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बिना वैक्सीनेशन के ही मिल गया सर्टिफिकेट, छात्रा ने जब DM से शिकायत की तब टीका लगाने घर पहुंच गये स्वास्थ्यकर्मी

27-Jun-2021 04:26 PM

By SANT SAROJ

SUPAUL:  त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल अक्सर अपने कारनामों को लेकर चर्चा में रहा है। इस बार कर्मचारियों की लापरवाही के कारण यह सुर्खियों में हैं। दरअसल कोरोना की वैक्सीन लिए बगैर ही एक छात्रा को सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया।

18 वर्षीय छात्रा स्वीटी प्रिया ने वैक्सीन के लिए ONLINE  बुकिंग करायी थी। जिसके बाद शनिवार को करीब एक बजे का समय दिया गया था। त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल द्वारा मध्य विद्यालय लालपट्टी स्थित कोविड वैक्सिनेशन सेंटर में वैक्सीन लगाए जाने का मैसेज प्राप्त हुआ। जब छात्रा स्वीटी प्रिया टीका लगवाने के लिए निर्धारित समय पर मध्य विद्यालय लालपट्टी पहुंची तो वैक्सिनेशन सेंटर ही बंद मिला।


जिसके बाद जब छात्रा अपने परिजन के साथ त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचे और वैक्सीनेशन सेंटर बंद होने का कारण जाननी चाही तो अस्पताल में मौजूद किसी कर्मचारियों ने इसका उचित जवाब नहीं दिया। थक हार कर छात्रा ने इसकी जानकारी अस्पताल के उपाधीक्षक को देनी चाही लेकिन उन्होंने भी मोबाइल पर रिस्पॉंस नहीं दिया। तब तक बिना वैक्सीन लिए ही छात्रा को कोविड वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया।



वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद छात्रा इस बात को लेकर हैरान रह गयी कि बिना टीका लगाए ही कैसे प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। अस्पताल के उपाधीक्षक ने जब छात्रा के फोन को नहीं उठाया तब उसने इस बात की जानकारी जिलाधिकारी महेंद्र कुमार को दी। जिसके बाद अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक और कर्मचारियों की आंखें घुली और आनन-फानन में अस्पताल के कर्मी छात्रा के घर पर पहुंच गये और टीकाकरण के लिए मान मनौव्वल करने लगे।


स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा टीका लगवाने की अपील किए जाने के बाद छात्रा ने वैक्सीन लगवाने से इनकार कर दिया। अस्पताल की लापरवाही को लेकर छात्रा ने सवाल खड़े कर दिए। छात्रा ने दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग कर दी। छात्रा को वैक्सीन लगाने के लिए एएसडीएम प्रमोद कुमार, प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. वीरेंद्र दर्वे और यूनीसेफ कॉर्डिनेटर अनुपमा चौधरी छात्रा के घर पहुंचे। टीकाकरण के लिए छात्रा को समझाने की कोशिश की गयी। छात्रा के परिजनों से भी बातचीत की। लेकिन छात्रा ने टीका लगाने से मना कर दिया। जिसके बाद अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को बैरंग लौटना पड़ गया।