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12-Nov-2025 11:18 AM
By First Bihar
Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं ने लोकतंत्र के महापर्व में अपनी भागीदारी से नया इतिहास रच दिया है। इस बार के चुनावों में महिलाओं ने न केवल बढ़चढ़कर वोट डाला, बल्कि उन्होंने मतदान के इतिहास में अब तक का सबसे ऊंचा रिकॉर्ड भी बना दिया। राज्य में दो चरणों में हुए मतदान में कुल 66.91 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जो 1951 से अब तक का सबसे ज्यादा है। लेकिन सबसे खास बात यह रही कि इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों से कहीं ज्यादा रही।
दोनों चरणों को मिलाकर 71.06 फीसदी यानी करीब 3.51 करोड़ महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। वहीं, पुरुषों में यह आंकड़ा 62.8 फीसदी यानी 3.93 करोड़ मतदाताओं का रहा। इस तरह महिला और पुरुष वोटिंग में करीब 9 प्रतिशत (8.8%) का अंतर दर्ज किया गया। यह अब तक का सबसे बड़ा अंतर है, जो बताता है कि बिहार की ‘नारी शक्ति’ अब राजनीति के केंद्र में है, न कि किनारे पर।
🔹 महिलाओं ने बदला मतदान का समीकरण
पहले चरण में 69.04 प्रतिशत महिलाएं वोटिंग में शामिल हुईं, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 61.56 रहा। दूसरे चरण में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ी — 74.03 प्रतिशत महिलाओं ने मतदान किया, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 64.1 प्रतिशत रहा। यानी दूसरे चरण में महिलाओं ने पुरुषों से लगभग 10 प्रतिशत ज्यादा वोट डाले।
कुल मिलाकर पहले चरण में 37,51,302 मतदाताओं ने वोट किया, जबकि दूसरे चरण में 37,01,355 ने। दोनों चरणों को मिलाकर 7.45 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह न केवल बिहार के लोकतांत्रिक उत्सव की झलक है, बल्कि महिलाओं की जागरूकता और सामाजिक-राजनीतिक भागीदारी में हुई ऐतिहासिक वृद्धि को भी दर्शाता है।
🔹 महिलाओं का बढ़ता प्रभाव और नई भूमिका
बिहार के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार महिलाओं ने सिर्फ मतदान का आंकड़ा नहीं बढ़ाया, बल्कि चुनाव के नतीजों की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई महिला सशक्तिकरण योजनाएं — जैसे आरक्षण, छात्राओं के लिए साइकिल और पोशाक योजना, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार — ने महिलाओं को राजनीतिक रूप से सजग और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया है।
ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की लंबी कतारें बताती हैं कि अब वे सिर्फ परिवार या समाज की जिम्मेदारी नहीं निभा रहीं, बल्कि लोकतंत्र की भी धुरी बन चुकी हैं। कई मतदान केंद्रों पर महिलाओं की संख्या पुरुषों से दोगुनी रही। यह बदलाव बिहार की राजनीति में निर्णायक साबित हो सकता है, क्योंकि महिला मतदाता अब हर दल के चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती हैं।
🔹 चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी और तकनीकी पारदर्शिता
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साथी आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ पूरे चुनावी संचालन की निगरानी की। दूसरे चरण में राज्य के सभी 45,399 मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे चुनाव प्रक्रिया को वास्तविक समय में देखा जा सके।
इस बार चुनाव में 8.5 लाख से अधिक मतदान कर्मियों की तैनाती की गई थी। 2,616 उम्मीदवार मैदान में थे और 1.4 लाख से ज्यादा मतदान एजेंट चुनाव प्रक्रिया में शामिल हुए। साथ ही 243 सामान्य पर्यवेक्षक, 38 पुलिस पर्यवेक्षक और 67 व्यय पर्यवेक्षक चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने में जुटे रहे।
🔹 बिहार चुनावों की अंतरराष्ट्रीय सराहना
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को इस बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया। पहली बार, अंतर्राष्ट्रीय चुनाव आगंतुक कार्यक्रम (IEVP) के तहत दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस, बेल्जियम और कोलंबिया के 16 प्रतिनिधियों ने बिहार का दौरा किया और मतदान प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
इन प्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग की व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि बिहार चुनाव दुनिया के सबसे सुव्यवस्थित, पारदर्शी और सहभागी चुनावों में से एक है। वेबकास्टिंग, डिजिटल ट्रैकिंग और महिला मतदान केंद्र जैसी व्यवस्थाओं ने इस बार के चुनाव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल बना दिया है।
🔹 इतिहास में दर्ज हुआ यह चुनाव
बिहार में 1951 के बाद यह पहला मौका है जब राज्य में इतनी ऊंची वोटिंग दर्ज की गई। कुल मतदान प्रतिशत 66.91 रहा, जो पिछले सभी चुनावों का रिकॉर्ड तोड़ता है। महिलाओं की 71 प्रतिशत से अधिक भागीदारी ने इस चुनाव को ऐतिहासिक बना दिया है।
यह न केवल मतदान का रिकॉर्ड है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी प्रतीक है। यह संदेश देता है कि अब बिहार की महिलाएं सिर्फ वोटर नहीं, बल्कि ‘निर्णायक शक्ति’ बन चुकी हैं। चुनावी रुझान और नतीजों पर भी इस महिला उभार का गहरा असर पड़ने की संभावना है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ने यह साबित कर दिया कि अब लोकतंत्र के इस पर्व में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि शक्ति बन चुकी है। 71 प्रतिशत से अधिक महिला मतदान ने दिखाया कि ‘नारी शक्ति’ अब सिर्फ मतदाता नहीं, बल्कि बदलाव की वाहक है। यह चुनाव बिहार के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में नया अध्याय जोड़ गया है — जहाँ महिलाएं अब सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे मजबूत आवाज़ हैं।