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Bihar Election 2025 : एनडीए का नया M-Y फॉर्मूला, तेजस्वी यादव भी नहीं निकाल पाए तोड़; बदला पूरा राजनीतिक समीकरण

बिहार चुनाव 2025 में एनडीए ने पारंपरिक M-Y समीकरण को मात देते हुए महिला और युवा वोटरों पर नया दांव खेला। इस रणनीति ने जातीय गणित से लेकर राजनीतिक दिशा तक बड़े बदलाव के संकेत दिए।

Bihar Election 2025 : एनडीए का नया M-Y फॉर्मूला, तेजस्वी यादव भी नहीं निकाल पाए तोड़; बदला पूरा राजनीतिक समीकरण

17-Nov-2025 08:53 AM

By First Bihar

Bihar Election 2025 : बिहार चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने एक ऐसा सामाजिक-राजनीतिक समीकरण तैयार किया, जिसने परम्परागत “मुसलमान-यादव (M-Y)” समीकरण को पीछे छोड़ते हुए “महिला-युवा (M-Y)” समीकरण को आगे बढ़ाया। यह रणनीति न सिर्फ चुनावी परिणामों को स्पष्ट रूप से प्रभावित करती दिखाई दी, बल्कि बिहार की सदन की सामाजिक संरचना में भी बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। 


परंपरागत समीकरण का झुकाव

पारंपरिक रूप से बिहार की राजनीति में “M-Y समीकरण” यानी मुसलमान और यादव वोट बैंक बहुत मायने रखता रहा है, खासकर महागठबंधन के लिए। लेकिन इस बार एनडीए ने इसका मुकाबला नई पिचिंग रणनीति के साथ किया है। 


नया मायने — महिला और युवा

एनडीए की चुनावी रणनति का केंद्रबिंदु बन गया है महिला (महिला वोट बैंक) और युवा (युवा वोटर्स)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी विजय टिप्पणी में इस नए “M-Y फॉर्मूला” का ज़िक्र किया, जिसमें M का मतलब महिला और Y का मतलब युवा है। यह न सिर्फ सांकेतिक बयानबाज़ी है, बल्कि जमीन पर भी इसके वे स्पष्ट इशारे हैं — चुनाव प्रचार के दौरान और उसके बाद हुई सत्यापित रिपोर्ट्स के अनुसार, महिलाओं और युवा मतदाताओं का भरोसा एनडीए की ओर बहुत मजबूत रहा है। 


जातीय समीकरण में बड़ा बदलाव

कई अखबारों की रिपोर्ट यह बताती है कि 2025 की विधानसभा में चुने गए विधायकों का जातिगत स्वरूप पिछले विधानसभा की तुलना में बदल गया है।  पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व पहले से बढ़ा है। कुल 243 विधायकों में से लगभग 83 पिछड़ा और 37 अति पिछड़ा वर्ग के हैं। सवर्ण समाज के 72 विधायक हैं, जबकि अनुसूचित जाति (दलित/आदिवासी) के लिए आरक्षित सीटों पर 40 विधायक चुने गए। अल्पसंख्यक (मुसलमान) विधायकों की संख्या केवल 11 रह गई, जिसमें से 5 AIMIM के हैं।  यादव जाति, जो परंपरागत तौर पर M-Y समीकरण का कोर वोट बैंक रही है, के विधायकों की संख्या इस बार सिर्फ 28 है। इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि जाति आधारित राजनीति में एनडीए ने नए गठबंधन बनाए हैं और पुराने समीकरणों को तोड़ने की कोशिश की है।


एनडीए की प्रचार रणनीति और वादे

एनडीए की जीत में महिला-युवा समीकरण के अलावा कुछ और कारक भी अहम रहे हैं। जिसमें महिला रोजगार योजना: महिलाओं को 10,000 रुपये की सहायता देने वाली योजना ने महिला मतदाताओं को बंदे में रखने में बड़ी भूमिका निभाई। इसके बाद युवा-नौकरी मुद्दा: युवा वर्ग को रोजगार और भविष्य की संभावनाओं का भरोसा दिलाना भी एनडीए की रणनीति का हिस्सा था। इसके अलावा जो सबसे महत्वपूर्ण था वह ऐसा था कि “जंगल राज” की कहानी: एनडीए ने विपक्ष (खासतौर पर RJD) के पुराने शासनकाल की कमजोरियों, कानून-व्यवस्था की अस्थिरता की याद दिलाई और उसे अपने अभियान में जोड़ा। 


क्या यह रणनीति सफल रही?

वास्तव में, हां — एनडीए की इस नई पिच ने बहुत काम किया। मतदाता व्यवहार में बदलाव दिखा है, खासकर उन समूहों में जिन्हें परंपरागत राजनीति में कम मज़बूती से जोड़ा जाता था। महिला और युवा वोटर्स की संख्या और सहभागिता में बढ़ोतरी ने एनडीए को विशाल जनसमर्थन दिलाया। सोशल और आर्थिक वादों के ज़रिए एनडीए ने उन वर्गों के सपनों और आकांक्षाओं को साधा, जो सिर्फ पारंपरिक जाति-आधारित राजनीति के दायरे में नहीं होते।