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23-Jun-2025 07:51 AM
By First Bihar
Parenting Tips: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा खुश, आत्मनिर्भर और सफल बने। लेकिन कई बार अनजाने में कुछ ऐसी पेरेंटिंग आदतें अपनाई जाती हैं जो बच्चे की मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक सेहत पर बुरा असर डाल सकती हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि आपका बच्चा एक बेहतर इंसान बने, तो इन अहम बातों को समझना और अपनाना बेहद जरूरी है
अत्यधिक दबाव देना
कुछ माता-पिता बच्चों पर पढ़ाई या करियर में सफलता का अत्यधिक दबाव डालते हैं। यह सोचकर कि वे उन्हें एक उज्जवल भविष्य देना चाहते हैं। लेकिन इससे बच्चों में तनाव, एंग्जायटी, और सेल्फ-डाउट पनपता है।
क्या करें
लक्ष्य तय करने में बच्चे की राय लें
छोटे-छोटे प्रयासों की सराहना करें
फेल होने पर सहारा दें, न कि सज़ा
बच्चों की बात को नजरअंदाज करना
जब बच्चा अपने दिल की बात या दुख-सुख बताता है और माता-पिता उसे अनसुना कर देते हैं, तो वह अकेलापन और अस्वीकार्यता महसूस करने लगता है। इससे उसका भावनात्मक विकास रुक सकता है।
क्या करें
हर दिन कुछ मिनट सिर्फ बच्चे की बातें सुनें
मोबाइल या टीवी बंद कर उसकी बात पर ध्यान दें
भावनाओं को मान्यता दें (Validate)
पसंद-नापसंद को महत्व न देना
]हर बच्चे की अपनी रुचि, शौक और सपना होता है। यदि पेरेंट्स उसे नज़रअंदाज़ करते हैं या अपने फैसले थोपते हैं, तो बच्चा हतोत्साहित हो जाता है और धीरे-धीरे अपने जुनून से दूर हो जाता है।
क्या करें
उसके शौक जानने की कोशिश करें
उसे नई चीजें ट्राय करने दें
बच्चे की पसंद का सम्मान करें
तुलना करना- आत्मविश्वास तोड़ने वाली सबसे बड़ी गलती
"देखो शर्मा जी का बेटा कितना पढ़ता है!" ऐसी बातें बच्चों का आत्मविश्वास गिरा देती हैं। हर बच्चा अलग होता है और उसकी क्षमताएं भी अलग होती हैं।
क्या करें
तुलना की बजाय प्रगति पर ध्यान दें
हर छोटे प्रयास की तारीफ करें
उसे खुद से बेहतर बनने के लिए प्रेरित करें
कठोर अनुशासन
सिर्फ डांटना या सज़ा देना बच्चे को भावनात्मक रूप से दूर कर देता है। वह सिर्फ डर के कारण अच्छा बनने की कोशिश करता है, न कि समझ के कारण।
क्या करें
अनुशासन के साथ संवाद रखें
गलती पर कारण समझाएं
पॉजिटिव रिइन्फोर्समेंट का इस्तेमाल करें
पेरेंटिंग कोई परफेक्ट विज्ञान नहीं है, लेकिन थोड़ी समझदारी, संवेदनशीलता और धैर्य से आप अपने बच्चे को एक सुरक्षित, खुशहाल और आत्मनिर्भर जीवन की ओर ले जा सकते हैं। आपका प्यार, सपोर्ट और समझ ही बच्चे की सबसे बड़ी ताकत है।