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21-Jun-2020 08:05 AM
PATNA : भारत और नेपाल के बीच का संबंध रोटी और बेटी का बताया जाता है। खासतौर पर बिहार से सटे नेपाल के इलाकों में एक दूसरे देश के अंदर खूब शादियां होती हैं लेकिन अब नेपाल से बिगड़ते रिश्तो का असर इन संबंधों पर भी पड़ने लगा है। नेपाल सरकार ने जो कदम उठाया है उसके बाद अगर किसी भारतीय महिला की शादी नेपाल में हुई तो उसे नागरिकता के लिए 7 सालों तक इंतजार करना होगा। नेपाल में भारतीय महिलाओं को शादी के तुरंत बाद नागरिकता मिल जाती थी लेकिन अब इसे रोकने के लिए नेपाल सरकार कड़े कानून ला रही है।
नेपाल सरकार के हालिया रुख ने भारत के साथ उसके राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों में पहले से ही खाई चौड़ी कर दी है और अब वैवाहिक और परिवारिक संबंधों को भी खत्म करने की तैयारी है। नेपाल सरकार के नए फैसले के बाद अगर किसी भारतीय महिला की शादी नेपाल में होती है तो उसे सभी प्रकार के नागरिक अधिकारों से 7 वर्षों तक वंचित रहना होगा। इस दौरान ना तो वह महिला राजनीतिक अधिकार प्राप्त कर सकती है और ना ही किसी अन्य तरह का। शनिवार को नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक में नागरिकता संबंधी संशोधित कानून को संसद में पास कराने का फैसला किया गया है। सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के पास लगभग दो तिहाई बहुमत है लिहाजा इस संसद में यह कानून बेहद आसानी से पास हो जाएगा। नेपाल की ओली सरकार एक रणनीति के तहत कदम आगे बढ़ा रही है। ओली सरकार का मकसद भारत के साथ संबंधों को ऐसे हाशिए पर ले जाकर छोड़ देना है जहां राजनीतिक और कूटनीतिक के साथ-साथ पारिवारिक संबंध भी खत्म हो जाए। नेपाल सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर बिहार के बॉर्डर वाले इलाकों पर पड़ेगा।
भारत-नेपाल मैत्री संबंधों के मुताबिक अब तक के नेपाल की जिन महिलाओं की शादी भारत में होती है उन्हें तत्काल नागरिकता दे दी जाती है जबकि नेपाल सरकार लगातार यह दुष्प्रचार कर रही है कि भारत में नेपाली महिलाओं को 7 साल बाद नागरिकता दी जाती है। हालांकि विदेशी महिलाओं की शादी के मामले में भारत के अंदर यह कानून नेपाल को छोड़कर अन्य देशों के लिए है।