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27-Jan-2024 03:13 PM
By First Bihar
PATNA : बिहार में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन होने जा रही है। कल नीतीश कुमार नौवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। बिहार के आरजेडी-जेडीयू का गठबंधन टूटने की कगार पर है। नीतीश कुमार की अगुआई में जेडीयू फिर से एनडीए में शामिल हो जाएगी। आम चुनाव से पहले यह एक तरफ भाजपा के लिए बड़ी खुशखबरी होगी तो दूसरी तरफ इस फैसले के साथ ही INDIA गठबंधन पूरी तरह बिखरा नजर आएगा। ऐसे में नीतीश कुमार और भाजपा के बीच लव और हेट स्टोरी पिछले 10 साल से चलती ही ही है। वहीं 23 साल में भले ही पांच बार ही बिहार के विधानसभा चुनाव हुए हों लेकिन नीतीश कुमार 8 बार सीएम पद की शपथ ले चुके हैं और अब यह नौवीं दफा होगा जब नीतीश कुमार सीएम पद की शपथ लेंगे।
दरअसल, नीतीश कुमार अबतक आठ दफे अपने सहयोगियों को कई बार चौंका चुके हैं। यहां तक कि भाजपा भी कभी उनके मन की बात नहीं जान पाई। इसके बाबजूद नीतीश कुमार ऐसे नेता हैं जिन्होंने भाजपा की कई पीढ़ियों के साथ काम किया है। वह अटल बिहारी वाजपेयी-लालकृष्ण आडवाणी और मोदी-शाह की भाजपा में काम कर चुके हैं। साल 2000 में वह पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे।
सबसे पहले 2000 में भाजपा के समर्थन से CM बनें नीतीश कुमार, इस्तीफा के बाद 2005 में बने सीएम
जब साल 2000 में भाजपा के समर्थन से ही नीतीश कुमार ने बिहार के सीएम पद की शपथ ली थी तो उस समय केंद्र में एनडीए के पास 151 एमएलए थे जबकि आरजेडी के पास 159 विधायक थे। नीतीश कुमार ने सीएम पद की शपथ तो ले ली लेकिन सात दिन के भीतर ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ गया। उन्हें 10 मार्च 2000 को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद 2005 के विधानसभा चुनाव में एनडीए में रहते हुए ही वह भाजपा के समर्थन के साथ दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
वहीं, 2010 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी को तगड़ा झटका लगा था। एनडीए को 206 सीटें मिलीं जो कि 85 पर्सेंट सीटें थीं। वहीं आरजेडी 22 सीटों पर सिमट गई। इस बार जेडीयू के 141 उम्मीदवार उतरे थे जिनमें से 115 जीत गए। 2010 में नीतीश कुमार सीएम बन गए और भाजपा के सुशील मोदी उपमुख्यमंत्री बने। इसके बाद नीतीश 14 साल तक भाजपा के साथ चलते रहे लेकिन जब प्रधानमंत्री चेहरे के रूप में नरेंद्र मोदी को प्रोजेक्ट किया गया तो दरार पैदा हो गई।
मांझी को हटा कर 2015 में लिया शपथ
चर्चा यह भी थी कि नीतीश खुद को भी पीएम पद का दावेदार मानते थे। अब उनका कहना था कि भाजपा में अटल-आडवाणी का वक्त खत्म हो गया है इसलिए वह नए लोगों के साथ तालमेल नहीं बैठा पाएंगे। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि,रहें या ना रहें लेकिन भाजपा के साथ हाथ नहीं मिलाएंगे। 2014 में भाजपा की प्रचंड जीत हुई। वहीं बिहार में उनकी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं था। इसके बाद नैतिक जिम्मेदारी का हवाला देते हुए नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया। जीतनराम मांझी मुख्यमंत्री बन गए।
2015 में नीतीश हो गए महागठबंधन का हिस्सा और 2017 में छोड़ा साथ
इसके बाद 2015 के चुनाव में उन्होंने भाजपा का जमकर विरोध किया और बिहार में महागठबंधन का हिस्सा हो गए। यह चुनाव नीतीश ने आरजेडी और कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ा। चुनाव के बाद वह मुख्यमंत्री बने और तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बन गए। जब 2017 में तेजस्वी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो नतीश को फिर से पाला बदलने का मौका मिल गया। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद एनडीए के साथ मिलकर उन्होंने शपथ ग्रहण किया।
2020 में NDA के साथ विधानसभा चुनाव और 2022 में तेजस्वी का साथ
लेकिन, 2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश ने फिर से भाजपा के साथ चुनाव लड़ा लेकिन इस चुनाव में आरजेडी को नुकसान ही हुआ। यह बात नीतीश पचा नहीं पा रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली लेकिन कुछ दिन बाद ही 2022 में एक बार फिर इस्तीफा दे दिया। उन्होंने भाजपा का साथ छोड़ फिर से आरजेडी का साथ पकड़ा और मुख्यमंत्री बन गए। अब एक बार फिर अटकलें हैं कि नीतीश कुमार आरजेडी का साथ छोड़ सकते हैं।