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12-Nov-2025 07:16 AM
By First Bihar
Bihar Election 2025: 18वीं बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार इतिहास रच दिया गया। राज्य में रिकॉर्ड मतदान दर्ज हुआ है, जो पिछले चुनाव की तुलना में 9.6 फीसदी अधिक रहा। यह न सिर्फ बढ़ती जनभागीदारी का संकेत है बल्कि यह भी दिखाता है कि बिहार की जनता अब अपनी आवाज़ को लोकतांत्रिक तरीके से और अधिक मुखरता से दर्ज करा रही है।
इस बार का चुनाव केवल सियासी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि यह जनता का उत्सव जैसा बन गया। ग्रामीण इलाकों में बूथों पर सुबह से लंबी कतारें लगी रहीं, वहीं शहरी क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी ने नए रिकॉर्ड बनाए। चुनाव आयोग के अनुसार, सुबह 7 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ लगातार बढ़ती रही। कई बूथों पर तो मतदान समय बढ़ाना पड़ा।
जनसुराज आंदोलन ने बिहार की राजनीति में नया विमर्श खड़ा किया। युवा, रोजगार, शिक्षा और पलायन जैसे मुद्दों पर केंद्रित अभियान ने खासकर पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को गहराई से जोड़ा। “बच्चों के भविष्य पर मतदान करें” जैसी अपील ने जनमानस को छुआ और सोशल मीडिया से लेकर गाँव की चौपाल तक यह संदेश गूंजता रहा। यही वजह रही कि मतदान केंद्रों पर युवाओं की भीड़ देखने को मिली। पहली बार वोट डालने वालों में जबरदस्त उत्साह दिखा, जिसने कुल मतदान प्रतिशत को ऊँचा उठाने में अहम भूमिका निभाई।
जहाँ सरकार ने अपनी योजनाओं के जरिए जनता को लुभाने की कोशिश की, वहीं विपक्षी महागठबंधन ने ‘सपनों का बिहार’ दिखाकर मतदाताओं को आकर्षित किया। “हर घर से एक सरकारी नौकरी” और “महिलाओं के खाते में ₹30,000” जैसे वादों ने जनता के भीतर नई उम्मीदें जगाईं। विपक्ष के इस सकारात्मक अभियान ने जनता को मतदान के लिए प्रेरित किया। खासकर महिलाओं और युवाओं ने अपनी भागीदारी से यह जताया कि वे सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि बदलाव की दिशा तय करने वाले हैं।
राज्य सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं जैसे 125 यूनिट मुफ्त बिजली, महिला रोजगार योजना, और सीधा लाभ हस्तांतरण (DBT) ने मतदाताओं के बीच भरोसे का माहौल बनाया। इन योजनाओं का सीधा लाभ जब जनता तक पहुँचा, तो उन्होंने मतदान को अपने समर्थन और अपेक्षाओं को व्यक्त करने का जरिया बना लिया। खासकर ग्रामीण महिलाओं में इस बार अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। कई इलाकों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक दर्ज की गई, जिससे कुल मतदान प्रतिशत बढ़ने में बड़ी भूमिका रही।
इस चुनाव में ध्रुवीकरण भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर साबित हुआ। एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होने से मतदाताओं में “अपने पक्ष को मज़बूत करने” की भावना उभरी। वहीं जनसुराज और एआईएमआईएम जैसी पार्टियों ने कुछ क्षेत्रों में क्षेत्रीय समीकरणों को और तेज किया। ध्रुवीकरण ने मतदाताओं को निष्क्रिय नहीं, बल्कि सक्रिय बनाया एक पक्ष की बढ़त की खबरों ने दूसरे पक्ष के समर्थकों को भी मतदान केंद्रों तक खींच लाया। परिणामस्वरूप, इस बार मतदान में प्रतिस्पर्धा जैसी स्थिति बन गई।
नीतीश कुमार, लालू प्रसाद और रामविलास पासवान से जुड़े कई नेताओं के लिए यह अंतिम सियासी पारी है, वहीं नई पीढ़ी के नेताओं के लिए पहला बड़ा मौका। दिग्गजों की भावनात्मक अपील और युवाओं की डिजिटल मुहिम ने मिलकर इस बार के मतदान को अभूतपूर्व बना दिया। कई वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों ने “अपने नेता की आखिरी जीत सुनिश्चित करने” के लिए भारी संख्या में मतदान किया, जबकि नई पीढ़ी ने “नई राजनीति के अवसर” के रूप में मतदान को अपनाया।
बिहार ने इस चुनाव में साबित कर दिया कि जब जनता जागरूक होती है, तो लोकतंत्र मज़बूत होता है। महिलाओं, युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों की भागीदारी ने मतदान को नई ऊंचाई दी। गांवों में सुबह से महिलाएँ समूह बनाकर मतदान केंद्रों तक पहुँचीं, वहीं शहरों में कॉलेज छात्रों ने “पहले वोट, फिर काम” का नारा बुलंद किया। सोशल मीडिया पर “#VoteForBihar” और “#MyVoteMyVoice” जैसे हैशटैग पूरे दिन ट्रेंड करते रहे।
यह रिकॉर्ड मतदान केवल राजनीतिक दलों की जीत नहीं, बल्कि बिहार की जनता की लोकतांत्रिक चेतना की जीत है जिसने देश को यह संदेश दिया कि बिहार अब विकास और परिवर्तन पर वोट करता है, जाति और समीकरणों पर नहीं।