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20-Jun-2020 08:45 PM
DESK : कोरोना वायरस की पहली दवा बाजार में आ गयी है. इस दवा को भारत में बेचने की मंजूरी भी मिल गयी है. ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने ये दवा तैयार की है. कंपनी ने कहा है कि उसे भारतीय औषधि महानियंत्रक यानि DGCI से दवा को भारत में बनाने और बेचने की मंजूरी मिल गयी है.
कोरोना की पहली खाने वाली दवा
दरअसल ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने कोविड-19 से मामूली और मध्यम रूप से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए एंटीवायरल दवा बनाया है. इसे फैबिफ्लू ब्रांड नाम से बाजार में उतारा गया है. ग्लेनमार्क कंपनी की ओर से ये जानकारी दी गयी है. मुंबई की इस कंपनी ने कहा है उसे भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआइ) से इस दवा के विनिर्माण और विपणन की अनुमति मिल गई है.
जानिये क्या होगा दवा का दाम
ग्लेनमार्क कंपनी की ये दवा फैबिफ्लू कोविड-19 के इलाज के लिए पहली खाने वाली फेविपिरविर दवा है, जिसे भारत में बेचने की मंजूरी मिली है. कंपनी ने इस यह दवा को लगभग 103 रुपये प्रति टैबलेट की दर से बाजार में उतारने का फैसला लिया है. ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने कहा कि यह दवा 34 टैबलेट की स्टि्रप में बाजार में आयेगी. 34 टैबलेट की एक स्ट्रिप का दाम साढ़े तीन हजार रूपया होगा.
गंभीर मरीजों के लिए नहीं है ये दवा
हालांकि ये दवा कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए नहीं है. ये कोरोना से मामूली या मध्यम रूप से संक्रमित मरीजों को दी जा सकती है. ग्लेनमार्क कंपनी के ये दवा फैबिफ्लू कोविड-19 के उपचार के लिए भारत में पहली मौखिक फेविपिरविर अनुमोदित दवा है. कंपनी के मुताबिक इसे कोरोना संक्रमित मरीज को पहले दिन 1800 मिलीग्राम दो बार दिया जा सकेगा.उसके बाद 14 दिनों तक रोज 800 मिलीग्राम दिन में दो बार दी जा सकेगी.
ग्लेनमार्क ने कहा कि उसने अपनी दवा का उत्पादन हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित अपने प्लांट में शुरू कर दिया है. ग्लेनमार्क ने कहा है कि ये दवा अस्पतालों और खुदरा चैनल दोनों तरीके से बाजार में उपलब्ध होगा. ग्लेनमार्क ने दावा किया है कि उसने इन-हाउस रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम के माध्यम से फैबिफ्लू के लिए सक्रिय फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (एपीआइ) और फॉर्म्युलेशन को डेवेलप किया है.
ग्लेमार्क फार्मास्युटिकल्स के सीएमडी ग्लेन सल्दान्हा ने दावा किया है कि इस दवा से कोरोना का कहर झेल रहे भारत को राहत मिलेगी. कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उसकी दवा को बेचने की मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढते जा रहे हैं. ग्लेनमार्क कंपनी के सीएमडी ने उम्मीद जताई है कि फैबिफ्लू जैसी दवा के उपलब्ध होने से कोरोना के मरीजों के इलाज के दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
मामूली और मध्यम रूप से पीड़ित मरीजों को दी जाएगी दवा
फैबिफ्लू कोविड-19 के उपचार के लिए भारत में पहली मौखिक फेविपिरविर अनुमोदित दवा है। इसकी सिफारिश पहले दिन में 1,800 मिलीग्राम दो बार और उसके बाद रोजाना 14 दिनों तक 800 मिलीग्राम दो बार की गई है। टैबलेट का उत्पादन कंपनी द्वारा हिमाचल प्रदेश के बद्दी में किया जा रहा है। ग्लेनमार्क ने कहा कि यह दवा अस्पतालों और खुदरा चैनल दोनों माध्यम से उपलब्ध होगी। ग्लेनमार्क ने कहा कि कंपनी ने अपने इन-हाउस रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम के माध्यम से फैबिफ्लू के लिए सक्रिय फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (एपीआइ) और फॉर्म्युलेशन को सफलतापूर्वक विकसित किया है।
DESK : कोरोना वायरस की पहली दवा बाजार में आ गयी है. इस दवा को भारत में बेचने की मंजूरी भी मिल गयी है. ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने ये दवा तैयार की है. कंपनी ने कहा है कि उसे भारतीय औषधि महानियंत्रक यानि DGCI से दवा को भारत में बनाने और बेचने की मंजूरी मिल गयी है.
कोरोना की पहली खाने वाली दवा
दरअसल ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने कोविड-19 से मामूली और मध्यम रूप से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए एंटीवायरल दवा बनाया है. इसे फैबिफ्लू ब्रांड नाम से बाजार में उतारा गया है. ग्लेनमार्क कंपनी की ओर से ये जानकारी दी गयी है. मुंबई की इस कंपनी ने कहा है उसे भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआइ) से इस दवा के विनिर्माण और विपणन की अनुमति मिल गई है.
जानिये क्या होगा दवा का दाम
ग्लेनमार्क कंपनी की ये दवा फैबिफ्लू कोविड-19 के इलाज के लिए पहली खाने वाली फेविपिरविर दवा है, जिसे भारत में बेचने की मंजूरी मिली है. कंपनी ने इस यह दवा को लगभग 103 रुपये प्रति टैबलेट की दर से बाजार में उतारने का फैसला लिया है. ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने कहा कि यह दवा 34 टैबलेट की स्टि्रप में बाजार में आयेगी. 34 टैबलेट की एक स्ट्रिप का दाम साढ़े तीन हजार रूपया होगा.
गंभीर मरीजों के लिए नहीं है ये दवा
हालांकि ये दवा कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए नहीं है. ये कोरोना से मामूली या मध्यम रूप से संक्रमित मरीजों को दी जा सकती है. ग्लेनमार्क कंपनी के ये दवा फैबिफ्लू कोविड-19 के उपचार के लिए भारत में पहली मौखिक फेविपिरविर अनुमोदित दवा है. कंपनी के मुताबिक इसे कोरोना संक्रमित मरीज को पहले दिन 1800 मिलीग्राम दो बार दिया जा सकेगा.उसके बाद 14 दिनों तक रोज 800 मिलीग्राम दिन में दो बार दी जा सकेगी.
ग्लेनमार्क ने कहा कि उसने अपनी दवा का उत्पादन हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित अपने प्लांट में शुरू कर दिया है. ग्लेनमार्क ने कहा है कि ये दवा अस्पतालों और खुदरा चैनल दोनों तरीके से बाजार में उपलब्ध होगा. ग्लेनमार्क ने दावा किया है कि उसने इन-हाउस रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम के माध्यम से फैबिफ्लू के लिए सक्रिय फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (एपीआइ) और फॉर्म्युलेशन को डेवेलप किया है.
ग्लेमार्क फार्मास्युटिकल्स के सीएमडी ग्लेन सल्दान्हा ने दावा किया है कि इस दवा से कोरोना का कहर झेल रहे भारत को राहत मिलेगी. कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उसकी दवा को बेचने की मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढते जा रहे हैं. ग्लेनमार्क कंपनी के सीएमडी ने उम्मीद जताई है कि फैबिफ्लू जैसी दवा के उपलब्ध होने से कोरोना के मरीजों के इलाज के दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
मामूली और मध्यम रूप से पीड़ित मरीजों को दी जाएगी दवा
फैबिफ्लू कोविड-19 के उपचार के लिए भारत में पहली मौखिक फेविपिरविर अनुमोदित दवा है। इसकी सिफारिश पहले दिन में 1,800 मिलीग्राम दो बार और उसके बाद रोजाना 14 दिनों तक 800 मिलीग्राम दो बार की गई है। टैबलेट का उत्पादन कंपनी द्वारा हिमाचल प्रदेश के बद्दी में किया जा रहा है। ग्लेनमार्क ने कहा कि यह दवा अस्पतालों और खुदरा चैनल दोनों माध्यम से उपलब्ध होगी। ग्लेनमार्क ने कहा कि कंपनी ने अपने इन-हाउस रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम के माध्यम से फैबिफ्लू के लिए सक्रिय फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (एपीआइ) और फॉर्म्युलेशन को सफलतापूर्वक विकसित किया है।