई। जामताड़ा से कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने आरपीएन पर पैसे लेकर टिकट देने का आरोप लगाया था। आरपीएन के जाने के बाद पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
झारखंड में कांग्रेस के अंदर चल रही गुटबाजी पर भी मंथन किया गया। नये कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे को प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने और पुराने नेताओं को फिर से पार्टी से जोड़ने का टास्क दिया गया। हालांकि अविनाश पांडेय ने अपने पहले झारखंड दौरे पर कांग्रेस के दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष की पार्टी में घर वापसी कराई।
सुखदेव भगत और प्रदीप बालमुचू की कांग्रेस में वापसी कराकर एक संदेश देने की कोशिश की गई थी। हालांकि सुखदेव भगत और मंत्री रामेश्वर उरांव के बीच टकराव को कम करना पार्टी के लिए चुनौती है। साथ ही प्रदेश के कई विधायक है जिनके अंदर मंत्री बनने की महत्वाकांक्षा किसी से छुपी नहीं है, खासकर इरफान अंसारी अपनी ख्वाहिश अक्सर मीडिया के सामने जाहिर करते रहते है।
झारखंड के वर्तमान कैबिनेट में कांग्रेस कोटे से एक मंत्री का पद रिक्त है जिसको लेकर कई विधायक अपनी दावेदारी जताते रहते है। राहुल गांधी के लिए ऐसे महत्वाकांक्षी नेताओं को नियंत्रित करने और हेमंत सरकार से बेहतर तालमेल के साथ सरकार चलाने की एक बड़ी चुनौती है।
वही झारखंड कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय का बड़ा बयान आया है। कांग्रेस कोटे के सभी मंत्रियों के काम की समीक्षा होगी। 17, 18 और 19 फरवरी को झारखंड में चिंतन बैठक होगी। जिनका काम सही नहीं होगा उन्हें बदला जाएगा।