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20-Oct-2025 09:00 AM
By First Bihar
Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने का इरादा स्पष्ट कर दिया है। पार्टी ने अपने 5 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी, जिससे अब तक वीआईपी कुल 11 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है।
वीआईपी की ओर से जारी ताजा सूची में पांच नए उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाल गोविंद बिंद को प्रत्याशी बनाया गया है। माना जा रहा है कि पार्टी ने इस सीट को लेकर काफी रणनीतिक सोच-विचार किया है क्योंकि बाल गोविंद बिंद लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और प्रदेश स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।
सुगौली विधानसभा क्षेत्र से मनोज सहनी को मैदान में उतारा गया है। मनोज सहनी पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं और स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। वहीं, बिहपुर से अर्पणा कुमारी मंडल को प्रत्याशी बनाया गया है। अर्पणा कुमारी मंडल वीआईपी की उन महिला नेताओं में से हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर मजबूत नेटवर्क खड़ा किया है।
कटिहार विधानसभा क्षेत्र से वीआईपी ने सौरभ अग्रवाल को उम्मीदवार घोषित किया है। व्यापारिक पृष्ठभूमि से आने वाले सौरभ अग्रवाल स्थानीय युवाओं में लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं। इसके अलावा, केसरिया विधानसभा सीट से वरुण विजय वीआईपी के चुनावी मैदान में उतरेंगे। पार्टी को उम्मीद है कि वरुण विजय की साफ-सुथरी छवि और क्षेत्रीय जनसंपर्क से उन्हें लाभ मिलेगा।
पहले वीआईपी ने अपनी पहली सूची में छह प्रत्याशियों के नाम घोषित किए थे। इन प्रत्याशियों में औराई विधानसभा क्षेत्र से भोगेन्द्र सहनी, बरुराज से राकेश कुमार, गौड़ाबौराम से संतोष सहनी, दरभंगा शहरी से उमेश सहनी, कुशेश्वरस्थान से गणेश भारती और आलमनगर से नवीन निषाद को टिकट दिया गया है। इन उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि वीआईपी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अपनी अलग पहचान और मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है।
गौरतलब है कि बिहार में महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है। आरजेडी और कांग्रेस के बीच जहां कई सीटों पर मतभेद सामने आए हैं, वहीं वीआईपी ने इस बार अपनी स्वतंत्र रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।
वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर महागठबंधन में उनकी पार्टी को उचित सम्मान और सीटें नहीं मिलती हैं, तो पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। इसी रुख को देखते हुए अब वीआईपी ने चरणबद्ध तरीके से अपने प्रत्याशियों की घोषणा शुरू कर दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वीआईपी की यह रणनीति दोहरा संदेश देती है। पहला, पार्टी यह दिखाना चाहती है कि वह अब किसी की राजनीतिक मोहताज नहीं है, और दूसरा, यह कदम महागठबंधन पर दबाव बनाने का भी प्रयास है ताकि सीट बंटवारे में उसे बेहतर हिस्सेदारी मिल सके।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाल गोविंद बिंद की प्रत्याशी के रूप में घोषणा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। इससे पार्टी संगठन में कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि नेतृत्व खुद मैदान में उतरकर चुनाव लड़ने को तैयार है।
वीआईपी का आधार मुख्य रूप से निषाद समुदाय से जुड़ा हुआ है, जो बिहार की कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। पार्टी का प्रयास इस बार इस समुदाय के साथ-साथ अति पिछड़े वर्ग और युवाओं को भी जोड़ने का है। हाल के महीनों में पार्टी ने सोशल मीडिया और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से अपनी उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में काम किया है।