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Bihar Election 2025 : छोटे दलों के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण बना दूसरा चरण का चुनाव, इनके प्रदर्शन से तय होगी सत्ता की कुर्सी — तेजस्वी या नीतीश, कौन मारेंगे बाजी?

Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में छोटे दलों की परीक्षा है। HAM, VIP, RLM और AIMIM जैसी पार्टियां इस चरण में अपने जनाधार को साबित करने और सत्ता समीकरण में प्रभाव दिखाने की पूरी कोशिश में जुटी हैं।

Bihar Election 2025 : छोटे दलों के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण बना दूसरा चरण का चुनाव, इनके प्रदर्शन से तय होगी सत्ता की कुर्सी — तेजस्वी या नीतीश, कौन मारेंगे बाजी?

11-Nov-2025 11:14 AM

By First Bihar

Bihar Election 2025 : : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान मंगलवार को राज्य के 20 जिलों की 122 सीटों पर हो रहा है। इस चरण को जहां बड़े राजनीतिक दलों के लिए सत्ता की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है, वहीं छोटे क्षेत्रीय दलों के लिए यह “अस्तित्व की लड़ाई” बन गया है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM), विकासशील इंसान पार्टी (VIP), राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और AIMIM जैसी पार्टियां इस चरण में अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता और जनाधार साबित करने में जुटी हैं।


मांझी की पार्टी HAM के लिए अहम मोर्चा

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के लिए यह चरण बेहद अहम है। पार्टी इस चरण में इमामगंज, बाराचट्टी, टिकारी, अत्रि, सिकंदरा और कुटुम्बा जैसी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इन क्षेत्रों को पार्टी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। इमामगंज से मांझी की बहू दीपा मांझी और बाराचट्टी से उनकी समधन ज्योति मांझी मैदान में हैं। HAM का मुख्य फोकस इन इलाकों में अपने जनाधार को मजबूत करना और एनडीए के भीतर अपनी स्थिति को स्थिर बनाए रखना है। मांझी को उम्मीद है कि अगर पार्टी इन क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करती है तो भविष्य में एनडीए के साथ सीट बंटवारे और सत्ता में भागीदारी में उसे बड़ी भूमिका मिल सकती है।


मुकेश सहनी की VIP पर सबकी निगाहें

विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी के लिए यह चरण राजनीतिक रूप से निर्णायक है। महागठबंधन ने सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का वादा किया है, इसलिए उनकी पार्टी का प्रदर्शन सीधे इस संभावना से जुड़ा हुआ है। VIP करीब 15 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। शुरुआत में सहनी ने 40-50 सीटों की मांग की थी, लेकिन महागठबंधन में उन्हें सीमित अवसर मिला। यही कारण है कि दूसरे चरण में उनका प्रदर्शन यह तय करेगा कि पार्टी की भविष्य की मोलभाव क्षमता कितनी मजबूत होगी।


निषाद समुदाय के नेता के रूप में सहनी का वोट बैंक विशेषकर उत्तर और मध्य बिहार के जिलों में मजबूत है। बिहार की लगभग 36 प्रतिशत आबादी अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) से जुड़ी है, जिसमें VIP अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। अगर पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा, तो महागठबंधन में उसकी स्थिति काफी सशक्त हो सकती है।


उपेंद्र कुशवाहा की RLM के लिए साख की लड़ाई

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेता उपेंद्र कुशवाहा के लिए भी यह चरण अहम साबित हो सकता है। पार्टी इस बार छह सीटों पर मैदान में है। कुशवाहा, कोइरी (कुशवाहा) समुदाय के प्रमुख नेता हैं, और उनका जनाधार कई निर्वाचन क्षेत्रों में निर्णायक माना जाता है। इस बार उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा सासाराम से चुनाव मैदान में हैं, और उनकी जीत या हार पार्टी के मनोबल को सीधा प्रभावित करेगी। RLM का प्रभाव केवल सीटों की संख्या से नहीं, बल्कि वोटों के बंटवारे की क्षमता से भी तय होगा। अगर कुशवाहा का वोट बैंक बड़े दलों को नुकसान पहुंचाता है, तो एनडीए और महागठबंधन दोनों को इसका असर झेलना पड़ सकता है।


AIMIM की नजर सीमांचल पर

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के लिए बिहार चुनाव का दूसरा चरण सीमांचल क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण है। पार्टी किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार जैसी मुस्लिम बहुल सीटों पर चुनाव लड़ रही है। 2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 5 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। इस बार ओवैसी उसी प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी रणनीति मुस्लिम वोटों को एकजुट कर खुद को राज्य की राजनीति में एक “तीसरी ताकत” के रूप में स्थापित करने की है।


AIMIM विकास, शिक्षा और हाशिए पर पड़े समुदायों के सशक्तिकरण को मुद्दा बना रही है। साथ ही ओवैसी बीजेपी के ध्रुवीकरण के एजेंडे का मुकाबला करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। सीमांचल में AIMIM का प्रदर्शन यह तय करेगा कि पार्टी बिहार की राजनीति में स्थायी उपस्थिति बना पाएगी या नहीं।


छोटे दलों के लिए ‘जीत या अस्तित्व’ का सवाल

दूसरे चरण का मतदान न केवल इन दलों की राजनीतिक दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि गठबंधन की राजनीति में उनकी कितनी अहमियत बची है। जहां HAM और VIP अपने-अपने गठबंधन (एनडीए और महागठबंधन) में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं RLM और AIMIM स्वतंत्र पहचान और वोट प्रतिशत बढ़ाने के मिशन पर हैं। नतीजे यह साफ करेंगे कि बिहार की राजनीति में छोटे दल ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहेंगे या फिर बड़े दलों की रणनीतियों में सिर्फ “सहयोगी चेहरा” बनकर रह जाएंगे।


बहरहाल, दूसरे चरण का यह मतदान सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि इन छोटे दलों की राजनीतिक भविष्य की परीक्षा भी है — जो आने वाले सालों में बिहार की सत्ता संतुलन की दिशा तय कर सकती है।