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22-Oct-2025 01:51 PM
By First Bihar
Bihar Election : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान से पहले महागठबंधन को लगातार झटके लग रहे हैं। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होना है, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। लेकिन मतदान से पहले ही महागठबंधन के दो प्रत्याशियों का नामांकन रद्द हो जाना गठबंधन के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इनमें सबसे चर्चित मामला मोहनिया विधानसभा सीट से राजद पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ रही श्वेता सुमन का है, जिनका नामांकन अब निर्वाचन आयोग द्वारा रद्द कर दिया गया है।
मोहनिया सीट पर विवाद गहराया
मिली जानकारी के अनुसार, श्वेता सुमन महागठबंधन की ओर से मोहनिया विधानसभा सीट से उम्मीदवार घोषित की गई थीं। उन्होंने नामांकन भी दाखिल किया था और प्रचार की तैयारियां शुरू कर दी थीं। लेकिन अब खबर है कि निर्वाचन आयोग ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया है। हालांकि, चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है, परंतु आयोग के सूत्रों की माने तो दस्तावेजों की जांच के दौरान कई अनियमितताएं पाई गईं।
सूत्रों के मुताबिक, आयोग को यह जानकारी मिली कि श्वेता सुमन बिहार की मूल निवासी नहीं हैं बल्कि उत्तर प्रदेश की निवासी हैं। जब उनके नागरिकता और स्थायी पते से संबंधित कागजातों की जांच की गई तो पाया गया कि दिए गए दस्तावेज बिहार के निर्वाचन क्षेत्र से मेल नहीं खाते। इसी आधार पर आयोग ने उनके नामांकन को अमान्य करार दे दिया।
भाजपा ने उठाया था सवाल, आयोग ने की जांच
दरअसल, कुछ दिन पहले भाजपा ने श्वेता सुमन के नामांकन को लेकर आपत्ति जताई थी। भाजपा की ओर से कहा गया था कि महागठबंधन ने मोहनिया सीट पर जिस उम्मीदवार को उतारा है, वह बिहार की नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की निवासी हैं। भाजपा ने इस मामले में चुनाव आयोग को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि किसी अन्य राज्य का व्यक्ति बिहार में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ सकता।
भाजपा के स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया था कि श्वेता सुमन ने नामांकन के दौरान अपने स्थायी पते की जानकारी में गड़बड़ी की है और गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। इस पर आयोग ने मामले की जांच शुरू की और उम्मीदवार के दस्तावेजों की बारीकी से जांच कराई। जांच के बाद यह पाया गया कि भाजपा के आरोपों में सच्चाई है, जिसके बाद आयोग ने नामांकन रद्द करने का फैसला लिया।
महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ीं
श्वेता सुमन का नामांकन रद्द होने से महागठबंधन की स्थिति मोहनिया सीट पर कमजोर हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह सीट पहले से ही भाजपा के लिए मजबूत मानी जाती रही है, ऐसे में अब विपक्षी गठबंधन को नया कठिनाई हो सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पहले चरण के मतदान से पहले इस तरह के झटके से गठबंधन की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
महागठबंधन के स्थानीय नेताओं ने आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए वे अंतिम निर्णय का इंतजार करेंगे। वहीं कुछ नेताओं ने दावा किया है कि श्वेता सुमन के दस्तावेजों में कोई गंभीर खामी नहीं थी और भाजपा द्वारा राजनीतिक दबाव बनाकर यह कार्रवाई कराई गई है।
नामांकन रद्द होने के बाद नया समीकरण
मोहनिया विधानसभा सीट पर अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। क्योंकि पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होना है और अब संगठन को प्रचार की नई रणनीति तैयार करनी होगी। भाजपा ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि आयोग ने सही निर्णय लेकर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को बरकरार रखा है। भाजपा नेताओं ने बयान जारी कर कहा कि "बिहार में बाहरी उम्मीदवारों के प्रवेश से चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते थे, इसलिए आयोग का यह कदम लोकतंत्र के हित में है।"
जनता की प्रतिक्रिया और स्थानीय असर
मोहनिया और आसपास के इलाकों में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। कई मतदाता इसे "तकनीकी चूक" मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे "राजनीतिक चाल" बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग चुनाव आयोग के निर्णय पर मिश्रित प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि महागठबंधन इस झटके से कैसे उबरता है और मोहनिया सीट पर नया समीकरण किस ओर जाता है। लेकिन इतना तय है कि श्वेता सुमन का नामांकन रद्द होना महागठबंधन के लिए एक बड़ा झटका है, जो आगामी चरणों में चुनावी रणनीति पर गहरा असर डाल सकता है।