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15-Nov-2025 01:13 PM
By First Bihar
government formation bihar : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद राज्य में सरकार गठन की गतिविधियाँ तेज रफ्तार पकड़ चुकी हैं। जैसे-जैसे परिणाम स्पष्ट होते गए, एनडीए गठबंधन की जीत पक्की होती गई और इसी के साथ राजनीतिक हलचल भी बढ़ने लगी। रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सभी विधायकों को जल्द से जल्द पटना पहुँचने का सख्त निर्देश देकर संकेत दे दिया कि नई सरकार के गठन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, सोमवार को जेडीयू विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें नेतृत्व और सरकार गठन से जुड़े बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
एनडीए का दमदार प्रदर्शन
चुनाव परिणामों के अनुसार एनडीए ने इस बार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। भाजपा ने 89 सीटें जीतकर चुनावी मैदान में अपना मजबूत प्रभाव बरकरार रखा है, वहीं जदयू ने 85 सीटें हासिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ फिर साबित की है। इसके अलावा लोजपा (रामविलास) को 19, हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) को 5 और रालोमा को 4 सीटें मिली हैं। कुल मिलाकर एनडीए आराम से बहुमत के जादुई आंकड़े को पार करके सरकार बनाने की स्थिति में है।
एनडीए की इस प्रचंड जीत को केंद्र की मोदी सरकार की लोकप्रियता, एनडीए की संयुक्त रणनीति और बिहार में चलाए गए विकास कार्यक्रमों का परिणाम माना जा रहा है। विशेषकर भाजपा और जदयू के साझा अभियान, बूथ स्तर तक की पैठ और सामाजिक समीकरणों की सही पहचान ने गठबंधन को मजबूत आधार दिया।
पटना बुलाए गए विधायक – क्यों है यह महत्वपूर्ण?
नीतीश कुमार का सभी विधायकों को रविवार शाम तक पटना पहुँचने का निर्देश राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। आमतौर पर सरकार गठन से पहले विधायक दल की बैठकें सिर्फ औपचारिकता होती हैं, लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। चुनाव के दौरान कई तरह की अटकलें चलीं—कहीं नीतीश कुमार के रुख को लेकर सवाल उठे तो कहीं भाजपा के नेतृत्व को लेकर चर्चाएँ हुईं। ऐसे में नीतीश का जल्दबाज़ी में सभी विधायकों को बुलाना संकेत देता है कि जेडीयू किसी भी तरह की राजनीतिक असहमति या भ्रम की स्थिति से बचना चाहता है।
सोमवार को होने वाली बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए सर्वसम्मति से नीतीश कुमार के नाम पर मुहर लगने की पूरी उम्मीद है। हालांकि भाजपा इस बार अपने विधायकों की संख्या को देखते हुए सत्ता-साझेदारी में कुछ नए समीकरण ला सकती है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री पद पर जेडीयू का अधिकार बना रहेगा।
जेडीयू विधायक दल की बैठक – तय होगा नेतृत्व
जेडीयू के अंदर भी नेतृत्व को लेकर पूरी स्पष्टता दिखाई दे रही है। विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार के नाम को आगे बढ़ाने और एनडीए नेतृत्व को सहमति भेजने का प्रस्ताव पारित किया जा सकता है। इसके बाद एनडीए की संयुक्त बैठक में औपचारिक तौर पर नाम की घोषणा की जाएगी। यह भी माना जा रहा है कि इस बैठक में मंत्रिमंडल के स्वरूप पर भी चर्चा होगी। किन विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा, किस सहयोगी दल को कौन सा विभाग मिलेगा, इसकी रूपरेखा बनाने का काम भी इसी दौरान शुरू होगा। भाजपा अपनी संख्या को देखते हुए अधिक मंत्री पदों की मांग कर सकती है, जबकि जेडीयू भी संतुलन बनाए रखने की कोशिश करेगा।
कैबिनेट में पुराने चेहरे फिर लौटेंगे
दिलचस्प बात यह है कि नीतीश सरकार के वर्तमान 29 मंत्रियों में से 28 ने अपनी सीटों पर जोरदार जीत दर्ज की है। सिर्फ मंत्री सुमित कुमार सिंह को शिकस्त मिली है। यह परिणाम एनडीए सरकार के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाते हैं और यह भी संकेत देते हैं कि अधिकांश पुराने मंत्री फिर से मंत्रिमंडल में अपना स्थान बनाए रख सकते हैं। जदयू, भाजपा और सहयोगी दलों में जीत का यह रुझान यह भी दिखाता है कि सरकार के प्रति जनता में नाराज़गी नहीं थी, बल्कि विकास को लेकर सकारात्मक भावनाएँ कायम थीं।
नई सरकार से जनता की उम्मीदें
बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। विकास, रोजगार, कृषि सुधार, उद्योग स्थापना और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई मुद्दे ऐसे हैं जिन पर नई सरकार से बड़े निर्णयों की अपेक्षा है। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल के कारण माना जा रहा है कि आने वाले पांच साल में विकास की रफ्तार तेज होगी।
सोमवार की बैठक पर टिकी निगाहें
अब राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला दिन सोमवार माना जा रहा है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू विधायक दल की बैठक और उसके बाद एनडीए की संयुक्त कार्रवाई यह स्पष्ट कर देगी कि मुख्यमंत्री के तौर पर कौन शपथ लेगा, कब शपथ ग्रहण होगा और मंत्रिमंडल कैसा होगा। निस्संदेह, बिहार की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। एनडीए की बड़ी जीत ने रास्ता साफ कर दिया है, लेकिन नई सरकार की संरचना और नेतृत्व को लेकर अंतिम फैसला सोमवार की बैठक से ही सामने आएगा। जनता, राजनीतिक दल और पूरे राज्य की निगाहें इसी पर टिक गई हैं।