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Bihar Election Result 2025: ‘टाइगर अभी जिंदा है’ बिहार की सत्ता में पूरी ताकत के साथ नीतीश कुमार की वापसी, सटीक रणनीति ने फिर से बनाया पावरफुल

Bihar Election Result 2025: बिहार चुनाव 2025 में जेडीयू की बड़ी वापसी हो रही है. जेडीयू 70+ सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. नीतीश कुमार के फिर से सत्ता में आने के 5 बड़े कारण सामने आए हैं.

14-Nov-2025 12:58 PM

By FIRST BIHAR

Bihar Election Result 2025: बिहार के चुनावी रूझानों में नीतीश कुमार जोरदार वापसी करते दिख रहे हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, 2020 में 43 सीट जीतने वाली जेडीयू इस बार 79 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। नालंदा, मुंगेर और सुपौल जैसे जिलों में जेडीयू क्लीन स्वीप करती नजर आ रही है। एनडीए गठबंधन के तहत नीतीश कुमार की पार्टी ने इस बार 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था।


रूझानों के अनुसार यह साफ हो गया है कि अगर एनडीए की सरकार बनती है, तो लगातार 10वीं बार नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री होंगे। चाहे अंतिम परिणाम कुछ भी हो, यह वापसी उनके राजनीतिक करियर के लिए बेहद अहम है। 2010 में नीतीश कुमार की पार्टी को 116 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन 2015 में वे 72 सीटों तक सिमट गए थे और 2020 में उनकी पार्टी बिहार की तीसरी बड़ी पार्टी बनकर रह गई थी। हम आपको बताते हैं नीतीश कुमार को पावरफुल बनाने के 5 असली कारण।


1. सक्रिय और रणनीतिक चुनावी तैयारी

चुनाव से पहले महागठबंधन के नेता नीतीश कुमार को बीमार बताकर कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहे थे। तेजस्वी यादव भी इस बात को लगातार प्रचार में इस्तेमाल कर रहे थे। नीतीश ने अपने चुप रहने के बावजूद अपनी एक्टिविटी से इसका जवाब दिया और चुनाव से ठीक पहले सक्रिय हो गए। जेडीयू के भीतर सीट शेयरिंग और टिकट बंटवारे में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। नालंदा में लोजपा (आर) को एक भी सीट न मिलने में नीतीश की दखल प्रमुख रही। यह साबित करता है कि “टाइगर अभी जिंदा है।”


2. मास्टर सोशल इंजीनियर

नीतीश कुमार को जाति और जेंडर के हिसाब से वोट जोड़ने में माहिर माना जाता है। चुनाव से ठीक पहले उन्होंने अपने वोटबैंक को मजबूत करने की कवायद शुरू की। उन्होंने महिलाओं, लव-कुश और महादलित समीकरण को साधा। नीतीश ने इस योजना के दम पर एंटी-इंकंबेंसी खत्म करने में भी सफलता पाई। उन्होंने अकेले 81 रैलियां कीं और 4 से ज्यादा रोड शो आयोजित किए।


3. जोन बांटकर नेतृत्व को जिम्मेदारी देना

नीतीश ने विभिन्न जोनों में अपने नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी।

कोशी-सीमांचल: विजेंद्र यादव

मिथिलांचल: संजय झा

पटना, मुंगेर, बांका: ललन सिंह

नालंदा: मनीष वर्मा

साथ ही, उन्होंने पुराने दिग्गजों जैसे दुलाल चंद्र गोस्वामी, चंद्रेश चंद्रवंशी और महाबली सिंह को मैदान में उतारा। तीनों अपने-अपने क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए हैं।


4. काम पर फोकस और व्यक्तिगत निशाना कम

इस बार नीतीश ने भाषणों में ज्यादा मुखर नहीं होकर केवल 20 साल के काम का जिक्र किया। पिछली बार लालू परिवार पर व्यक्तिगत निशाना साधने की वजह से आलोचना हुई थी, लेकिन इस बार उन्होंने केवल विकास के काम को सामने रखा। आरजेडी भी नीतीश पर ज्यादा हमलावर नहीं रही। इसके बजाय महागठबंधन और कांग्रेस नेताओं ने प्रचार में यह कहकर नीतीश को फायदा पहुंचाया कि बीजेपी उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी।


5. मुस्लिम वोट बैंक को साधना

नीतीश कुमार ने मुसलमानों को भी साधने में पीछे नहीं रहे। इस चुनाव में जेडीयू ने 4 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे, जिनमें से 3 बढ़त बनाए हुए हैं। पिछली बार जेडीयू सिंबल पर एक भी मुस्लिम उम्मीदवार जीत नहीं पाए थे।