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15-Nov-2025 01:16 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Election Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने प्रशांत किशोर की सारी हेकड़ी निकाल दी। चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने बदलाव यात्रा में पूरी ताकत झोंक दी थी। बिहार की जनता को लुभाने के लिए एक के बाद एक बड़े दावे और वादे किए लेकिन चुनाव में पीके के सारे दावे हवा हवाई साबित हो गए।
दरअसल, इस चुनाव ने नई राजनीतिक पार्टी जनसुराज की ताकत और सीमाएं दोनों उजागर कर दी हैं। राज्य-स्तर पर पार्टी को 3.44% वोट शेयर मिला, जो पहली बार चुनाव मैदान में उतरी किसी भी नई पार्टी के लिए उल्लेखनीय माना जा रहा है हालांकि, सीट-दर-सीट विश्लेषण जारी होने के बाद पार्टी का प्रदर्शन उम्मीदों से काफी कमजोर नजर रहा।
चुनाव में 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारने वाली जनसुराज पार्टी को 68 सीटों पर NOTA से भी कम वोट मिले। इसका अर्थ है कि लगभग 28.6% सीटों पर मतदाताओं ने JSP के उम्मीदवारों को चुनने की बजाय किसी को नहीं वाला विकल्प अधिक पसंद किया। जानकारों का मानना है कि यह परिणाम उस अंतर को दिखाता है, जहां राज्य-स्तर पर पहचान बढ़ने के बावजूद स्थानीय स्तर पर पार्टी की पकड़ बेहद कमजोर रही।
एकाधिक सीटों पर मतदाताओं ने अपने क्षेत्र के जनसुराज उम्मीदवारों को खारिज करते हुए सीधे NOTA पर भरोसा जताया। उदाहरण के तौर पर देखें तो अलीनगर में JSP उम्मीदवार को 2275 वोट, NOTA को 4751 मत मिले। वहीं अमरपुर सीट पर JSP को 4789, NOTA को 6017, अररिया सीट पर JSP को 2434, NOTA को 3610, अतरी सीट पर जनसुराज उम्मीदवार को 3177 वहीं NOTA को 3516 मत, औरंगाबाद में जसुपा को 2755, NOTA को 3352, कोचाधामन सीट पर JSP को 1976, NOTA को 2039 मत मिले। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई क्षेत्रों में JSP उम्मीदवारों को बुनियादी समर्थन तक हासिल नहीं हो सका।
छोटे दलों की तुलना में जनसुराज का प्रदर्शन मिश्रित रहा। AIMIM के उम्मीदवार 14.3% सीटों पर NOTA से पीछे रहे। VSIP सिर्फ 8.3% सीटों पर NOTA से पिछड़ा। आजाद समाज पार्टी करीब आधी सीटों पर NOTA से कम वोट ला सकी। SUCI, समता पार्टी, बिहारी लोक चेतना पार्टी और NCP (बिहार यूनिट) एक भी सीट पर NOTA को पछाड़ने में विफल रहीं। इन परिणामों से यह भी स्पष्ट होता है कि कमजोर प्रदर्शन के बावजूद जनसुराज पार्टी कुछ छोटे दलों से बेहतर स्थिति में रही।
राज्य-स्तर पर JSP को 3.44% वोट मिले, जिससे वह सातवें स्थान पर रही। उससे अधिक वोट केवल RJD, BJP, JDU, कांग्रेस, LJP (RV) और निर्दलीयों को मिले। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्य-स्तरीय वोट प्रतिशत तभी प्रभावी माना जाता, यदि पार्टी सीट स्तर पर भी निर्णायक उपस्थिति दर्ज करा पाती।
चुनाव परिणाम बताते हैं कि प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने राज्य-स्तर पर ध्यान तो खींचा, लेकिन स्थानीय स्तर पर विश्वास हासिल करने में अभी बड़ी चुनौतियां बाकी हैं। NOTA से 68 सीटों पर पीछे रहना पार्टी के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि जनसंपर्क और पदयात्रा के बावजूद जनसुराज का असर कई क्षेत्रों में वोटों में बदल नहीं सका।