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29-Sep-2020 06:44 AM
PATNA : विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के बावजूद एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर भले ही अब तक आधिकारिक तौर पर कोई इलाज नहीं हो पाया हो लेकिन जनता दल यूनाइटेड अपने स्तर पर उम्मीदवारी को फाइनल करने में जुटा हुआ है। मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पहली बार उम्मीदवारी को लेकर दावेदारों के साथ वन टू वन मीटिंग करते नज़र आए हैं और अब उन्होंने पार्टी के कोर ग्रुप के नेताओं के साथ मैराथन बैठक की है। मुख्यमंत्री आवास पर सोमवार को देर शाम तक जेडीयू के कोर ग्रुप की नेताओं की बैठक हुई।
नीतीश कुमार के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की हुई बैठक में ना केवल सीटों बल्कि उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक में नीतीश कुमार के साथ ललन सिंह, आरसीपी सिंह समेत अन्य नेता भी मौजूद रहे। जेडीयू के अंदर खाने से आ रही बड़ी खबर के मुताबिक पार्टी इस बार कई सीटिंग विधायकों का पत्ता काटने जा रही है। नीतीश कुमार ने पिछले दिनों दावेदारों और विधानसभा स्तर के नेताओं के साथ वन टू वन मीटिंग में जो फीडबैक लिया है और स्थानीय स्तर पर कराए गए सर्वे को देखते हुए कई विधायकों का टिकट कट सकता है। जिन विधायकों का टिकट कटने की उम्मीद है उस में पहली बार 2015 में विधायक बनने वाले से लेकर पूर्व मंत्री तक के शामिल हैं। मौजूदा विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के लिए एक बड़ी चुनौती है ऐसे में वह स्थानीय नाराजगी को नजरअंदाज कर किसी विधायक को टिकट नहीं देना चाहते।
पिछले दिनों नीतीश कुमार ने जेडीयू कार्यालय में कई घंटों तक बैठकर दावेदारों से मुलाकात की है। इस दौरान जिन विधायकों को लेकर नाराजगी सामने आई है उनमें करहगर विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक वशिष्ट और महनार के विधायक उमेश कुशवाहा के अलावे शेरघाटी से चुनकर आने वाले विनोद सिंह के खिलाफ भी नीतीश कुमार को नाराजगी वाला फीडबैक मिला है। इन सभी विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर पार्टी की तरफ से कई दावेदार भी सामने आए हैं। साथ ही साथ इन विधानसभा क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं ने भी नेतृत्व को अपनी नाराजगी से अवगत कराया है ऐसे में यह माना जा रहा है कि कई सीटों पर जेडीयू अपने मौजूदा विधायकों का पत्ता साफ कर सकता है। जेडीयूनकोर ग्रुप के नेताओं की बैठक में यह बात भी सामने आई है कि बीजेपी से सीट एडजेस्टमेंट को लेकर कई मौजूदा विधायक के साथ-साथ नीतीश कैबिनेट में शामिल मंत्री तक की सीट सहयोगी दल को जा सकती है। राजपूत बिरादरी से आने वाले एक ऐसे ही मंत्री की सीट पर बीजेपी का दावा है और अब उन्हें या तो जेडीयू सीट बदलने को कह सकता है या फिर विधानसभा चुनाव के बजाय दूसरे विकल्प में डाल सकता है। इस सीट पर बीजेपी के एक कद्दावर नेता को 2015 में हार का सामना करना पड़ा था लेकिन बावजूद इसके बीजेपी इस सीट पर नजर गड़ाए बैठी है। सीट बंटवारे से लेकर उम्मीदवारी तक पर अभी कई तरह का पेंच है और इंतजार अधिकारिक एलान का है।