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12-Nov-2025 03:13 PM
By First Bihar
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जहां एक ओर मतदाता लोकतंत्र के इस महापर्व में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे थे, वहीं दूसरी ओर कुछ लापरवाहियों ने चुनाव की निष्पक्षता और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुजफ्फरपुर से ऐसी ही एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां मतदान के दौरान ईवीएम की तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का मामला सामने आया है। मामला सामने आते ही प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई और अब दो युवकों के खिलाफ साइबर थाना में केस दर्ज कर लिया गया है।
यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों — बरूराज और सकरा — से जुड़ा हुआ है। दोनों ही घटनाओं में मतदान के दौरान ईवीएम मशीन की तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किए जाने की पुष्टि हुई है, जिससे चुनाव आयोग की सख्त हिदायतों की अनदेखी का मामला उजागर हुआ है।
पहला मामला बरूराज विधानसभा क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, मतदान केंद्र संख्या 43 पर मतदान के दौरान एक युवक ने वोट करते समय मोबाइल फोन से ईवीएम की तस्वीर खींच ली। तस्वीर खींचने के बाद उसने उसे फेसबुक पर अपलोड कर दिया, जो तेजी से वायरल हो गया। जब यह खबर चुनाव अधिकारियों तक पहुंची तो तत्काल जांच के आदेश दिए गए। जांच में युवक की पहचान कमलेश यादव के रूप में की गई है। अब उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
दूसरा मामला सकरा विधानसभा क्षेत्र का है, जहां 6 नवंबर को मतदान हुआ था। सादिकपुर मरौल का रहने वाला सदानंद यादव मतदान के दौरान अपने मोबाइल फोन से ईवीएम का वीडियो बना रहा था। उसने यह वीडियो अगले दिन यानी 7 नवंबर को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, प्रशासन ने गंभीरता से संज्ञान लिया। मोतीपुर के सीओ ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाई, जिसके आधार पर मुजफ्फरपुर साइबर थाना में केस दर्ज किया गया।
यह पहला मौका नहीं है जब मतदान के दौरान ईवीएम की तस्वीरें या वीडियो वायरल हुए हों। इससे पहले 6 नवंबर को ही साहेबगंज विधानसभा से भी ईवीएम की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इस मामले में पुलिस ने यदुवंशी अभिषेक नाम के युवक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इन सभी मामलों में पुलिस जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।
ईवीएम का फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई। मुजफ्फरपुर साइबर थाना में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस का कहना है कि यह चुनाव आचार संहिता और गोपनीयता नियमों का उल्लंघन है। साइबर पुलिस ने बताया कि इन मामलों में तकनीकी जांच भी की जा रही है — यह पता लगाने के लिए कि तस्वीरें और वीडियो किस डिवाइस से ली गईं और सोशल मीडिया पर कहां-कहां शेयर की गईं।
मुजफ्फरपुर के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों के अंदर मोबाइल फोन पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद कुछ लोग नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जो गंभीर अपराध है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत न करे।
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, मतदान केंद्र के अंदर मोबाइल फोन, कैमरा या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। मतदान केंद्रों पर प्रवेश से पहले प्रशासन द्वारा मतदाताओं के मोबाइल फोन जमा करने की व्यवस्था की जाती है। इसके बावजूद यदि कोई मतदाता मोबाइल अंदर लेकर जाता है और उसका दुरुपयोग करता है, तो उस पर कार्रवाई तय है।
ईवीएम की सुरक्षा चुनाव आयोग की सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है, क्योंकि इसके माध्यम से ही जनता का मतदान सुरक्षित रखा जाता है। ऐसी किसी भी हरकत से न केवल चुनाव प्रक्रिया की गोपनीयता भंग होती है, बल्कि चुनाव की पारदर्शिता पर भी असर पड़ता है।
मुजफ्फरपुर में हुई इन घटनाओं ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब मतदान केंद्रों पर हर मतदाता की तलाशी ली जा रही थी, तब मोबाइल फोन अंदर कैसे पहुंच गए? यह बड़ा सवाल अब प्रशासनिक तंत्र के सामने है। कुछ राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि यदि इस तरह से मतदान केंद्रों में मोबाइल फोन पहुंचने लगे, तो वोटिंग की गोपनीयता खतरे में पड़ सकती है।
साइबर थाना प्रभारी ने बताया कि सोशल मीडिया पर किसी भी तरह का चुनाव संबंधित प्रतिबंधित कंटेंट साझा करना अपराध है। पुलिस अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी सख्त नजर रखे हुए है। उन्होंने चेतावनी दी कि कोई भी व्यक्ति मतदान केंद्र से संबंधित तस्वीरें, वीडियो या ईवीएम की तस्वीरें साझा करेगा, तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
बिहार चुनाव 2025 के बीच ईवीएम की तस्वीर और वीडियो वायरल होने का यह मामला चुनाव प्रक्रिया की गंभीरता को उजागर करता है। एक ओर जहां प्रशासन और चुनाव आयोग मतदान को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने में जुटे हैं, वहीं कुछ लोगों की लापरवाही पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़ा कर देती है। अब देखना यह होगा कि पुलिस जांच के बाद इन मामलों में क्या कार्रवाई होती है और चुनाव आयोग भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।