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Life Style: छोटी-छोटी दिमागी कमी से हो सकता है आपको Brain Fog, जानिए.. दिमागी धुंध से छुटकारा पाने के टिप्स

Life Style: आजकल की दौड़भाग और तनाव से भरी ज़िंदगी में मानसिक स्वास्थ्य सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है. ऐसे में आपको हो सकता है Brain Fog. जानें...

lifestyle

30-Apr-2025 01:12 PM

By First Bihar

Life Style: आजकल की दौड़भाग और तनाव से भरी ज़िंदगी में मानसिक स्वास्थ्य सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। हमारी लाइफस्टाइल इतनी व्यस्त हो चुकी है कि खुद के लिए समय निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। इस कारण दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता और इसका सीधा असर हमारे मस्तिष्क पर पड़ता है, जिसका परिणाम होता है ब्रेन फॉग (Brain Fog)।


ब्रेन फॉग क्या है? (What is Brain Fog?)

ब्रेन फॉग कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक मानसिक स्थिति (Mental State) है, जिसमें व्यक्ति को सोचने, समझने, याद रखने और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है। यह समस्या मानसिक थकान, तनाव, खराब दिनचर्या या शारीरिक बीमारियों के चलते हो सकती है।


आमतौर पर यह महसूस होता है

“दिमाग में धुंध” छाई है,

काम में मन नहीं लग रहा,

निर्णय लेने में मुश्किल हो रही है।

ब्रेन फॉग के लक्षण (Brain Fog Symptoms)

ब्रेन फॉग के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर इनमें शामिल हैं:

कमज़ोर याददाश्त – छोटी बातें भूल जाना जैसे चाबी कहां रखी या नाम याद न आना

ध्यान की कमी – काम के दौरान बार-बार ध्यान भटकना

मानसिक थकान – दिमागी रूप से सुस्ती और ऊर्जा की कमी

स्पष्ट सोचने में दिक्कत – निर्णय लेने में परेशानी, उलझे विचार

भाषा संबंधी दिक्कतें – शब्दों की तलाश करना, बोलने में रुकावट

मूड स्विंग्स – चिड़चिड़ापन, उदासी, या अत्यधिक भावुकता


ब्रेन फॉग के कारण (Brain Fog Causes)

यह स्थिति कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है, जैसे

तनाव और एंग्जायटी – लगातार तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है

नींद की कमी – ब्रेन को पर्याप्त आराम नहीं मिलने से उसकी कार्यक्षमता घटती है

पोषण की कमी – खासकर विटामिन B12, D, आयरन और ओमेगा-3 की कमी

डिहाइड्रेशन – शरीर में पानी की कमी दिमाग को सुस्त बना देती है

हार्मोनल बदलाव – थायरॉइड, मेनोपॉज़ या प्रेगनेंसी के समय

दवाओं का असर – कुछ एंटीडिप्रेसेंट्स और ब्लड प्रेशर की दवाएं

पुरानी बीमारियां – जैसे डायबिटीज़, फाइब्रोमायल्जिया, या ऑटोइम्यून डिसऑर्डर

पोस्ट-कोविड ब्रेन फॉग – कई लोग कोविड-19 संक्रमण के बाद मानसिक धुंध की शिकायत करते हैं


ब्रेन फॉग से बचाव के उपाय (Brain Fog Prevention Tips)

हेल्दी डाइट अपनाएं

ओमेगा-3 फैटी एसिड (मछली, अखरोट, अलसी)

विटामिन-B12, D और आयरन से भरपूर भोजन

एंटीऑक्सीडेंट्स (ब्लूबेरी, पालक, डार्क चॉकलेट)

प्रोसेस्ड और शुगर वाले फूड्स से परहेज करें


पर्याप्त नींद लें, जिसमें हर रात 7–8 घंटे की नींद ज़रूरी है साथ ही सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें। अगर ब्रेन फॉग से बचाव करना है तो तनाव को कम करें और योग, मेडिटेशन और गहरी सांसों का अभ्यास जरुरी है। सबसे खास बात यह है कि नियमित ब्रेक और मनपसंद हॉबी अपनाएं। फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं और रोज़ाना कम से कम 30 मिनट वॉक या व्यायाम करें। 


इसके अलावा शरीर को हाइड्रेट रखें दिनभर में 8–10 गिलास पानी पिएं, पजल सॉल्व करें, नई चीजें सीखें, किताबें पढ़ें और डॉक्टर से सलाह लें। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो न्यूरोलॉजिस्ट या साइकैट्रिस्ट से मिलें।


ब्रेन फॉग को नज़रअंदाज़ करना गंभीर मानसिक और शारीरिक समस्याओं को जन्म दे सकता है। यह हमारी कार्यक्षमता, रिश्तों और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। लेकिन थोड़ी सजगता, बेहतर दिनचर्या और समय पर इलाज से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

Life Style: आजकल की दौड़भाग और तनाव से भरी ज़िंदगी में मानसिक स्वास्थ्य सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। हमारी लाइफस्टाइल इतनी व्यस्त हो चुकी है कि खुद के लिए समय निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। इस कारण दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता और इसका सीधा असर हमारे मस्तिष्क पर पड़ता है, जिसका परिणाम होता है ब्रेन फॉग (Brain Fog)।


ब्रेन फॉग क्या है? (What is Brain Fog?)

ब्रेन फॉग कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक मानसिक स्थिति (Mental State) है, जिसमें व्यक्ति को सोचने, समझने, याद रखने और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है। यह समस्या मानसिक थकान, तनाव, खराब दिनचर्या या शारीरिक बीमारियों के चलते हो सकती है।


आमतौर पर यह महसूस होता है

“दिमाग में धुंध” छाई है,

काम में मन नहीं लग रहा,

निर्णय लेने में मुश्किल हो रही है।

ब्रेन फॉग के लक्षण (Brain Fog Symptoms)

ब्रेन फॉग के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर इनमें शामिल हैं:

कमज़ोर याददाश्त – छोटी बातें भूल जाना जैसे चाबी कहां रखी या नाम याद न आना

ध्यान की कमी – काम के दौरान बार-बार ध्यान भटकना

मानसिक थकान – दिमागी रूप से सुस्ती और ऊर्जा की कमी

स्पष्ट सोचने में दिक्कत – निर्णय लेने में परेशानी, उलझे विचार

भाषा संबंधी दिक्कतें – शब्दों की तलाश करना, बोलने में रुकावट

मूड स्विंग्स – चिड़चिड़ापन, उदासी, या अत्यधिक भावुकता


ब्रेन फॉग के कारण (Brain Fog Causes)

यह स्थिति कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है, जैसे

तनाव और एंग्जायटी – लगातार तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है

नींद की कमी – ब्रेन को पर्याप्त आराम नहीं मिलने से उसकी कार्यक्षमता घटती है

पोषण की कमी – खासकर विटामिन B12, D, आयरन और ओमेगा-3 की कमी

डिहाइड्रेशन – शरीर में पानी की कमी दिमाग को सुस्त बना देती है

हार्मोनल बदलाव – थायरॉइड, मेनोपॉज़ या प्रेगनेंसी के समय

दवाओं का असर – कुछ एंटीडिप्रेसेंट्स और ब्लड प्रेशर की दवाएं

पुरानी बीमारियां – जैसे डायबिटीज़, फाइब्रोमायल्जिया, या ऑटोइम्यून डिसऑर्डर

पोस्ट-कोविड ब्रेन फॉग – कई लोग कोविड-19 संक्रमण के बाद मानसिक धुंध की शिकायत करते हैं


ब्रेन फॉग से बचाव के उपाय (Brain Fog Prevention Tips)

हेल्दी डाइट अपनाएं

ओमेगा-3 फैटी एसिड (मछली, अखरोट, अलसी)

विटामिन-B12, D और आयरन से भरपूर भोजन

एंटीऑक्सीडेंट्स (ब्लूबेरी, पालक, डार्क चॉकलेट)

प्रोसेस्ड और शुगर वाले फूड्स से परहेज करें


पर्याप्त नींद लें, जिसमें हर रात 7–8 घंटे की नींद ज़रूरी है साथ ही सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें। अगर ब्रेन फॉग से बचाव करना है तो तनाव को कम करें और योग, मेडिटेशन और गहरी सांसों का अभ्यास जरुरी है। सबसे खास बात यह है कि नियमित ब्रेक और मनपसंद हॉबी अपनाएं। फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं और रोज़ाना कम से कम 30 मिनट वॉक या व्यायाम करें। 


इसके अलावा शरीर को हाइड्रेट रखें दिनभर में 8–10 गिलास पानी पिएं, पजल सॉल्व करें, नई चीजें सीखें, किताबें पढ़ें और डॉक्टर से सलाह लें। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो न्यूरोलॉजिस्ट या साइकैट्रिस्ट से मिलें।


ब्रेन फॉग को नज़रअंदाज़ करना गंभीर मानसिक और शारीरिक समस्याओं को जन्म दे सकता है। यह हमारी कार्यक्षमता, रिश्तों और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। लेकिन थोड़ी सजगता, बेहतर दिनचर्या और समय पर इलाज से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।