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13-Oct-2025 10:34 AM
By First Bihar
Bihar Assembly Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का एक मुख्य विषय एनडीए के भीतर सीट बंटवारे का फार्मूला है। हाल ही में एनडीए नेताओं ने इस बार के सीट बंटवारे का फार्मूला तय कर दिया है, और इस बार की तस्वीर पिछले चुनावों से काफी अलग दिखाई दे रही है। बिहार की राजनीति में लंबे समय से जो “बड़े भाई-छोटे भाई” का फार्मूला लागू रहा, वह इस बार समाप्त कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब एनडीए में सत्ता की बागडोर किसके हाथ में है और किसकी राजनीतिक ताकत कितनी है, यह साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से यह चर्चा जोरों पर थी कि एनडीए में बीजेपी का रोल पहले जैसा नहीं रहा और जेडीयू का रुतबा कहीं ज्यादा बढ़ गया है। दरअसल, लोकसभा चुनावों के बाद यह धारणा बनाई गई थी कि एनडीए में जेडीयू की भूमिका निर्णायक है। अगर जेडीयू का समर्थन न होता, तो बीजेपी को सत्ता में आने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती। हालांकि बीजेपी के नेता हमेशा यह बताते रहे हैं कि उनके लिए नीतीश कुमार का समर्थन महत्वपूर्ण रहा, लेकिन राजनीतिक समीक्षक और पार्टी के अंदरूनी जानकार मानते हैं कि मोदी फैक्टर के बिना बीजेपी की जीत मुश्किल थी। इस बार की सीट बंटवारे की योजना ने इन चर्चाओं को एक नया आयाम दे दिया है।
विशेष रूप से इस बार का फार्मूला यह स्पष्ट कर रहा है कि बीजेपी ने एनडीए में अपना रोल और सशक्त कर लिया है। पिछले चुनावों में जेडीयू के पास सियासी ताकत अधिक थी, लेकिन इस बार जो सीटें बीजेपी को मिली हैं और जिस तरह से सीट बंटवारा तय किया गया है, उससे यह साफ संकेत मिलता है कि अब एनडीए की कमान मुख्य रूप से बीजेपी के हाथ में है। एनडीए के सहयोगी दलों को इस बार बीजेपी के नेतृत्व में चलना होगा, और जो नियम या फार्मूला बीजेपी तय करेगी, उसी पर सभी को टिकना होगा।
बीजेपी की इस बढ़ती ताकत का एक प्रमुख कारण मोदी फैक्टर है। पार्टी का मानना है कि लोकसभा और राज्य स्तरीय चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता और उनके नेतृत्व ने पार्टी को मजबूती दी है। वहीं, जेडीयू का रोल अब सीमित नजर आ रहा है, और उन्हें इस बात को समझना होगा कि सीट बंटवारे में अब बीजेपी की प्राथमिकता सबसे महत्वपूर्ण है। राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि यह बदलाव एनडीए के भीतर आने वाले समय के लिए भी संकेत है। यह साफ है कि भविष्य में भी बीजेपी एनडीए में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगी और गठबंधन के निर्णयों में उसका दबदबा बढ़ता जाएगा।
बीजेपी के इस बढ़ते दबदबे के पीछे यह सोच भी काम कर रही है कि सहयोगी दलों के साथ संतुलन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन मुख्य नेतृत्व हमेशा बीजेपी के हाथ में रहेगा। इससे यह भी स्पष्ट हो जाता है कि चुनावी रणनीति, उम्मीदवार चयन और सीटों का बंटवारा अब पूरी तरह से बीजेपी के दिशा-निर्देशन में होगा। इस बार का फार्मूला एनडीए के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह पहले के गठबंधन समीकरणों से अलग है और इसमें बीजेपी की ताकत और सियासी पकड़ को प्रमुखता दी गई है।
साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि इस बार एनडीए के सहयोगी दलों में सीटों की संख्या में संतुलन बनाए रखा गया है, लेकिन जो मुख्य निर्णायक शक्ति है वह स्पष्ट रूप से बीजेपी के हाथ में है। राजनीतिक रणनीति और चुनावी गणित को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी की भूमिका अब निर्णायक होगी। यह बदलाव न केवल वर्तमान सीट बंटवारे में दिखाई दे रहा है बल्कि आने वाले दिनों में एनडीए के अंदर राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर पड़ेगा।
इस तरह, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सीट बंटवारे का फार्मूला यह संकेत देता है कि अब तक जो राजनीतिक चर्चाएं और अनुमान लगाए जा रहे थे, उन्हें चुनावी आंकड़ों और फार्मूले ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। एनडीए के सहयोगियों को अब बीजेपी के नेतृत्व और फैसलों के अनुसार चलना होगा। यह बदलाव बिहार की राजनीति में बीजेपी की बढ़ती पकड़ का संकेत है और यह साफ करता है कि आगामी चुनावों में एनडीए के भीतर वास्तविक सत्ताधारी दल कौन होगा।
इस प्रकार, बिहार में सीट बंटवारे के इस नए फार्मूले ने राजनीतिक परिदृश्य बदल दिया है। बड़े भाई-छोटे भाई के पुराने फार्मूले का अंत और बीजेपी का बढ़ता दबदबा यह साफ संकेत देता है कि अब बिहार चुनाव में निर्णय लेने वाली मुख्य ताकत बीजेपी ही है। एनडीए के अन्य दलों को अब सहयोगी बनकर इस नए समीकरण में काम करना होगा। यह बदलाव न केवल चुनाव की रणनीति को प्रभावित करेगा बल्कि बिहार की राजनीति में लंबी अवधि के लिए भी असर डाल सकता है।