नरकटियागंज में संदिग्ध हालात में विवाहिता की मौत, मायके पक्ष ने लगाया दहेज हत्या का आरोप सिवान का कुख्यात अयूब खान मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार, ‘खान ब्रदर्स’ गिरोह पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, होटल पनाश पहुंचे तेजस्वी, भाई वीरेंद्र बोले...हमारे पास 41 नहीं 48 विधायक हैं 24 घंटे में काम पर लौटने वाले अधिकारियों पर नहीं होगी कार्रवाई: विजय कुमार सिन्हा इफ्तार में शामिल हुए मुकेश सहनी, रोजेदारों को दी रमजान की शुभकामनाएं Panorama Heights में भव्य Property Expo 2026, घर खरीदने पर 10% तक खास डिस्काउंट रसोई गैस लदे ट्रक ने स्कूटी सवार को रौंदा, मौके पर ही युवक की मौत, महिला की हालत गंभीर राज्यसभा चुनाव से पहले AIMIM की इफ्तार में शामिल होने पर जीवेश मिश्रा ने साधा निशाना, कहा..हम लोग बिहार को रफ्तार दे रहे हैं और तेजस्वी यादव इफ्तार में लगे हैं TRE-4 के नोटिफिकेशन में देरी से शिक्षक अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी, सरकार को दी महाआंदोलन की चेतावनी TRE-4 के नोटिफिकेशन में देरी से शिक्षक अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी, सरकार को दी महाआंदोलन की चेतावनी
13-Mar-2022 07:29 AM
PATNA : बिहार में अब जमीन खरीदना महंगा हो जायेगा। जल्द ही जमीन का एमवीआर यानी मिनिमम वैल्यू रेट जल्द बढ़ सकता है। ऐसे में जमीन रजिस्ट्री के लिए ज्यादा पैसा चुकाना होगा। पिछली बार वर्ष 2016 में यानी छह साल पहले एमवीआर बढ़ा था। अलग-अलग जिलों में इसकी दर 10 से 40 फीसदी तक बढ़ाई गई थी। अब एक बार फिर राज्य सरकार अप्रैल में एमवीआर बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
इसके लिए जिलों की राय ली जा रही है। राज्य सरकार का निबंधन विभाग इसके लिए होमवर्क में जुटा है। राज्य सरकार से हरी झंडी मिलते ही जिलों के स्तर पर एमवीआर बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उसके बाद बढ़ी हुई दरों के आधार पर लोगों को निबंधन शुल्क देना होगा।
अगर किसी सरकारी परियोजना के लिए किसी रैयत की जमीन अधिग्रहित की जाती है तो उस रैयत को मुआवजा के रूप में जमीन की कीमत एमवीआर के तहत ही दी जाएगी। इसके लिए संबंधित जिले के जिलधिकारी के गाइडलाइन को ध्यान में रखा जाता है।
क्या है एमवीआर
एमवीआर यानी मिनिमम वैल्यू रेट वह दर होती है जिसे सरकार किसी जमीन का न्यूनतम मूल्य मानती है। किसी खास इलाके में खास तरीके की जमीन की हो रही खरीद-बिक्री में जो औसत बाजार मूल्य पाया जाता है, उसी के आस-पास एमवीआर तय किया जाता है। संबंधित जिलों के जिलाधिकारी इसे अधिसूचित करते हैं।
अधिसूचित होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री में उस खास तरह की जमीन का सरकार वही मूल्य मानकर चलती है। जमीन विक्रेता या खरीदार को उसी आधार पर निबंधन शुल्क तय करना होता है। अगर कोई जमीन एमवीआर से कम कीमत में भी खरीदता है तो उसे निबंधन शुल्क एमवीआर के तहत ही देना होता है।