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15-Aug-2025 03:10 PM
By First Bihar
India Missile Test: 20-21 अगस्त को हिंद महासागर में भारत एक घातक मिसाइल का परीक्षण करने जा रहा है। इस मिसाइल को “ब्रह्मोस से भी खतरनाक” कहा जा रहा है। इसके लिए भारत सरकार ने नोटिस टू एयरमेन जारी किया है, जिसके तहत ओडिशा तट से 4,790 किमी तक के समुद्री क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित किया गया है। यह परीक्षण भारत की सामरिक शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, जिससे पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन में खलबली मचने की पूरी संभावना है। ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता से पाकिस्तान पहले ही सहम चुका है और अब यह नया टेस्ट भारत की रक्षा क्षमताओं को और भी मजबूत करने का काम करेगा।
हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि यह कौन सी मिसाइल है लेकिन सूत्रों का मानना है कि यह अग्नि सीरीज की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल, संभवतः अग्नि-6 हो सकती है, जिसकी रेंज 5,000 किमी से भी अधिक होगी। कुछ विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर चर्चा है कि यह हाइपरसोनिक मिसाइल हो सकती है जो जमीन, हवा और समुद्र से दागी जा सकती है। जबकि कहा जा रहा है कि यह ब्रह्मोस-एनजी या ब्रह्मोस-II भी हो सकती है जो Mach 6-8 की गति और 1,500 किमी तक की रेंज के साथ डिजाइन की जा रही है। यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगी।
बताते चलें कि NOTAM का परीक्षण क्षेत्र किसी भी हवाई या समुद्री गतिविधि को प्रतिबंधित करता है। इससे पहले मई में अंडमान और निकोबार के पास 510 किमी के लिए NOTAM जारी किया गया था, जिसमें ब्रह्मोस की विस्तारित रेंज (900 किमी) का टेस्ट हुआ था। इस बार 4,790 किमी का विशाल डेंजर जोन इशारा करता है कि यह टेस्ट अब तक का सबसे लंबी दूरी वाला हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह परीक्षण भारत की दूसरी हड़ताल क्षमता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक प्रभुत्व को मजबूत करेगा।
सोशल मीडिया पर इस टेस्ट को लेकर उत्साह है और कई यूजर्स इसे भारत की अब तक की सबसे शक्तिशाली मिसाइल का टेस्ट बता रहे हैं। यह मिसाइल न केवल अपनी गति और रेंज के कारण दुश्मनों के लिए घातक होगी बल्कि स्वदेशी तकनीक पर आधारित होने से भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को भी प्रदर्शित करेगी। यदि यह टेस्ट सफल होता है तो भारत विश्व की चुनिंदा हाइपरसोनिक और लंबी दूरी की मिसाइल शक्ति वाले देशों की सूची में मजबूती से शामिल हो जाएगा। इस बीच DRDO और ब्रह्मोस एयरोस्पेस की नजरें 2026-27 तक ब्रह्मोस-II के प्रारंभिक प्रोटोटाइप और 2027-28 तक इसके सेना में शामिल होने पर भी टिकी हैं।