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Bihar Election 2025 : महागठबंधन में अभी तक सामने नहीं सीट शेयरिंग का फार्मूला, पहले चरण के नामांकन के बाद इन सीटों पर 8 प्रत्याशी आमने-सामने, तेजस्वी की भी बढ़ी टेंशन

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का नामांकन खत्म होते ही महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर घमासान मच गया है। आठ सीटों पर आरजेडी, कांग्रेस, वामदल और वीआईपी के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, जिससे गठबंधन की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है।

Bihar Election 2025

18-Oct-2025 08:37 AM

By First Bihar

Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन की प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हो गई। लेकिन पहले नामांकन की अंतिम तारीख बीत जाने के बाद भी महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, वामदल और वीआईपी) में सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन सकी। इस वजह से पहले चरण में ही महागठबंधन के आठ सीटों पर सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर गए हैं। इससे न सिर्फ महागठबंधन के अंदर मतभेद उजागर हो गए हैं बल्कि अंदरूनी कलह ने चुनावी समीकरणों को भी उलझा दिया है।


जानकारी के अनुसार, पहले चरण की कुल 121 विधानसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार को समाप्त हो गई। इसके बावजूद महागठबंधन ने औपचारिक रूप से सीट बंटवारे की घोषणा नहीं की। अंदरूनी खींचतान के बीच कांग्रेस ने 48 और भाकपा माले (CPIML) ने 18 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। वहीं, राजद और वीआईपी ने भी अपने-अपने स्तर पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा शुरू कर दी। नतीजा यह हुआ कि आठ सीटों पर महागठबंधन के सहयोगी दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतार दिए हैं।


इनमें 5 सीटों पर आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है, जबकि 3 सीटों पर कांग्रेस और वामदल (CPI या CPIML) आमने-सामने हैं। एक सीट पर वीआईपी और आरजेडी ने अपने प्रत्याशी उतारकर महागठबंधन की एकता पर सवाल खड़ा कर दिया है।


पार्टी सूत्रों के अनुसार, पिछले दस दिनों से दिल्ली और पटना के बीच लगातार मीटिंग्स और बातचीत का दौर चल रहा था। राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कई असंतुष्ट नेताओं को मनाने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। अंत में स्थिति यह बनी कि पार्टियों ने बिना आधिकारिक घोषणा के सिंबल बांट दिए और उम्मीदवारों ने जल्दबाजी में नामांकन दाखिल कर दिया।


वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने भी शुक्रवार को बड़ा बयान देकर माहौल गरमा दिया। उन्होंने कहा, “मुझे राज्यसभा नहीं जाना है, मैं डिप्टी सीएम बनना चाहता हूं।” सहनी ने खुद चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया, लेकिन अपने भाई संतोष सहनी को दरभंगा की गौराबौराम सीट से मैदान में उतारा। इसके अलावा उन्होंने औराई से भोगेंद्र सहनी, दरभंगा शहरी से उमेश सहनी और गोपालपुर से प्रेम शंकर यादव को टिकट दिया है। सूत्रों के मुताबिक, वीआईपी को 15 विधानसभा सीटों के साथ राज्यसभा और दो MLC सीटों का ऑफर मिला था, लेकिन सहनी ने राज्यसभा का प्रस्ताव ठुकरा दिया।


राजद की ओर से लालगंज सीट पर बाहुबली नेता मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला को टिकट दिया गया है। शिवानी ने अपनी मां अन्नु शुक्ला के साथ राबड़ी देवी के आवास से सिंबल लेकर नामांकन दाखिल किया। दिलचस्प बात यह है कि इसी लालगंज सीट पर कांग्रेस ने आदित्य कुमार राजा को उम्मीदवार बनाया है, यानी यहां भी महागठबंधन के दो उम्मीदवार आमने-सामने हैं।


वैशाली से आरजेडी ने अजय कुशवाहा को टिकट दिया है जबकि कांग्रेस ने संजीव कुमार को उतारा है। तारापुर सीट पर आरजेडी के अरुण शाह के खिलाफ वीआईपी के सकलदेव बिंद चुनाव लड़ रहे हैं। बेगूसराय के बछवाड़ा में सीपीआई के अवधेश राय के सामने कांग्रेस के गरीब दास मैदान में हैं। गौराबौराम में आरजेडी के अफजल अली और वीआईपी के संतोष सहनी आमने-सामने हैं।


कहलगांव से आरजेडी के रजनीश यादव के खिलाफ कांग्रेस के प्रवीण कुशवाहा ताल ठोक रहे हैं। वहीं राजापाकड़ में सीपीआई के मोहित पासवान का मुकाबला कांग्रेस की प्रतिमा दास से है। रोसड़ा में भी सीपीआई उम्मीदवार लक्ष्मण पासवान के सामने कांग्रेस ने बीके रवि को उम्मीदवार बनाया है।


इन सीटों पर महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीधी लड़ाई होने से एनडीए को बड़ा राजनीतिक फायदा मिल सकता है। चुनावी विश्लेषकों के मुताबिक, पहले चरण में ही अंदरूनी मतभेद उजागर होना महागठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि आगे के चरणों में क्या ये दल एकमत होकर उतरते हैं या फिर यह अंतर्विरोध चुनाव नतीजों पर भी असर डालेगा।