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Bihar Election 2025 : राजद, भाजपा और कांग्रेस सहित 25 सोशल मीडिया हैंडल पर केस, भड़काऊ पोस्ट करने पर ईओयू की कार्रवाई

बिहार विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया पर ईओयू की सख्त निगरानी जारी है। अब तक 25 हैंडल्स पर एफआईआर, 184 आपत्तिजनक पोस्ट हटाए गए और फेक वीडियो पर विशेष कार्रवाई की गई है।

30-Oct-2025 08:23 AM

By First Bihar

Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर जैसे-जैसे प्रचार अभियान तेज हो रहा है, वैसे-वैसे सोशल मीडिया पर गलत सूचना, भ्रामक कंटेंट और आचार संहिता उल्लंघन के मामलों की निगरानी भी सख्त कर दी गई है। चुनाव आयोग के निर्देश पर बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की सोशल मीडिया पेट्रोलिंग सेल चौबीसों घंटे सक्रिय है। इस सेल की सतर्कता के चलते अब तक कई राजनीतिक दलों से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की जा चुकी है।


ईओयू के एडीजी नैयर हसनैन खान और डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लन ने बुधवार को प्रेस वार्ता में बताया कि विधानसभा चुनाव की अधिसूचना लागू होने के बाद से अब तक राजद, भाजपा, कांग्रेस सहित कुल 25 सोशल मीडिया हैंडल्स पर आपत्तिजनक, भ्रामक एवं भड़काऊ पोस्ट डालने के आरोप में 21 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। इन मामलों में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, आईटी एक्ट और आचार संहिता उल्लंघन की धाराएं लगाई गई हैं।


67 लिंक पर कार्रवाई, 184 पोस्ट हटाए गए

डीआईजी ढिल्लन ने बताया कि अब तक 67 आपत्तिजनक लिंक की शिकायत पर कार्रवाई की गई है। ये लिंक विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे एक्स (पूर्व ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम, और यूट्यूब से जुड़े हैं। इन प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजकर 184 आपत्तिजनक पोस्ट या हैंडल्स को हटवाया गया है या लॉक कराया गया है।


उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की फेक न्यूज या भड़काऊ सामग्री चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है, इसलिए विशेष निगरानी दल गठित किया गया है जो चौबीस घंटे इन प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखता है।


चार यूट्यूब चैनलों पर भड़काऊ कंटेंट, दर्ज हुई एफआईआर

ईओयू की रिपोर्ट के अनुसार, चार यूट्यूब चैनलों पर ऐसी सामग्री मिली है जो विभिन्न समुदायों में भय, वैमनस्य और विद्वेष फैलाने की कोशिश करती है। इन चैनलों पर भी एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारियों ने बताया कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


इन चैनलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के अलावा उनके कंटेंट को ब्लॉक या हटाने के लिए संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस भेजा गया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार को भी प्रस्ताव भेजा गया है ताकि इन चैनलों और पेजों को स्थायी रूप से ब्लॉक या डी-एक्टिवेट किया जा सके।


एआई आधारित फेक वीडियो और डीपफेक पर भी निगरानी

डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लन ने कहा कि इस चुनाव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार फेक वीडियो और डीपफेक कंटेंट के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इनकी जांच और ट्रैकिंग के लिए ईओयू में अलग स्पेशल डेस्क बनाई गई है। अब तक 117 फेक या डीपफेक पोस्ट हटाए गए हैं, जबकि 6 नए एफआईआर दर्ज किए गए हैं।


उन्होंने बताया कि कई मामलों में राजनीतिक बयानबाजी को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जिससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हुई। ऐसे मामलों में तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से डिजिटल फॉरेंसिक जांच की जा रही है।


145 हैंडल्स निगरानी में, 249 मोबाइल नंबर ब्लॉक

एडीजी नैयर हसनैन खान ने बताया कि 145 सोशल मीडिया हैंडल्स या प्रोफाइल की पहचान की गई है जिन्हें निरंतर निगरानी में रखा गया है। इनमें 40 एक्स (ट्विटर) हैंडल्स, 28 यूट्यूब चैनल्स, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और 77 अन्य सोशल प्रोफाइल शामिल हैं।


उन्होंने कहा कि अक्टूबर महीने में अब तक 7 कुख्यात साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 249 मोबाइल नंबर ब्लॉक किए गए हैं, जो संदिग्ध गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे थे। जिलों से भी सिम ब्लॉकिंग की प्रक्रिया कराई जा रही है ताकि चुनावी माहौल में किसी भी तरह की अफवाह या फेक न्यूज न फैले।


म्यूल बैंक खातों पर भी कार्रवाई

ईओयू ने अगस्त माह में 199 म्यूल बैंक खातों को संदिग्ध पाया था, जिनका उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा चुनावी लेन-देन या प्रचार से जुड़ी अवैध गतिविधियों में किया जा सकता था। इन खातों से संबंधित जानकारियां एकत्र कर जांच एजेंसियों के साथ साझा की गई हैं।


फेक न्यूज पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की फेक न्यूज, अफवाह या भड़काऊ टिप्पणी को लेकर सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। जो भी व्यक्ति या संगठन इस तरह की गतिविधियों में लिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ईओयू ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध या भ्रामक पोस्ट की जानकारी तुरंत सोशल मीडिया पेट्रोलिंग सेल को दें, ताकि चुनाव के दौरान शांति, निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे।