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12-Nov-2025 10:07 AM
By First Bihar
Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के वोटिंग पूर्ण हो चुकी है और अब बस इंतजार है तो 14 नवंबर का, जब फैसला आएगा। कुछ सीटें है, जो काफी संसय में है। ऐसे में तिरहुत प्रक्षेत्र के छह जिलों में बिहार की 49 विधानसभा सीटें हैं। इस बार इन जिलों में मतदान उत्साह पहले से कहीं अधिक देखा गया। पिछले विधानसभा चुनाव 2020 के मुकाबले इस बार औसतन 11 प्रतिशत अधिक वोटिंग हुई। मतदाताओं की इस बढ़ी हुई सक्रियता ने चुनावी माहौल को काफी रोमांचक बना दिया है। ऐतिहासिक रूप से तिरहुत प्रक्षेत्र में एनडीए का दबदबा रहा है, खासकर भाजपा को इस क्षेत्र में सबसे अधिक सीटें मिली हैं।
पिछली बार के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो मुजफ्फरपुर, पूर्वी और पश्चिमी चम्पारण, शिवहर, सीतामढ़ी और वैशाली की 49 सीटों में से भाजपा ने 26 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जदयू ने छह सीटें अपने नाम की थीं, जबकि वीआईपी को एक सीट मिली थी। राजद को 13 सीटों पर सफलता मिली थी, कांग्रेस को दो और भाकपा माले को केवल एक सीट पर जीत मिली थी। इस बार वीआईपी महागठबंधन के साथ खड़ा है, जिससे तिरहुत में राजनीतिक समीकरण में बदलाव देखने को मिल सकता है।
मिथिलांचल की स्थिति पर नजर डालें तो दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर के तीन जिलों में कुल 30 विधानसभा सीटें हैं। इस क्षेत्र में भी मतदाताओं की भागीदारी इस बार बढ़ी है। खासकर दरभंगा में मतदान लगभग सात प्रतिशत बढ़ा है। पिछले दो दशकों के चुनावी आंकड़े बताते हैं कि मिथिलांचल में एनडीए को मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिला है। 2020 के चुनाव में एनडीए ने यहां कुल 30 सीटों में से 22 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार भाजपा ने 11 सीटें जीती थीं, जबकि जदयू ने नौ सीटों पर विजय प्राप्त की थी। उस समय वीआईपी की दो सीटें भी एनडीए के खाते में गई थीं।
मिथिलांचल में ब्राह्मण बहुल इलाकों और अतिपिछड़ा समुदाय के मतदाता एनडीए के कोर वोटर माने जाते हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में एनडीए को लगातार सफलता मिलती रही है। इस बार वीआईपी महागठबंधन के साथ जुड़ने से राजद को सात सीटों पर जीत मिली है, वीआईपी को दो और माकपा को एक सीट पर सफलता मिली है। ऐसे सामाजिक और जातिगत समीकरण इस क्षेत्र के चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।
तिरहुत और मिथिलांचल की यह वोटिंग प्रवृत्ति आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए अहम संकेत है। एनडीए का पारंपरिक वोट बैंक मजबूत है, लेकिन महागठबंधन की रणनीति और वीआईपी का साथ इस बार नतीजों को बदल सकता है। मतदाताओं की बढ़ी हुई भागीदारी, क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण और जातिगत प्रभाव इस चुनाव को पिछले चुनावों से अलग और चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।
इस तरह, तिरहुत और मिथिलांचल के विधानसभा क्षेत्र बिहार के चुनावी नक्शे पर निर्णायक साबित हो सकते हैं। एनडीए का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार महागठबंधन की सक्रियता और क्षेत्रीय समीकरण इसे चुनौती दे सकते हैं। चुनावी विश्लेषक मानते हैं कि अंतिम परिणाम इन क्षेत्रों में वोटिंग रुझानों के आधार पर राज्य की सरकार का स्वरूप तय करेंगे।