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Bihar cabinet expansion : बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियां तेज, अगले महीने नए चेहरों को मिल सकता है मौका; JDU से इतने विधायकों को मिल सकता है मौका Bihar wedding firing : मातम में बदलीं निकाह में खुशियां, हर्ष फायरिंग की गोली से दूल्हे की मौत, मची सनसनी couple railway track viral video : रेलवे ट्रैक पर रोमांस करता कपल बाल-बाल बचा, चलती ट्रेन देखकर उड़े होश; वीडियो वायरल Bihta Aurangabad rail project : पटना-औरंगाबाद रेल संपर्क होगा सुगम, भूमि अधिग्रहण शुरू; 4047 करोड़ रुपये में होगा निर्माण कार्य Dharmendra mortality : क्या ईशा और अहाना को मिलेगी धर्मेंद्र की संपत्ति में हिस्सेदारी? करीबी सूत्र ने बताया पूरा सच Bihar Crime News: बिहार में यहाँ अपराधियों ने व्यवसायी के स्टाफ को मारी गोली, डेढ़ लाख रुपए लूटकर हुए फरार.. Bihar Police Action : मोतिहारी में NIA की बड़ी कार्रवाई: साइबर फ्रॉड और हवाला कारोबार में नेपाल निवासी पति गिरफ्तार Bihar Teacher: बिहार के ऐसे शिक्षकों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा, दोषी पाए जाने पर वेतन भी वसूलेगी सरकार Mahila Rojgar Scheme 2025 : आपके भी खाते में अभी तक नहीं पहुंचें हैं 10 हज़ार रुपए, तो जानिए क्या है इसके पीछे की वजह; अभी बैंक जाकर करवा लें यह काम Bihar News: बिहार में बिजली बिल न भरने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, विभाग के विशेष प्लान के बाद मचा हड़कंप

Bihar cabinet expansion : बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियां तेज, अगले महीने नए चेहरों को मिल सकता है मौका; JDU से इतने विधायकों को मिल सकता है मौका

बिहार में अगले महीने मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी तेज है। जेडीयू अपने कोटे के छह और बीजेपी तीन खाली पद भर सकती है। जातीय संतुलन साधते हुए नए चेहरों को मौका मिलने की उम्मीद है।

Bihar cabinet expansion  : बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियां तेज, अगले महीने नए चेहरों को मिल सकता है मौका; JDU से इतने विधायकों को मिल सकता है मौका

30-Nov-2025 11:10 AM

By First Bihar

Bihar cabinet expansion : बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार अगले महीने मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी में है। सूत्रों की मानें तो जदयू (JDU) अपने कोटे के छह खाली मंत्रिमंडल पदों को भरने के लिए पूरी तरह तैयार है। पार्टी इस विस्तार के माध्यम से सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति बना रही है, ताकि प्रदेश में राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट हो और शासन की मजबूती भी बढ़े।


9 पद खाली, जदयू और बीजेपी दोनों को भरने हैं कोटे

फिलहाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट में कुल 9 मंत्री पद खाली हैं। इनमें जदयू के 6 और बीजेपी के 3 पद शामिल हैं। बिहार में मंत्रिमंडल की अधिकतम संख्या 36 हो सकती है और मौजूदा बंटवारे के फार्मूले के अनुसार एनडीए में बीजेपी के हिस्से 17, जदयू के हिस्से 15 (जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल), एलजेपी के हिस्से 2 और एचएएम-आरएलपी के हिस्से एक-एक मंत्री पद तय हुए थे। इस लिहाज से दोनों बड़ी पार्टियों के पास नए चेहरों को शामिल करने का पूरा अवसर है।


जदयू बढ़ाएगी कुशवाहा और अति पिछड़ा समाज का प्रतिनिधित्व

सूत्रों का कहना है कि जदयू का फोकस इस बार कुशवाहा समाज और अति पिछड़े वर्ग के विधायकों को प्रतिनिधित्व देने पर है। पार्टी इस सामाजिक संतुलन को बेहद अहम मानती है, क्योंकि बिहार में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग ही राजनीति की दिशा तय करता है। नीतीश कुमार की छवि भी इसी जातीय आधार पर मजबूत रही है।


वर्तमान में जदयू के कई वरिष्ठ मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग हैं। बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास 5 विभाग, विजय चौधरी के पास 4 विभाग, श्रवण कुमार और सुनील कुमार के पास 2-2 विभाग ऐसे में यह लगभग तय है कि नए मंत्रियों को मौका देने के लिए इन मंत्रियों का विभागीय भार हल्का किया जाएगा। विभागों का पुनर्वितरण भी मंत्रिमंडल विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।


बीजेपी भी अपने कोटे के तीन पदों पर नए नाम भेजेगी

बीजेपी की तरफ से भी मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत पहले ही मिल चुके हैं। वर्तमान में विजय सिंह,मंगल पांडेय,नितिन नवीन,अरुण शंकर प्रसाद के पास दो-दो विभाग हैं।बीजेपी संगठन सूत्र बताते हैं कि नए मंत्रियों को शामिल करते समय पार्टी युवाओं, महिलाओं और अति पिछड़े वर्ग को प्राथमिकता दे सकती है। यह आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर एक रणनीतिक फैसला होगा।


जदयू ने अन्य दलों के विधायकों को तोड़ने की बात से किया इनकार

हाल के दिनों में यह अटकलें तेज थीं कि जदयू दूसरे दलों के विधायकों को अपनी पार्टी में लाकर उन्हें मंत्री बनाने की तैयारी कर रही है। हालांकि जदयू के वरिष्ठ सूत्रों ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि “ऐसी कोई आवश्यकता नहीं है और पार्टी की ऐसी कोई इच्छा भी नहीं है।” सूत्रों के मुताबिक राज्यसभा चुनाव में अभी छह महीने का समय है और मौजूदा संख्या बल के साथ एनडीए पांचों सीटें जीतने की स्थिति में है। इसलिए अन्य दलों के समर्थन या विधायकों की जरूरत बिल्कुल नहीं है।


राज्यसभा चुनाव भी रणनीति का हिस्सा

राज्यसभा चुनाव में एनडीए की मजबूत स्थिति को देखते हुए किसी भी तरह की राजनीतिक सौदेबाजी की जरूरत नहीं है। यही कारण है कि जदयू अपने खुद के विधायकों को तरजीह देकर उनके बीच से नए नाम चुनना चाहती है। इससे पार्टी के भीतर असंतोष भी कम होगा और संगठन को मजबूती भी मिलेगी।


अगले महीने बढ़ेगी राजनीतिक हलचल

नीतीश कुमार का मंत्रिमंडल विस्तार हमेशा राजनीतिक रूप से अहम माना जाता रहा है। चाहे सामाजिक संतुलन हो, क्षेत्रीय समीकरण या राजनीतिक संदेश—हर विस्तार में मुख्यमंत्री एक नया संतुलन स्थापित करते रहे हैं।

इस बार भी जदयू और बीजेपी दोनों ही अपनी अगली चाल सोच-समझकर चलने की तैयारी में हैं। अगर सूत्रों पर भरोसा किया जाए तो अगले महीने बिहार की राजनीति में नए चेहरे, नए समीकरण और विभागों के नए बंटवारे के साथ हलचल तेज होने वाली है।