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30 साल में ऐसा केस नहीं देखा ...बंगाल पुलिस का व्यवहार शर्मनाक ... कोलकत्ता केस पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, CBI ने कहा - मौका-ए-वारदात से छेड़छाड़ हुई

22-Aug-2024 12:25 PM

By First Bihar

DESK : कोलकाता के आरजीकर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की ट्रेनी डॉक्टर से रेप और हत्या के मामले पर देश भर में काफी आक्रोश है। इस घटना को लेकर हररोज नए -नए खुलासे हो रहे हैं। इस घटना की जांच सीबीआई कर रही है। इस बीच आज इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। सीबीआई ने आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर स्टेटस रिपोर्ट पेश कर दी है। इस रिपोर्ट के बाद बंगाल सरकार की जमकर किरकिरी हुई है। 


सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में कहा कि इस पूरे मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन का रवैया उदासीन रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस  घटना की सूचना पीड़िता के परिजनों को देरी से दी गई। इतना ही परिवार को पहले सुसाइड की खबर दी गई। लिहाजा मर्डर को सुसाइड बताने की कोशिश करना संदेह पैदा करता है। इसका मतलब साफ़ है कि वारदात पर पर्दा डालने की कोशिश की गई। सुप्रीम कोर्ट ने पंचनामे को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं कोर्ट ने कहा कि अगर स्वाभाविक मौत थी तो पोस्टमार्टम क्यों किया गया? पोस्टमार्टम के बाद एफआईआर से हैरानी होती है ?  कोलकाता मामले पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि ये केस चौंकाने वाला है।  हमने बीते 30 साल में ऐसा केस नहीं देखा। यह पूरा मामला सदमा देने वाला है। बंगाल पुलिस का व्यवहार शर्मनाक है। 



इसके अलावा कोर्ट ने सबसे बड़ी टिप्पणी यह कि है कि पुलिस डायरी और पोस्टमार्टम के वक्त में अतंर है। आरोपी की मेडिकल जांच पर भी कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि कोलकाता में मौका-ए-वारदात से छेड़छाड़ की गई है। इस केस की लीपापोती की कोशिश की गई। बड़ी बात यह है कि अंतिम संस्कार के बाद एफआईआर दर्ज हुई।  


कोलकाता मामले पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने कहा कि डॉक्टर्स 36-36 घंटे काम कर रहे हैं। कोर्ट से डॉक्टर्स को सुरक्षा का भरोसा मिल जाए तो उनको संतोष होगा। उन्हें अपनी बात कहने का मौका दिया जाए। इस पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि डॉक्टरों की 36 से 48 घंटों की ड्यूटी सही नहीं है। हम जानते हैं कि डॉक्टर 36 घंटे काम कर रहे हैं। मैं खुद एक सरकारी अस्पताल में फर्श पर सोया हूं, जब मेरे परिवार का एक सदस्य बीमार थे।