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30-Oct-2019 03:49 PM
DELHI : दूसरी बार जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि वह पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनना चाहते थे। नीतीश कुमार ने कहा है कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं थी लेकिन चुनाव आयोग में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्षों के बारे में सूचना देनी होती है इसलिए अध्यक्ष बनने की जिम्मेदारी लेनी पड़ी। दिल्ली में जेडीयू के राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अपनी ताजपोशी के बाद नीतीश कुमार ने यह बातें कहीं।
आरसीपी का दावा - खुशामद से माने नीतीश
राष्ट्रीय परिषद की बैठक में पार्टी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह ने सबसे पहले यह खुलासा किया कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे। आरसीपी सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को दोबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के लिए उनकी खुशामद करनी पड़ी। आरसीपी सिंह के संबोधन के बाद खुद नीतीश कुमार ने थोड़ी देर बाद इस बात की पुष्टि कर दी कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे लेकिन मजबूरन उन्हें ऐसा करना पड़ा। हालांकि नीतीश कुमार ने पहली बार जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी उठाई थी तब पूर्व अध्यक्ष शरद यादव का कार्यकाल भी पूरा नहीं हुआ था। एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में नीतीश कुमार को शरद यादव की जगह पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया था। बावजूद इसके नीतीश अब यह कह रहे हैं कि उनकी दिलचस्पी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने में नहीं थी।
अपनी नीतियों पर गठबंधन
राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नीतीश कुमार ने एक बार फिर से यह दावा किया कि उनकी पार्टी चाहे जिस भी गठबंधन में रहे वह नीतियों से समझौता नहीं करेगी। नीतीश कुमार ने कहा कि गठबंधन चाहे कोई भी हो जेडीयू अपने मेनिफेस्टो पर ही काम करेगा। नीतीश ने कहा कि वह सत्ता के लिए नीतियों से समझौता नहीं करने वाले। नीतीश कुमार ने गांधी के विचारों को याद करते हुए कहा कि गड़बड़ करना मानव का स्वभाव है लेकिन कुछ लोग का चरित्र और काम में नहीं खाता। राजस्व परिषद के सामने नीतीश ने दावा किया कि उन्होंने सबसे ज्यादा काम नारी उत्थान के लिए किया है। उन्होंने भरोसा जताया कि जेडीयू जल्द ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करेगा।
बीजेपी से गठबंधन पर नेताओं की सलाह
राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नीतीश कुमार को उनकी पार्टी के कई नेताओं ने अपने अंदाज में सलाह भी दी। जेडीयू के वरिष्ठ नेता पवन वर्मा ने कहा कि यह वक्त देश हित में कठोर निर्णय लेने का है। वहीं हाल ही में आरजेडी छोड़कर जेडीयू में आने वाले अली अशरफ फातमी ने कहा कि देश के अंदर बड़ी बेचैनी है और उसे नीतीश कुमार जैसे नेता ही दूर कर सकते हैं।