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10-Nov-2025 10:03 AM
By First Bihar
Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का प्रचार रविवार शाम थम गया। अब मंगलवार को 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। इस चुनाव को कई वजहों से ऐतिहासिक कहा जा रहा है — क्योंकि इस बार बिहार की राजनीति ने एक साथ कई नए अध्याय लिखे। लालू यादव की गैरमौजूदगी, प्रशांत किशोर की एंट्री, फ्रीबीज की राजनीति, बाहुबली नेताओं के मर्डर और गिरफ्तारी से लेकर जंगलराज बनाम सुशासन के पुराने नैरेटिव तक — सब कुछ इस बार फिर से देखने को मिला। तीस दिन की इस चुनावी जंग में सत्ता, सियासत, और सस्पेंस का पूरा मेल दिखा। आइए जानते हैं इस बार बिहार चुनाव में कौन से मुद्दे सबसे अहम रहे और किन नेताओं के बीच सबसे तीखी टकराहट देखने को मिली।
1. पहली बार PM ने मंच से समझाया ‘जंगलराज’ का अर्थ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार बिहार चुनाव प्रचार में सबसे सक्रिय रहे। उन्होंने 24 अक्टूबर से 8 नवंबर के बीच बिहार में 16 रैलियां कीं और अपने हर भाषण में ‘जंगलराज’ का ज़िक्र किया। पहली बार उन्होंने ‘जंगलराज’ शब्द की व्याख्या भी की — “कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुसंस्कार और करप्शन ही जंगलराज के प्रतीक हैं।”
मोदी ने अपने भाषणों में करीब 300 बार ‘जंगलराज’ और 90 बार ‘कट्टा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उनके हमलों में नीतीश कुमार की उपलब्धियों की तुलना में लालू-राबड़ी राज का जिक्र ज्यादा दिखा। यह भी पहली बार था जब मंचों से ‘दू-नाली’, ‘छर्रा’, ‘नचनिया’ और ‘बाप’ जैसे शब्दों का राजनीतिक शब्दावली में खुला प्रयोग हुआ।
2. राहुल गांधी ने पहली बार बिहार में मछली पकड़ी
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस बार बिहार में अपने प्रचार का अंदाज पूरी तरह बदला। वे मल्लाह समाज के बीच पहुंचे और उनके वोट बैंक को साधने की कोशिश की। बेगूसराय में उन्होंने मल्लाह नेता मुकेश सहनी के साथ तालाब में उतरकर जाली से मछली पकड़ी, जिसकी तस्वीरें वायरल हो गईं। राहुल ने अपने भाषणों में कहा —“प्रधानमंत्री सिर्फ ड्रामेबाजी करते हैं। बिहार में जंगलराज की बात करने वाले खुद दिल्ली में जंगलराज चला रहे हैं।” राहुल का यह ‘ग्राउंड कनेक्ट’ अभियान कांग्रेस के लिए नया प्रयोग माना गया।
3. प्रशांत किशोर की एंट्री ने बना दिया त्रिकोणीय मुकाबला
बिहार के पॉलिटिकल स्ट्रैटजिस्ट प्रशांत किशोर (PK) ने पहली बार मैदान में खुद उतरकर राजनीति की। उन्होंने 2 अक्टूबर 2024 को ‘जन सुराज पार्टी’ की स्थापना की और 240 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। PK की सभाओं में उमड़ती भीड़ ने यह साबित किया कि जनता विकल्प चाहती है। उनकी वजह से मुकाबला अब सिर्फ NDA बनाम महागठबंधन नहीं रहा, बल्कि एक त्रिकोणीय संघर्ष बन गया है। उन्होंने लगातार NDA और RJD दोनों पर हमले किए और नेताओं के भ्रष्टाचार के दस्तावेज़ सामने रखे।
4. मर्डर और गिरफ्तारी से दहल गया चुनावी माहौल
30 अक्टूबर को मोकामा में चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या से सियासी हलचल मच गई। आरोप लगा कि जदयू उम्मीदवार अनंत सिंह की टीम से विवाद हुआ और उसके बाद गोली चली। दुलारचंद को पहले पैर में गोली मारी गई और फिर गाड़ी चढ़ा दी गई। इस घटना के बाद अनंत सिंह को गिरफ्तार कर बेऊर जेल भेजा गया। इस मर्डर केस ने चुनावी नैरेटिव को पूरी तरह बदल दिया और ‘गोलियों की गूंज’ फिर से बिहार की चर्चा बन गई।
5. दोनों गठबंधनों में CM फेस को लेकर खींचतान
महागठबंधन में CM फेस को लेकर तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के बीच तीखा टकराव हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि कांग्रेस हाईकमान को दखल देना पड़ा। आखिरकार 23 अक्टूबर को तेजस्वी यादव को CM कैंडिडेट और मुकेश सहनी को डिप्टी CM कैंडिडेट घोषित किया गया। लेकिन सीट शेयरिंग विवाद से नाराज़ कई उम्मीदवारों ने बगावत की, जिससे 12 सीटों पर फ्रेंडली फाइट की नौबत आ गई। वहीं NDA में अब तक CM चेहरा तय नहीं हुआ है, लेकिन बीजेपी ने साफ किया कि नीतीश कुमार ही नेतृत्व करेंगे और “CM पोस्ट पर कोई वैकेंसी नहीं है।”
6. लालू परिवार से ज्यादा चर्चा NDA नेताओं के भ्रष्टाचार की
इस बार चुनाव में लालू परिवार पर हमले के साथ-साथ NDA नेताओं के भ्रष्टाचार के आरोप भी चर्चा में रहे। प्रशांत किशोर ने रोजाना नए आरोपों के साथ सोशल मीडिया और सभाओं में NDA नेताओं की पोल खोली। उन्होंने BJP प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल पर मेडिकल कॉलेज हड़पने का आरोप, जदयू नेता अशोक चौधरी पर 200 करोड़ की जमीन घोटाले का आरोप, डिप्टी CM सम्राट चौधरी पर आयु प्रमाणपत्र फर्जीवाड़ा का आरोप लगाया। इन आरोपों से NDA को रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा।
7. आजादी के बाद सबसे ज्यादा वोटिंग
पहले चरण में 65% वोटिंग के साथ रिकॉर्ड बना। 18 जिलों की 121 सीटों पर वोट डाले गए, जिसमें मुजफ्फरपुर में 71.4% और पटना में 58.4% मतदान हुआ। यह आंकड़ा अब तक के सभी बिहार चुनावों में सबसे ज्यादा है, जिससे यह स्पष्ट है कि जनता इस बार बदलाव के मूड में है।
8. फ्रीबीज का नया कल्चर
2025 का बिहार चुनाव ‘मुफ्त वादों’ का चुनाव कहा जा सकता है। नीतीश कुमार ने महिलाओं को ₹10,000, पेंशन ₹400 से बढ़ाकर ₹1,100, श्रमिकों को ₹5,000, और 125 यूनिट फ्री बिजली की घोषणा की। इसके जवाब में तेजस्वी यादव ने ‘माई बहन योजना’ के तहत हर महिला को ₹2,500 मासिक, हर परिवार में एक सरकारी नौकरी, संविदा कर्मचारियों को स्थायी दर्जा देने का वादा किया। उन्होंने कहा कि सरकार बनते ही 14 जनवरी को महिलाओं को ₹30,000 एक साथ दिए जाएंगे। यह बिहार में पहली बार है जब फ्रीबीज की दौड़ इतनी तीव्र दिखी।
सबसे तीखे राजनीतिक टकराव
ललन सिंह बनाम तेजस्वी यादव :
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे कहते हैं — “मतदान के दिन विपक्षी घर से बाहर नहीं निकलें।” इसके बाद तेजस्वी यादव ने पलटवार किया —“किसी के बाप का राज है क्या? अति-पिछड़ा और दलित को घर से निकलने नहीं देंगे? बिहार इन्हें सबक सिखाएगा।”
तेजस्वी यादव बनाम असदुद्दीन ओवैसी :
तेजस्वी ने ओवैसी को चरमपंथी कहा, “ओवैसी सीमांचल के मुसलमानों का भला नहीं चाहते, वे धर्म के नाम पर वोट काटते हैं।” ओवैसी ने जवाब दिया —“हम अल्लाह के सामने झुकते हैं, तेजस्वी या मोदी के आगे नहीं। टोपी-दाढ़ी वाले को आतंकवादी कहने वाले अब खुद मोदी की भाषा बोल रहे हैं।” यह वाकयुद्ध मुस्लिम मतदाताओं में चर्चा का केंद्र बन गया।
तेजस्वी यादव बनाम अमित शाह :
अमित शाह ने कहा — “लालू-राबड़ी का जंगलराज नए कपड़ों में लौट आएगा।”तेजस्वी का जवाब था —“ए अमित शाह जी, ई बिहार हऽ। तोहर गीदड़ भभकी से डरे बला नइखे। एक बिहारी सब पर भारी।”दोनों के बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए।
अमित शाह बनाम ओवैसी :
शाह ने कहा —“हम बिहार से घुसपैठियों को निकालेंगे।”ओवैसी बोले —“मोदी जी की बांग्लादेश से आई बहन दिल्ली में है, पहले उन्हें भेजिए। बिहार के मुसलमानों को घुसपैठिया कहने की हिमाकत मत कीजिए।” यह बयान हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की दिशा में अहम माना गया।
नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी :
मोदी ने कहा —“पंद्रह साल के जंगलराज में बिहार में जीरो विकास हुआ।”राहुल ने पलटवार किया —“जंगलराज तो दिल्ली में है — जहां ईडी, सीबीआई और नफरत का राज चलता है।” दोनों के बीच यह बहस सोशल मीडिया पर ‘#JungleRaj’ ट्रेंड कराने वाली रही।
गिरिराज सिंह बनाम तेजस्वी यादव :
गिरिराज सिंह ने विवादित बयान दिया — “अगर गड़बड़ी होगी तो बुर्का उठाना पड़ेगा।” तेजस्वी यादव ने कहा —“बुर्का महिलाओं का अधिकार है। इस पर राजनीति नहीं की जा सकती।” इस बयान ने चुनाव में धार्मिक रंग भर दिया, जिसकी चौतरफा आलोचना हुई।
बिहार चुनाव 2025 का यह चरण सिर्फ वोटों का नहीं, बल्कि नैरेटिव की जंग भी है। जहां एक ओर प्रधानमंत्री मोदी ने जंगलराज बनाम सुशासन को केंद्र में रखा, वहीं राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय की बात की। प्रशांत किशोर की एंट्री ने तीसरा विकल्प पैदा किया, जिसने पारंपरिक समीकरणों को हिला दिया।
जेल में रहे नेताओं की चर्चा, फ्रीबीज की घोषणाएं, और शब्दों के युद्ध — इन सबने इस चुनाव को बिहार की राजनीति के इतिहास में सबसे दिलचस्प बना दिया है।अब बारी जनता की है — जो 11 नवंबर को अपने वोट से तय करेगी कि बिहार किस दिशा में जाएगा — परंपरा की राजनीति या बदलाव की ओर।