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01-Nov-2025 12:24 PM
By First Bihar
Sanjay Gandhi Biological Park : राजधानी पटना में सर्दियों का प्रभाव अब सिर्फ लोगों की दिनचर्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर शहर के पार्कों और संजय गांधी जैविक उद्यान यानी पटना जू के संचालन समय पर भी साफ दिखाई देने लगा है। तापमान में गिरावट और दिन के छोटे होने की वजह से पटना जू समेत शहर के प्रमुख पार्कों के खुलने और बंद होने के समय में आज से बदलाव लागू कर दिया गया है। यह व्यवस्था फरवरी माह तक जारी रहेगी।
पटना जू का नया समय
संजय गांधी जैविक उद्यान, जो कि बिहार के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है, अब सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहेगा। ठंड के मौसम को देखते हुए यह समय तय किया गया है। जू प्रशासन का कहना है कि ठंड में दिन देर से शुरू होता है और शाम जल्द ढल जाती है, ऐसे में विजिटर्स की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए समय में परिवर्तन अपरिहार्य है।
सुबह के वक्त मॉर्निंग वॉकर्स को 9 बजे तक पार्क में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। 9 बजे के बाद टिकट काउंटर खोल दिए जाएंगे, और आम पर्यटकों का प्रवेश शुरू होगा। सामान्य दिनों में जू में रोजाना औसतन 6 हजार विजिटर्स आते हैं, लेकिन सर्दियों के मौसम में यह संख्या बढ़कर 8 से 9 हजार तक पहुंच जाती है। इसकी एक वजह यह भी है कि ठंड के मौसम में बाहर निकलना लोगों को ज्यादा पसंद आता है, खासकर स्कूल और कॉलेज के घूमने के कार्यक्रमों के चलते।
अब जू का प्रवेश शुल्क प्रति वयस्क 50 रुपए और प्रति बच्चा 20 रुपए है। इसके अलावा जू में मौजूद नौकायान, शिशु उद्यान (किड्स प्लेयरिया), मछलीघर (एक्वेरियम) जैसी कई गतिविधियों का आनंद लेने के लिए अलग से शुल्क देना पड़ता है।
सभी प्रमुख पार्कों का समय भी बदला
पटना के ईको पार्क, बुद्धा स्मृति पार्क, चिल्ड्रेन पार्क, नदीमहाल पार्क और गांधी मैदान के आसपास स्थित छोटे-बड़े पार्कों के समय में भी परिवर्तन किया गया है। अब ये पार्क सुबह 5:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक खुले रहेंगे। यह समय-सीमा सुबह की सैर करने वालों और शाम के वक्त टहलने या मनोरंजन के लिए आने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए तय की गई है।
नगर निगम और पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पार्कों के समय में हर साल मौसम के अनुसार बदलाव किया जाता है। सर्दियों में सूर्योदय देर से होता है और शाम को अंधेरा जल्दी हो जाता है। इसलिए दिन के घंटे कम हो जाते हैं, जिसके कारण सुबह और शाम के संचालन के घंटे में कटौती की जाती है। वहीं, गर्मी के मौसम में जू और पार्क सुबह 5 बजे से ही खोल दिए जाते हैं और गर्मी के बढ़ने से पहले तक इन्हें देर शाम तक खुला रखा जाता है।
ठंड से बचाव के लिए जानवरों की विशेष देखभाल
सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पटना जू में रहने वाले जानवरों के लिए भी ठंड से बचाव की विशेष व्यवस्था की जा रही है। जैसे-जैसे तापमान गिर रहा है, जानवरों पर भी ठंड का असर नजर आने लगा है। ऐसे में जू प्रशासन ने प्राणियों को सुरक्षित और गर्म रखने के लिए कई कदम उठाए हैं।
जू निदेशक के मुताबिक, सभी बाड़ों और पिंजरों में हीटर और पीले बल्ब लगाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त जहां जरूरत होगी, वहां गर्म हवा वाले ब्लोअर भी लगाए जाएंगे। खासकर शेर, बाघ, हाथी, भालू, हिरण और बंदर जैसे जंगली जानवरों के लिए अतिरिक्त गर्माहट की व्यवस्था की गई है। कुछ जानवरों के लिए मोटे कंबल और घास या फूंस की मोटी परत बिछाई जाएगी ताकि वे ठंडी जमीन के सीधे संपर्क में न आएं।
आवश्यकतानुसार जानवरों के आहार में भी बदलाव किया जाता है। कई प्रजातियों के लिए ऊर्जा और गर्मी प्रदान करने वाली खाद्य सामग्री बढ़ा दी जाती है। उदाहरण के लिए, हाथियों को इस मौसम में गुड़, चना, चावल और खास तरह के दाने दिए जाते हैं। इसी तरह बंदरों और हिरणों को भी पौष्टिक और गर्म रखने वाला भोजन मुहैया कराया जाता है।
जू प्रशासन की तैयारी
जू प्रशासन का कहना है कि हर साल ठंड के मौसम से पहले पिंजरों की स्थिति और जरूरी उपकरणों की समीक्षा की जाती है। सभी हीटर, ब्लोअर, बल्ब और फेंसों की जांच की जाती है, ताकि किसी भी तरह की खराबी न हो। जू के रखरखाव कर्मचारी नियमित रूप से गश्त करते हैं और देखते हैं कि कहीं किसी जानवर को अतिरिक्त सुरक्षा या देखभाल की जरूरत तो नहीं।
जू में आने वाले लोग भी इस तैयारी को नजदीक से महसूस कर सकते हैं। एक ओर जहां विजिटर्स को सर्द मौसम का आनंद लेने का अवसर मिलता है, वहीं दूसरी ओर उन्हें यह जानकर संतोष होता है कि यहां रहने वाले प्राणी भी पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित हैं।
पटना में बढ़ती सर्दी ने जहां लोगों की दिनचर्या पर असर डाला है, वहीं इसका प्रभाव शहर के प्राकृतिक और वन्यजीव पार्कों पर भी दिखाई दे रहा है। जू और पार्कों के समय में बदलाव से लेकर जानवरों के लिए किए गए खास इंतजाम तक, यह शहर के प्रशासन की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का उदाहरण है। पर्यावरण और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह मौसम एक खास अवसर लेकर आता है—जहां वे प्रकृति के करीब रहकर उसका आनंद ले सकते हैं, वहीं जू में वन्यजीवों के जीवन को और करीब से समझ सकते हैं।