ब्रेकिंग न्यूज़

Patna school closed : पटना में बढ़ती ठंड का असर: 5 जनवरी तक कक्षा पांच तक के सभी स्कूल बंद, ऊपरी कक्षाओं के लिए बदला समय Bihar State Women Commission : बिहार की महिलाओं पर विवादित बयान देकर बुरे फंसे महिला मंत्री के हसबैंड , महिला आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान ; सरकार से कार्रवाई की मांग Bihar News: बिहार के SHO की सैलरी से हर दिन कटेंगे पांच सौ रूपए, कोर्ट के फैसले से हर कोई हैरान Bihar News: बिहार के SHO की सैलरी से हर दिन कटेंगे पांच सौ रूपए, कोर्ट के फैसले से हर कोई हैरान बिहार में NIA का बड़ा एक्शन: फुलवारी शरीफ PFI मामले में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया, पूछताछ के बाद एक को छोड़ा बिहार में NIA का बड़ा एक्शन: फुलवारी शरीफ PFI मामले में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया, पूछताछ के बाद एक को छोड़ा पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी की जयंती पर भव्य समारोह का होगा आयोजन, सीएम नीतीश कुमार होंगे शामिल पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी की जयंती पर भव्य समारोह का होगा आयोजन, सीएम नीतीश कुमार होंगे शामिल मुजफ्फरपुर पुलिस की नई पहल: अब थानों पर लगेगा जनता दरबार, SP ने सुनीं जन-समस्याएं Bihar News: बिहार का भ्रष्ट दारोगा 25 हजार घूस लेते हुआ गिरफ्तार, निगरानी ब्यूरो की टीम ने थाना गेट पर ही रंगे हाथ धर लिया

Bihar election : बिहार चुनाव में अचानक घनबेरिया का पेड़ा बना चर्चा का स्वाद, अमित शाह ने भी की जमुई की मिठास की तारीफ; जानिए क्या है इसकी पूरी कहानी

बिहार चुनावी माहौल में जमुई के घनबेरिया गांव का पेड़ा सुर्खियों में है। शुद्ध दूध से बना यह स्वादिष्ट पेड़ा न सिर्फ बिहार में, बल्कि विदेशों में भी अपनी मिठास के लिए मशहूर है।

Bihar election : बिहार चुनाव में अचानक घनबेरिया का पेड़ा बना चर्चा का स्वाद, अमित शाह ने भी की जमुई की मिठास की तारीफ; जानिए क्या है इसकी पूरी कहानी

08-Nov-2025 03:37 PM

By First Bihar

Bihar election : बिहार विधानसभा चुनाव के बीच इन दिनों जमुई का घनबेरिया गांव सुर्खियों में है। वजह न तो कोई चुनावी वादा है और न ही कोई राजनीतिक रैली, बल्कि यहां के मशहूर पेड़े की चर्चा है। यह वही पेड़ा है जिसका जिक्र खुद गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी जनसभा में किया। उन्होंने मंच से कहा कि जमुई के घनबेरिया का पेड़ा और खैरा बाजार की बालूशाही इतनी प्रसिद्ध है कि चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुंह इन्हीं मिठाइयों से मीठा कराया जाएगा। इस बयान के बाद से घनबेरिया का पेड़ा पूरे बिहार में ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है।


पेड़े की पहचान और लोकप्रियता

जमुई जिले के खैरा प्रखंड स्थित घनबेरिया गांव का पेड़ा आज केवल बिहार या आसपास के जिलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी मिठास विदेशों तक पहुंच चुकी है। अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में बसे प्रवासी भारतीय जब अपने वतन लौटते हैं, तो यहां का पेड़ा जरूर साथ ले जाते हैं। इस पेड़े की खासियत है दूध की शुद्धता और पारंपरिक विधि से निर्माण, जो इसे बाजार में अलग पहचान दिलाता है।


स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि यहां पेड़ा बनाने में कभी भी मिलावटी दूध या कृत्रिम स्वाद का उपयोग नहीं किया जाता। यही वजह है कि ग्राहकों का भरोसा सालों से कायम है। त्योहारों के मौसम में स्थिति यह होती है कि पेड़ा की एडवांस बुकिंग करनी पड़ती है। दो-दो दिन पहले ही लोग ऑर्डर देकर जाते हैं ताकि उन्हें शुद्ध और ताजा पेड़ा समय पर मिल सके।


एक गांव, एक पहचान

आज घनबेरिया गांव में एक दर्जन से अधिक पेड़े की दुकानें हैं। हर दिन क्विंटल के हिसाब से पेड़े की सप्लाई की जाती है। दुकानदारों के अनुसार, एक-एक दुकान से रोजाना 30 से 50 किलो पेड़ा तैयार होता है। पूरे साल की बात करें तो यहां से करीब दो करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। यह आंकड़ा किसी छोटे ग्रामीण उद्योग के लिए उल्लेखनीय है।


शुरुआत की कहानी

घनबेरिया के पेड़े की कहानी 1995 से शुरू होती है। गांव के लालबहादुर सिंह ने सबसे पहले यहां पेड़ा बनाने की शुरुआत की थी। उस समय एक किलो पेड़ा की कीमत मात्र 60 रुपये थी। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ी और आज यही पेड़ा 300 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। लालबहादुर सिंह की मेहनत और लगन ने न सिर्फ उन्हें रोजगार दिया बल्कि पूरे गांव को एक पहचान दिलाई।


रोजगार और बदलाव की नई राह

कोरोना महामारी के दौरान जब लॉकडाउन लगा, तो बड़ी संख्या में बिहार के युवा जो बाहर राज्यों में काम करते थे, अपने गांव लौट आए। उस कठिन दौर में घनबेरिया के पेड़ा उद्योग ने उन्हें नई उम्मीद दी। कई युवाओं ने पेड़ा व्यवसाय अपनाया और आज वही लोग घर पर रहकर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। इस उद्योग ने गांव की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार किया है।


अब तो स्थिति यह है कि गांव के चौक की जमीन की कीमतें भी बढ़ गई हैं। पेड़ा के चलते घनबेरिया अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि स्थानीय ब्रांड बन चुका है। यहां से न केवल जमुई बल्कि पटना और देवघर जैसे शहरों में भी पेड़े की सप्लाई होती है। कई वेंडर्स गांव-गांव जाकर इसे बेचते हैं।


स्वाद में बसती परंपरा

घनबेरिया के पेड़े का स्वाद इस बात का प्रमाण है कि पारंपरिक तरीकों से बनी चीजें आज भी लोगों के दिलों में जगह बना सकती हैं। इस मिठाई में न तो किसी कृत्रिम रंग का उपयोग होता है और न ही कोई रासायनिक पदार्थ। बस शुद्ध दूध, थोड़ी सी मेहनत और पुरखों से मिली कला की परंपरा – यही इसके स्वाद का रहस्य है।


चुनावी चर्चा से वैश्विक पहचान तक

अमित शाह के बयान ने घनबेरिया के पेड़े को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मिठाई की असली पहचान तो सालों पहले ही बन चुकी थी। अब जब बड़े नेता भी इसका जिक्र कर रहे हैं, तो गांववालों को गर्व है कि उनका मेहनत से बना उत्पाद बिहार की सांस्कृतिक पहचान बनता जा रहा है।


घनबेरिया का पेड़ा सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि मेहनत, परंपरा और स्थानीय स्वाभिमान का प्रतीक बन गया है। आज यह गांव बिहार के उन दुर्लभ उदाहरणों में शामिल है जहां एक पारंपरिक व्यवसाय ने न केवल स्वाद का संसार रचा, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी भी लिख दी।