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कलंक कथा ! E.E.की दौलत जान हर कोई हैरान, सुशासन की सच्चाई- करप्शन केस ठंडा भी नहीं हुआ और आरोपी 'जेल अधीक्षक' को सरकार ने दी फील्ड पोस्टिंग...हर कोई अचंभित

भ्रष्टाचार को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं। जयनगर में तैनात विद्युत कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के ठिकानों पर ईओयू की रेड में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ है। वहीं DA केस के आरोपी जेल अधीक्षक विधु कुमार को निलंबन मुक्त कर बेगूसराय में पोस्टिंग

1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Mar 19, 2026, 2:15:59 PM

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- फ़ोटो Google

Bihar News: बिहार के एक-एक धनकुबेर अफसरों की दौलत जानकर आप हैरान रह जाएंगे। रेड के दौरान खुलासा होता है, कुछ समय मामला चर्चा में रहता है,इसके बाद सरकार मामले पर मिट्टी डाल देती है . फिर से उक्त धनकुबेर अधिकारी की मनचाही पोस्टिंग मिल जाती है. वर्तमान में उर्जा विभाग का एक कार्यपालक अभियंता चर्चा में है. चर्चा होना स्वाभाविक भी है, क्योंकि ईओयू की रेड में करोड़ों की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है. वैसे साल भर पहले एक और धनकुबेर अधिकारी की ईओयू ने पोल खोली थी. वो मामला भी काफी सुर्खियां बटोरी थी. साल बीतने के बाद क्या हुआ, जानकर आश्चर्य में पड़ जाएंगे.किस तरह से सूबे में सुशासन के मुंह पर तमाचा मारा जा रहा है. 

कार्यपालक अभियंता ने 100 करोड़ की संपत्ति बनाई ? 

मधुबनी जिले के जयनगर में तैनात विद्युत कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक इन दिनों चर्चा में हैं. 17 साल की अपनी सेवा में 100 करोड़ की संपत्ति बनाने की खबर है. इंजीनियर के सात ठिकानों पर मंगलवार को एक साथ आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की छापेमारी में यह खुलासा हुआ है. मनोज रजक ने बिजली कंपनी में 2009 में बतौर सहायक अभियंता योगदान किया था। छापे में अभियंता की संपत्ति बिहार के कई जिलों के अलावा नेपाल और बंगाल में भी होने के प्रमाण मिले हैं। मनोज कुमार व उनके परिजनों के नाम पर सिलीगुड़ी, दरभंगा, सुपौल के करजाईन और अररिया में तीन करोड़ के 17 भूखंडों की जानकारी मिली है। 

मामला ठंडा भी नहीं हुआ और भ्रष्टाचार के आरोपी को बना दिया बेगूसराय का जेल अधीक्षक 

अब आइए सूबे के एक और चर्चित अधिकारी के भ्रष्टाचार की कहानी पर. आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पटना के बेउर आदर्श केंद्रीय कारा के तत्कालीन अधीक्षक विधु कुमार के खिलाफ 3 जनवरी 2025 को डीए केस सं- 1/25 दर्ज किया था. इसके बाद जेल अधीक्षक के पटना से लेकर मोतिहारी तक कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. तब यह मामला काफी चर्चा में रहा. कई दिनों तक यह खबर सुर्खियों बटोरी. सरकार की भद्द मिटने के बाद गृह विभाग ने 22 जनवरी 2025 को आरोपी जेल अधीक्षक विधु कुमार को सस्पेंड किया था. कुछ महीनों तक सस्पेंड रखने के बाद सरकार ने चुपके से भ्रष्टाचार के बड़े आरोपी विधु कुमार को निलंबन मुक्त किया और आरोपों को दरकिनार कर फील्ड में पोस्टिंग दे दी. उक्त आरोपी अधिकारी को बेगूसराय का जेल अधीक्षक बनाया गया है. गृह विभाग के 10 फऱवरी 2026 की अधिसूचना के अनुसार, करप्शन केस के बड़े आरोपी को बेगूसराय का जेल अधीक्षक के पद पर पोस्टिंग दी गई है. इस तरह से फील्ड में जगह देकर सरकार ने करप्शन के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का खुद ही माखौल उड़ा दिया. 

विधु कुमार के खिलाफ ईओयू ने दर्ज किया था डीए केस  

ईओयू के केस आरोप लगाया गया था कि विधु कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग कर अकूत अवैध संपत्ति अर्जित की जो वैध स्रोत से हुई आय से 146 प्रतिशत अधिक है। बेउर केंद्रीय कारा के तत्कालीन अधीक्षक व वर्तमान में बेगूसराय के अधीक्षक विधु कुमार पर आरोप है कि ये जेल में बंद कैदियों का शोषण और मानसिक उत्पीडऩ कर उनसे पैसों की उगाही करते थे। उनकी काली कमाई में परिवार के कई सदस्यों के साथ ही विश्वसनीय कक्षपाल प्रफुल्ल कुमार भी शामिल थे। ईओयू की छापेमारी के बाद गृह विभाग ने 22 जनवरी 2025 को आरोपी जेल अधीक्षक विधु कुमार को सस्पेंड कर दिया था. निलंबन अवधि में विधु कुमार का मुख्यालय केंद्रीय कारा, बक्सर निर्धारित किया गया था. 

विधु कुमार के कई करीबी के ठिकानों पर भी हुई थी छापेमारी 

विधु कुमार पर आरोप थे कि इन्होंने अपनी अवैध कमाई से 54 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात एवं बर्तन खरीदे. चार लाख रुपये चांदी के बर्तन खरीदने में भी काली कमाई का इस्तेमाल किया था। इनके यहां छापामारी के दौरान जमीन खरीद की छह डीड भी बरामद की गई थी. विधु कुमार के ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई ने पटना के सरकारी आवास के साथ ही इनके बेउर स्थित कार्यालय कक्ष, शगुना स्थित घर, बिशनपुरा बिहटा स्थित घर, आरा गार्डन रेसीडेंसी स्थित किराये के फ्लैट के साथ ही कक्षपाल प्रफुल्ल कुमार के घर, मोतिहारी में एक करीबी के घर और इनके सीए के कार्यालय में ईओयू की टीमों ने एक साथ छापा मारा था। जिसमें यह जानकारी सामने आई कि विधु कुमार ने वैध आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित करते हुए पटना, मोतिहारी एवं अन्य स्थानों पर मां, पिता और पत्नी एवं अपने नाम पर कई अचल संपत्तियां खरीदी थी।

ईओयू ने मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से काले धन को सफेद बनाने के लगाए थे आरोप 

ये मनी लॉन्डरिंग कर यह अपने काले धन को सफेद भी बना रहे थे। इसके लिए उन्होंने मां और पत्नी के नाम पर कई शैल कंपनियां भी बनाई थी। मनी लॉन्डरिंग के इस काम में नजदीकी मित्र और इनके चार्टर्ड एकाउंटेंट की अहम भूमिका पाई गई। ईओयू की टीम ने बेउर जेल स्थिति इनके कार्यालय कक्ष से मां विंध्यवासनी ट्रेडिंग, छतौनी, मोतिहारी का बैंक स्टेटमेंट, उषा इंडस्ट्रीज बसवरिया, मोतिहारी का ब्लैंक बैंक एनवायस, विधु कुमार पर पूर्व में लगे आरोपों से संबंधित तीन आवेदन पत्र जिसमें विधु कुमार के अवैध धनार्जन का आरोप है।

मोतिहारी में भी जेल अधीक्षक रहे थे विधु कुमार 

मोतिहारी में विधु कुमार के करीबी मित्र के घर से टैक्स एनवायस के साथ 13 महंगी एसयूवी गाडिय़ां जबकि कमला मशकरा के ठिकानों से बैंक खातों के स्टेटमेंट और शैलजा देवी एवं गोपाल शरण के नाम जमीन क्रय से जुड़ी पांच डीड की छाया प्रति बरामद की गई थी. मामला अभी जांच में है. इधर सरकार ने विधु कुमार को फील्ड में जगह (जेल अधीक्षक) के रूप में पोस्टिंग दे दी.