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08-Nov-2025 09:05 AM
By First Bihar
Success Story: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान के बीच लखीसराय निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। भाजपा उम्मीदवार और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के काफिले पर कथित तौर पर हमला किया गया, जिसमें पत्थर, कीचड़, गोबर और जूते-चप्पल फेंके गए। इस घटना ने इलाके में तनाव बढ़ा दिया और उपमुख्यमंत्री ने लखीसराय के एसपी अजय कुमार पर सीधे निशाना साधा, उन्हें कमजोर, कायर और निकम्मा बताया।
कौन हैं आईपीएस अजय कुमार?
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में लखीसराय के एसपी अजय कुमार हैं। सरकारी वेबसाइट ips.gov.in के अनुसार, अजय कुमार मूलतः बिहार के रहने वाले हैं और 5 दिसंबर 1972 को जन्मे, यानी वे 52 वर्ष के हैं। उन्होंने प्रोडक्शन इंजीनियरिंग में बीटेक किया है और बिहार पुलिस में राज्य पुलिस सेवा (SPS) से शुरुआत की। मेहनत और काबिलियत के दम पर उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में प्रमोशन मिला।
आईपीएस के रूप में उनकी औपचारिक नियुक्ति 22 दिसंबर 2023 को हुई और लखीसराय में उनकी पोस्टिंग 15 अक्टूबर 2024 को हुई। वे यहाँ 33वें एसपी के रूप में तैनात हुए। इससे पहले इस पद पर पंकज कुमार थे। अजय कुमार की प्रोफाइल एक अनुभवी अधिकारी की है, लेकिन चुनावी माहौल में उठे आरोपों ने उनकी छवि पर सवाल खड़ा कर दिया है।
घटना का विवरण
पहले चरण की वोटिंग के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा अपने निर्वाचन क्षेत्र के पोलिंग बूथों का निरीक्षण कर रहे थे। वे रामगढ़ चौक थाना क्षेत्र के खोरीयारी इलाके से गुजर रहे थे, जहाँ बूथ संख्या 404 और 405 स्थित हैं। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके काफिले पर पत्थरबाजी, कीचड़, गोबर और जूते-चप्पल फेंके। साथ ही जोरदार नारेबाजी भी की गई।
सिन्हा के अनुसार यह हमला राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के समर्थकों ने किया, जो बूथ कैप्चरिंग के दौरान अतिपिछड़े वोटरों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे थे। घटना के तुरंत बाद उपमुख्यमंत्री धरने पर बैठ गए। मौके पर एसपी अजय कुमार और जिलाधिकारी (डीएम) पहुंचे और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद सिन्हा धरने से उठे।
उपमुख्यमंत्री का पुलिस पर हमला
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने इस घटना को लेकर स्पष्ट कहा कि “हमारी ही सरकार की पुलिस इतनी असहाय कैसे हो गई?” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसी घटनाएं होती रहीं, तो आरजेडी समर्थकों के घरों पर बुल्डोजर चलाया जाएगा। सिन्हा का दावा है कि बूथ 404 और 405 पर आरजेडी समर्थक अतिपिछड़े वोटरों को डराकर मतदान प्रभावित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि डराने-धमकाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना काम करेगा।
इलेक्शन कमीशन की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद बिहार चुनाव आयोग अलर्ट मोड में है। डीजीपी ने निर्देश दिए कि दोषियों की तुरंत पहचान की जाए और सख्त कार्रवाई की जाए। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, लेकिन प्रशासन की प्राथमिकता अब मतदाताओं की सुरक्षा और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह घटना चुनाव के दौरान कानून और व्यवस्था की चुनौती को उजागर करती है। साथ ही यह दिखाती है कि राजनीतिक तनाव और अतिपिछड़े वोटरों की सक्रियता किस तरह से मतदान प्रक्रिया पर असर डाल सकती है।
स्थिति का राजनीतिक महत्व
लखीसराय घटना ने यह संकेत दिया कि चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया कितना महत्वपूर्ण है। एसपी अजय कुमार की भूमिका और उनकी तैनाती पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि उपमुख्यमंत्री ने उनकी क्षमता और तत्परता पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। इस घटना ने चुनावी राजनीतिक समीकरण और प्रशासनिक दक्षता दोनों पर प्रकाश डाला है।