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Life Style: सर्दियों में रोज कितना पानी पीना चाहिए? कमी से बढ़ सकता है ये स्वास्थ्य खतरा, जानें

Life Style: सर्दियों का मौसम शुरू होते ही शरीर में पानी की कमी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं, क्योंकि ठंडे मौसम में लोगों की प्यास कम महसूस होती है और वे कम पानी पीते हैं।

Life Style

19-Nov-2025 02:05 PM

By First Bihar

Life Style: सर्दियों का मौसम शुरू होते ही शरीर में पानी की कमी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं, क्योंकि ठंडे मौसम में लोगों की प्यास कम महसूस होती है और वे कम पानी पीते हैं। ऐसे में डॉक्टरों का मानना है कि रोजाना 500 मिलीलीटर से कम पानी पीना शरीर के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। सबसे पहले किडनी पर इसका सीधा असर पड़ता है। पानी की कमी से किडनी को शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करने में कठिनाई होती है, जिससे यूरिन की मात्रा कम हो जाती है और शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते। लंबे समय तक यह आदत किडनी की कार्यक्षमता को नुकसान पहुँचा सकती है और किडनी स्टोन या अन्य किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।


इसके अलावा, शरीर में पानी की कमी ब्लड वॉल्यूम को घटा देती है, जिससे मस्तिष्क तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इससे थकान, मूड स्विंग और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मसल्स को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिलने से मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी भी महसूस हो सकती है। खासकर शारीरिक व्यायाम करने वालों और ऑफिस में लंबे समय तक बैठे रहने वालों को इससे अतिरिक्त थकान और ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ सकता है।


पानी की कमी का असर पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। जल शरीर में भोजन के पचने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब पानी कम पीते हैं, तो पाचन धीमा हो जाता है, जिससे कब्ज, अपच और पेट की गैस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा भूख भी प्रभावित हो सकती है और शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता।


अगर सर्दियों में लगातार कम पानी पीते रहें तो यह क्रॉनिक हेल्थ रिस्क में बढ़ोतरी कर सकता है। पेशाब गाढ़ा हो सकता है, किडनी फिल्टरेशन रेट घट सकता है और शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम हो सकती है। इससे आगे चलकर हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और पेशाब संबंधी संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।


डॉक्टर्स का कहना है कि सर्दियों में भी पानी पीने की आदत बनाए रखना बेहद जरूरी है। दिन भर में कम से कम 7-8 ग्लास पानी पीना चाहिए। यदि पानी पीना मुश्किल लगे तो गुनगुना पानी, जूस, सूप और हर्बल चाय के माध्यम से भी पानी की पूर्ति की जा सकती है। साथ ही, शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए फल और सब्जियों का सेवन भी जरूरी है, क्योंकि इनमें पानी की मात्रा अधिक होती है।


सर्दियों में हाइड्रेशन बनाए रखना न सिर्फ किडनी और मस्तिष्क के लिए जरूरी है, बल्कि यह मांसपेशियों, त्वचा और संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इसलिए ठंड में भी नियमित अंतराल पर पानी पीने की आदत डालें और अपने शरीर को हाइड्रेटेड रखें, ताकि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से बचा जा सके।

Life Style: सर्दियों का मौसम शुरू होते ही शरीर में पानी की कमी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं, क्योंकि ठंडे मौसम में लोगों की प्यास कम महसूस होती है और वे कम पानी पीते हैं। ऐसे में डॉक्टरों का मानना है कि रोजाना 500 मिलीलीटर से कम पानी पीना शरीर के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। सबसे पहले किडनी पर इसका सीधा असर पड़ता है। पानी की कमी से किडनी को शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करने में कठिनाई होती है, जिससे यूरिन की मात्रा कम हो जाती है और शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते। लंबे समय तक यह आदत किडनी की कार्यक्षमता को नुकसान पहुँचा सकती है और किडनी स्टोन या अन्य किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।


इसके अलावा, शरीर में पानी की कमी ब्लड वॉल्यूम को घटा देती है, जिससे मस्तिष्क तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इससे थकान, मूड स्विंग और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मसल्स को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिलने से मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी भी महसूस हो सकती है। खासकर शारीरिक व्यायाम करने वालों और ऑफिस में लंबे समय तक बैठे रहने वालों को इससे अतिरिक्त थकान और ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ सकता है।


पानी की कमी का असर पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। जल शरीर में भोजन के पचने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब पानी कम पीते हैं, तो पाचन धीमा हो जाता है, जिससे कब्ज, अपच और पेट की गैस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा भूख भी प्रभावित हो सकती है और शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता।


अगर सर्दियों में लगातार कम पानी पीते रहें तो यह क्रॉनिक हेल्थ रिस्क में बढ़ोतरी कर सकता है। पेशाब गाढ़ा हो सकता है, किडनी फिल्टरेशन रेट घट सकता है और शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम हो सकती है। इससे आगे चलकर हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और पेशाब संबंधी संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।


डॉक्टर्स का कहना है कि सर्दियों में भी पानी पीने की आदत बनाए रखना बेहद जरूरी है। दिन भर में कम से कम 7-8 ग्लास पानी पीना चाहिए। यदि पानी पीना मुश्किल लगे तो गुनगुना पानी, जूस, सूप और हर्बल चाय के माध्यम से भी पानी की पूर्ति की जा सकती है। साथ ही, शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए फल और सब्जियों का सेवन भी जरूरी है, क्योंकि इनमें पानी की मात्रा अधिक होती है।


सर्दियों में हाइड्रेशन बनाए रखना न सिर्फ किडनी और मस्तिष्क के लिए जरूरी है, बल्कि यह मांसपेशियों, त्वचा और संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इसलिए ठंड में भी नियमित अंतराल पर पानी पीने की आदत डालें और अपने शरीर को हाइड्रेटेड रखें, ताकि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से बचा जा सके।